क्या 90 के दशक में लौट जाएगा टाल ? अनंत VS विवेका पहलवान के वर्चस्व की पूरी कहानी

न्यूज4नेशन डेस्क- बाढ़ का नदांवा (लदमा) गांव एक बार फिर से खूनी खेल का गवाह बना है. या यूं कहें कि बाहुबली अनंत सिंह का लदमा गांव फिर से सुर्खियों में है. अनंत सिंह के मुंगेर से लोकसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद कहानियों में सिमट चुका बाढ़ का वो नदांवा(लदमा) लोगों के जेहन में फिर से उस पुरानी खूनी रंजिश की कहानी को याद दिला रहा है. गुरुवार की रात बाढ़ में अनंत सिंह के करीबी को गोली मार दी जाती है. शुक्रवार को अनंत सिंह खुद घायल कन्हैया से मिलने अस्पताल पहुंचते हैं. बाढ़ में अनंत के करीबी पर हमला होना कोई मामूली बात नहीं है. इसलिए स्थानीय लोगों के बीच दबी जुबान में गैंगवार की चर्चा जोरो पर है.

विवेका पहलवान VS अनंत सिंह

गैंगवार की इस कहानी को समझने से पहले आपको विवेका पहलवान के बारे में जानना होगा. कहा तो ये जाता है कि विवेका पहलवान अनंत सिंह के रिश्ते में ही आते हैं. लेकिन दोनों एक दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते. विवेका पहलवान और अनंत सिंह के बीच 80 के दशक से खूनी खेल जारी है. वर्चस्व के इस लड़ाई में दोनों ओर से अब 2 दर्जन लोगों की हत्या हो चुकी है. अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच गैंगवार में अनंत सिंह के दो सहोदर भाई विरंची सिंह और सच्च्दिानंद सिंह उर्फ फाजो सिंह और विवेका पहलवान के सहोदर भाई संजय सिंह की भी हत्या हो चुकी है.

1986 में खेली गई खूनी होली

यूं तो अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच अदावत पुरानी है पर साल 1986 में यह अदावत और परवान चढ़ी. विवेका गुट ने अनंत सिंह के चार भाइयों में सबसे बड़े भाई विरंची सिंह की हत्या कर दी.  इसके बाद फिर विधानसभा चुनाव के बाद 1995 में विवेका पहलवान गुट ने अनंत सिंह के घर पर हमला कर दिया. इस हमले में दोनों ओर से जबरदस्त गोलेबारी हुई जिसमें अनंत सिंह के बहनोई भूषण सिंह और ट्रैक्टर ड्राइवर अकलू सहित अनंत सिंह के चार लोग तथा विवेका गुट के तीन लोग मारे गए थे.

2004 में लदमा में एके-47 से अनंत सिंह पर हमला

साल 2004 में विवेका के भाई संजय सिंह ने नदांवा(लदमा) में ही अनंत सिंह पर एके-47 से हमला किया. इस हमले में अनंत सिंह के शरीर में सात गोलियां लगी थीं. अस्पताल से छूटते ही पुलिस ने अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया. अनंत सिंह जब जेल में ही थे उसी वक्त 3 अगस्त 2004 को एसटीएफ ने नदांवा(लदमा) के अनंत सिंह के घर को घेर लिया. इसके बाद दोनों ओर से हुई गोलीबारी में अनंत सिंह के आठ समर्थक मारे गए थे.

2005 में अनंत की राजनीति में हुए एंट्री

2005 में जेल से निकलने के बाद अनंत सिंह ने मोकामा से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गए. अनंत सिंह के विधायक बनने के बाद नदांवा(लदमा) लगभग शांत था. इसी बीच 2006 में पटना के बेऊर थाना के गंगा विहार कॉलोनी में विवेका के समर्थक संजीत पहलवान की उसके घर में ही गोली मार कर हत्या कर दी गई. इस मामले में हत्या का आरोप अनंत सिंह व उनके समर्थकों पर लगा. शोध-प्रतिशोध के चले इस दौर में 2007 में विवेका पहलवान के पांच भाइयों में चौथे नंबर पर आने वाला संजय सिंह की सरेआम सरकारी दफ्तर में 2007 में हत्या कर दी गई.

2008 में विवेका गुट ने लिया बदला

अपने भाई के हत्या से बौखलाए विवेका पहलवान ने बदला लेना का ठान लिया था. 2008 में अनंत सिंह के दूसरे बड़े भाई सच्चिदानंद सिंह उर्फ फाजो सिंह की हत्या बाढ़ में तब कर दी गई जब वह बाढ़ स्थित अपने मार्केट में बैठे हुए थे. इस हत्या में विवेका के भाइयों कुख्यात भोला और मुकेश सहित उसके एक शूटर राजेश उर्फ फौजी को नामजद किया गया था.

अनंत सिंह को विवेका पहलवान ने ललकारा

मोकामा से लगातार चार बार विधायक चुने जाने के बाद अनंत सिंह ने मुंगेर से चुनाव लड़ने का दांव ठोक दिया. अनंत के इस फैसले से जेडीयू खेमे में हड़कंप मच गई. नीतीश कुमार के करीबी ललन सिंह और जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार अनंत सिंह पर टूट पड़े. लेकिन इन सब के बीच विवेका पहलवान ने भी अनंत सिंह से फरिया लेने का दम ठोक दिया. जानकार बताते हैं कि विवेका की अनंत को खुली चुनौती का को यूं ही हल्के में नहीं लिया जा सकता. बाढ़ में इन दिन हो रही हर गतिविधि पर बारिक नजर रखी जा रही है. अनंत और विवेका के मिजाज को जानने वाले लोगों का कहना है कि अनंत के गढ़ में छोटे सरकार के करीबी पर जानलेवा हमला किसी आने वाले बड़े गैंगवार की निशानी है.

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