बड़ा खुलासा: मोतिहारी में सत्ताधारी दल के नेता-भूमाफिया व अफसरों का गठजोड़! फर्जीवाड़ा कर बिक गई 'प्रतिबंधित' करोड़ों की जमीन

बड़ा खुलासा: मोतिहारी में सत्ताधारी दल के नेता-भूमाफिया व अफसरों का गठजोड़! फर्जीवाड़ा कर बिक गई 'प्रतिबंधित' करोड़ों की जमीन

MOTIHARI: बिहार में कहने को सुशासन की सरकार है। लेकिन इस सुशासन की सरकार में अफसर खुल्लम-खुल्ला गड़बड़ कर रहे। माफियाओं से मिलकर अधिकारी चांदी काट रहे। तभी तो निगरानी ब्यूरो जिस अफसर के घर छापेमारी कर रही वहां किलो के भाव से सोना व करोड़ों की संपत्ति मिल रही। पैसे के खातिर सरकारी सेवक नियमों को ताक पर रखकर फायदा पहुंचाने और इसके एवज में मोटी कमाई में जुटे हैं। पूर्वी चंपारण के निबंधन विभाग में एक बार फिर से इसी तरह के मामले सामने आये हैं। इसके पहले भी मोतिहारी निबंधन कार्यालय में करोड़ों के राजस्व चोरी का खुलासा हुआ था। 

सत्ताधारी दल के नेता-अफसर का गठजोड़

सत्तारूढ़ दल के एक नेता व अधिकारियों की मिलीभगत से रोक पंजी में दर्ज प्रतिबंधित वाली करोड़ो की जमीन बेच दी गई। मामला पूर्वीचंपारण के अरेराज निबंधन कार्यालय का है। निबंधन कार्यालय की मिलीभगत से रोक पंजी में दर्ज जमीन का खाता व खेसरा बदलकर जमीन की बिक्री कर दी गई। इस खेल में लाखों का खेल होने से इंकार नही किया जा सकता। जिले में रक्सौल के बाद अरेराज की जमीन बहुत कीमती है। नेता, पदाधिकारी व निबंधन कार्यालय के इस खेल का खुलासा तब हुआ जब दस्तावेज दाखिल खारिज के लिए अंचल कार्यालय पहुंचा।कागज अंचल कार्यालय पहुंचने पर पता चला कि एक दर्जन लोगो के साथ नेताजी खाता-खेसरा बदलकर जमीन रजिस्ट्री करा लिये। नेता जी सत्तापक्ष से जुड़े हैं और जिले में दल के बड़े पदधारक हैं। साथ ही वे कद्दावर नेता भी माने जाते हैं। वहीं नेता जी के रसूख के सामने कोई भी अधिकारी कुछ बोलने से परहेज कर रहे.

नेता अफसर व निबंधन कार्यालय में भारी फर्जीवाड़ा का खेल

रोक पंजी में दर्ज यानी उस जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इसके बाद जमीन को हड़पने का नया तरीका अपनाकर नेताजी ने अधिकारी व निबंधन कार्यालय के मेल से करोड़ो की जमीन रजिस्ट्री करा ली।  रोक पंजी की जमीन का खाता-खेसरा बदलकर बेशकीमती जमीन को बेच दिया गया । सबसे रोचक बात तो यह है कि खाता खेसरा बदलकर बेचे गए जमीन पर पदाधिकारियो की जानकारी में खरीदारों द्वारा कब्जा भी किया जा रहा है । फर्जीवाड़ा का खुलासा तो तब हुआ जब जमीन बिक्री के बाद खरीददार दाखिल खारिज के लिए अंचल में आवेदन दिये। अंचल कार्यालय में आवेदन मिलने के बाद हड़कम्प मच गया । अंचल सूत्रों की मानें तो तीन दस्तावेज खाता-खेसरा बदलकर दाखिल खारिज के लिए आया था । जिसको सीओ ने रद्द कर दिया । अब चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब अधिकारी अपनी सरकारी संपत्ति की रक्षा नही कर पा रहे तो आम आदमी को क्या न्याय मिलेगा? अगर सूक्ष्म तरीके से ईमानदार एजेंसी से इसका जांच कराई जाये तो बड़े बड़ी फर्जीवाड़ा का खुलासा हो सकता है।

जानें पूरा मामला

बता दें, अरेराज अनुमंडल क्षेत्र के आम गैरमजरूआ,सैरात,मठ मंदिर ,बेतिया राज सहित सरकारी की जमीन खरीद बिक्री से भूमाफियाओं से बचाने के लिए तत्कालीन एसडीओ धीरेन्द्र कुमार मिश्र व सीओ वकील सिंह ने खाता-खेसरा, रकबा सहित जमीन को रोक पंजी में दर्ज कराया था । लेकिन इधर अधिकारियों,निबंधन कार्यालय व नेता जी की मिलीभगत से बड़े फर्जीवाड़ा की चर्चा जोरों पर है। करोड़ो की जमीन उक्त लोगो की मिलीभगत से खाता खेसरा बदलकर बेच दिया गया । इतना ही नही चर्चा है कि इसके बाद रोक पंजी में दर्ज दूसरे करोड़ो की जमीन खरीद बिक्री के लिए एक अनुमंडल के बड़े अधिकारी कनीय अधिकारी पर भी दबाव बना रहे हैं । बिक्री की गई खाता-खेसरा की जमीन सड़क किनारे की बतायी जा रही है। रसूखदार नेता दी व पदाधिकारी की मिलीभगत और उनके नाम का खुलासा अगली कड़ी में होगी। 

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