भूमिहारों ने लड़ी लड़ाई, सुशील मोदी ने खाई सत्ता की मलाई! BJP के कद्दावर नेता रहे पूर्व विधायक 'अवनीश सिंह' ने पूछा-आपको नेता किसने बनाया?

भूमिहारों ने लड़ी लड़ाई, सुशील मोदी ने खाई सत्ता की मलाई! BJP के कद्दावर नेता रहे पूर्व विधायक 'अवनीश सिंह' ने पूछा-आपको नेता किसने बनाया?

PATNA :  बिहार बीजेपी से कोर वोटर की नाराजगी आने वाले समय में दल के लिए बड़ा सियासी संकट बनने वाला है,यह साफ हो चुका है। नाराजगी का असर भी दिख रहा है। बिहार विधानसभा की बोचहां सीट पर हुए उप चुनाव में भाजपा कैंडिडेट की करारी हार और राजद कैंडिडेट की बड़ी जीत के पीछे की बड़ी वजह भूमिहार वोटरों की नाराजगी बताई जा रही है। तेजस्वी यादव ने भी इस नाराजगी को भांप लिया है और पहले की गलती पर खेद व्यक्त किया है। तेजस्वी ने कहा है कि अगर भूमिहार वोटर साथ आ गये तो राजद को हराने वाला कोई नहीं । इधर, पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने यह कहकर भूमिहार वोटरों के जले पर नमक छिड़क दिया कि बीजेपी ने इस वर्ग के लिए जितना किया उतना किसी दल ने नहीं किया। इसके बाद सियासी पलटवार का खेल भी शुरू हो गया है। भाजपा के कद्दावर नेता रहे 1985 से 2014 तक दल का झंडा बुलंद करने वाले पूर्व विधायक अवनीश कुमार सिंह ने सुशील मोदी की पोल खोल दी है। 

किसने बनाया सुशील मोदी को नेता

इस बाबत भाजपा के कद्दावर नेता रहे व पांच बार के विधायक अवनीश सिंह ने सुशील मोदी से पूछा कि अगर आप इतने बड़े नेता बने कैसे? कौन सी वो ताकत थी जिसकी बदौलत बिहार में आप विपक्ष के सबसे बड़े खिलाड़ी बने और सत्ता के शिखर पर पहुंचे। 15 सालों तक लगातार सत्ता की मलाई खाते रहे, इसके पीछे किसका हाथ था? जरा याद कीजिए कि बिहार की धरती पर जब बीजेपी का झंडा उठाने को कोई तैयार नहीं था उस दौर में भूमिहार समाज से आने वाले कद्दावर नेता कैलाशपति मिश्र ने पार्टी का बीड़ा उठाया और आप उनके संरक्षण में पले-बढ़े। मोदी जी आपको याद करना चाहिए कि भूमिहारों ने बिहार में कांग्रेस को कब्रगाह बनाया और बीजेपी के रास्ते फूल बिछाया। आप भूमिहारों की ताकत की बदौलत लालू जैसे ताकतवर नेता से लड़ाई करने का साहस जुटाये। जब भूमिहार को लालू यादव से लड़ाई और भाजपा की अगुआई करने की वजह से दिनदहाड़े काटा जा रहा था उस दौर में भी यह समाज आपके साथ खड़ा था. जब आपके इर्द-गिर्द कोई खड़ा होने से डरता था उस दौर में भूमिहार-ब्राह्मणों ने न सिर्फ आपकी सुरक्षा की बल्कि आपको सियासी तौर पर खड़ा किया। पहले तो आप इसका जवाब दीजिए कि क्या आपने इस समाज का कर्ज चुकाया ? जब आप सत्ता में आये तो इसी समाज से आने वाले कद्दावर नेताओं का सियासी तौर पर साईड करने का काम नहीं किया और गणेश परिक्रमा करने वाले नेताओं को आगे नहीं बढ़ाया ?

बिहार विधान सभा का वाकया याद है न मोदी जी....

पूर्व विधायक अवनीश सिंह ने सुशील मोदी से पूछा कि बिहार विधानसभा के अंदर आपको बोलने की ताकत कहां से मिलती थी....थोड़ा याद कीजिए जब बिहार विधानसभा में जब-जब हंगामा हुआ और मारपीट की नौबत आई तब-तब यही समाज लालू यादव से लोहा लिया। आपको याद है जब 1990-95 के बीच सदन में आपकी फजीहत हुई तब यही भूमिहार नेता ने आपकी रक्षा की। जब-जब लालू एंड टीम ने बिहार विधानसभा में आपको बेइज्जत करने का प्रयास किया तब-तब जवाब इसी समाज के नेताओं ने ही दिया। आपको याद है न....स्पीकर गुलाम सरवर न हमारी सदस्यता खत्म कर दी थी। जरा दिमाग पर जोर डालियेगा कि आखिर स्पीकर ने हमारी सदस्यता क्यों खत्म किया था? एहसान-फरामोशी की भी एक सीमा होती है,उसे भी आपने पार कर दिया. याद कीजिए जब इस समाज की ताकत की बदौलत बीजेपी ने बिहार में सत्ता का स्वाद चखा तो आपका मिजाज कैसे बदला....।कैसे आपने करीने से इसी समाज के कद्दावर नेताओं को किनार करने की शातिर चालें चलनी शुरू कर दी। इस फेहरिस्त में एक नहीं बल्कि कई नाम हैं। 

नरसंहार भूमिहार झेलते थे, राजनीति आप की चमकती थी

अवनीश कुमार सिंह कहते हैं कि कल से जो एहसान जता रहे हैं कि बीजेपी ने भूमिहारों के लिए क्या नहीं किया......। यह क्यों नहीं बताते कि भाजपा के लिए भूमिहारों ने क्या किया। एहसान जताते समय कुछ तो अपने जमीर का ख्याल रखिये। समाज ने न सिर्फ पसीना बल्कि रक्त भी बहाया है। भूमिहारों ने इस पार्टी को बिहार की धरती पर अपने खून से सींचा है। नरसंहार भूमिहार झेलते थे, राजनीति आप की चमकती थी। भूमिहारों की लाश पर अपनी राजनीति चमकाने वाले मोदी जी अब तो आपका सियासी चेहरा भाजपा वालों ने ही खत्म कर दिया है। अब इस तरह से बोलने से भी फायदा नहीं रहा। 

अभी परिणाम भोगना बाकी

पूर्वी चंपारण जिले के ढाका और चिरैया से बीजेपी से पांच बार चुनाव जीते अवनीश सिंह आगे कहते हैं कि चाल-चेहरा और चरित्र वाली पार्टी का कैरेक्टर उजागर हो चुका है। विधान परिषद चुनाव और बोचहां उप चुनाव ट्रेलर है।सिनेमा अब देखिएगा। बिहार की धरती पर बीजेपी ने सत्ता का शिखर भी चूमा है. अब तैयार रहे सियासत के गर्त में जाने को। सम्मान कैसे दिया जाता है और लिया जाता है यह समाज बखूबी जानता है। राजनैतिक तौर पर इसकी समृद्धि इसी से छिपी नहीं है। भाजपा जिस तरीके से इस समाज को दरकिनार करने की कोशिश लगातार की है इससे क्षुब्ध अब यह समाज बीजेपी को दरकिनार करने में जुट गया है। आगाज हो गया है अंजाम का इंतजार करें।   

जानें सुशील मोदी ने क्या कहा था....

सुशील मोदी ने रविवार को ट्वीट कर कहा था कि  भूमिहार समाज को पहली बार भाजपा ने दिया केंद्रीय मंत्री,विधानसभा के 15 टिकट दिये. उन्होंने कहा कि लालू-राबड़ी राज में समाज का हुआ नरसंहार और राजद ने 2020 के विस चुनाव में दिया केवल एक टिकट . सुसील मोदी ने आगे कहा कि ब्राह्मण-भूमिहार समाज को भाजपा ने हमेशा यथोचित सम्मान दिया है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में भूमिहार समाज के 15 और  ब्राह्मण समाज के 11( कुल 26) लोगों को पार्टी ने टिकट दिये, जबकि राजद ने इन दोनों जातियों का अपमान करते हुए केवल एक टिकट दिया था।भाजपा ने ही भूमिहार समाज को पहली बार केंद्रीय मंत्री का पद दिया। बिहार में भाजपा कोटे से आज दो कैबिनेट मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष इसी समुदाय से हैं। 

अगले ट्वीट में सुसील मोदी लिखते हैं कि लालू-राबड़ी राज में भूमिहार-ब्राह्मण समाज का जितना अपमान-उत्पीड़न हुआ, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।   उस दौर में जाति पता कर इनका नरसंहार हुआ और इन्हें पलायन के लिए मजबूर किया गया था।  ऊंची जातियों को 10 फीसद आरक्षण देने का विरोध करने वाली लालू प्रसाद की पार्टी आज किस मुहँ से भूमिहार-ब्राह्मण समाज की हितैषी बन रही है? विधान परिषद का एक चुनाव या उपचुनाव किसी दल पर किसी समाज के भरोसे का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकता।  सबको पता है कि परिषद के चुनाव  किस आधार पर होते हैं। हाल के चुनावों में यदि पार्टी से कोई गलती हुई, तो उसे सुधारा जाएगा और सम्मान देने में कोई कमी नहीं की जाएगी।



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