हेडमास्टरों की नियुक्ति और सेवा नियमावली को लेकर आनंद पुष्कर ने सरकार से मांग की- 'ऐसी नियमावली बनाए, जो प्रधानाध्यापकों के मनोबल को ऊंचा करे'

हेडमास्टरों की नियुक्ति और सेवा नियमावली को लेकर आनंद पुष्कर ने सरकार से मांग की- 'ऐसी नियमावली बनाए, जो प्रधानाध्यापकों के मनोबल को ऊंचा करे'

पटना. उच्च न्यायालय पटना ने अब्दुल बाकी अंसारी की रिट याचिका में हस्तक्षेप करते हुए कहा है कि प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक के लिए बिहार सरकार के द्वारा जो नियमावली बनाई गई है, उसमें उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। नियमावली का प्रारूप प्रकाशित करके उस पर सभी हितधारकों का परामर्श लिया जाना चाहिए था और उसके बाद एक बेहतर सेवा शर्त नियमावली बनाई जानी चाहिए थी, जो नहीं किया गया। इसलिए इसमें अपेक्षित सुधार किया जाए। इस पर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी आनंद पुष्कर ने कहा कि मेरा मानना है कि बिहार सरकार ने प्राथमिक विद्यालय के प्रधान शिक्षक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक के लिए जो सेवा शर्त नियमावली बनाई है वाह अधूरी है और उसमें ऐसा कुछ भी नहीं है, जो बिहार लोक सेवा आयोग से बहाल होने वाले हैं। प्रधानाध्यापकों के मनोबल को ऊंचा करे उसमें ना तो कोई वेतन संरचना है और ना ही भविष्य में प्रोन्नति का कोई प्रावधान है।

उन्होंने कहा कि मैं सरकार से यह मांग करता हूं कि नियमावली को संशोधित करते हुए सरकारी कर्मियों के अनुरूप वेतन संरचना और वृति उन्नयन योजना का प्रावधान किया जाए और इन्हें बिहार शिक्षा सेवा नियमावली 2014 के अंतर्गत समाहित किया जाए। बिहार शिक्षा संवर्ग में लाने के बाद ही प्रधानाध्यापकों से कार्यकुशलता की अपेक्षा की जा सकती है, अन्यथा स्थिति में बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा बहाल होने वाले प्रधानाध्यापक भी नियोजित शिक्षकों की तरह अपनी सेवा शर्त को लेकर चिंतित रहेंगे और उसमें सुधार के लिए सड़क से सदन तक और न्यायालय तक संघर्ष करने को विवश होंगे। मुख्यमंत्री नीतीश के नेतृत्व में जो सुशासन की संकल्पना है, उसे अमलीजामा पहनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विज्ञापन संख्या 1/ 87 के अंतर्गत बहाल पदाधिकारियों को माध्यमिक विद्यालयों में उच्च माध्यमिक शिक्षक के रूप में लंबे समय तक रखा गया और वे शिक्षक सरकार और न्यायालय का चक्कर लगाते रहे। भारत की सर्वोच्च अदालत से अंतिम निर्णय आने के बाद अब सरकार उनका संविलियन बिहार शिक्षा सेवा के अंतर्गत कर रही है। देर से मिला यह न्याय अन्याय से कम नहीं है। लगभग 35 साल तक संघर्षरत और न्यायालय के विचाराधीन रहने से यह शिक्षक जिस मान सम्मान और सेवा के लिए समर्पित है वह मान सम्मान और सेवा नहीं दे पाए, इसकी भरपाई असंभव हैष इसलिए मैं बिहार सरकार से मांग करता हूं कि प्राथमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक के लिए ऐसी सेवा शर्त नियमावली बनाई जाए, जिससे बिहार लोक सेवा आयोग के द्वारा बहाल शिक्षक गर्व का अनुभव करें और अपनी पूरी क्षमता से बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का प्रयास करें।

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