सीएम नीतीश के एनडीए में जाने पर जदयू के केसी त्यागी का बड़ा संकेत... इंडिया की सुस्त चाल से JDU चिंतित, राम विरोधियों को लताड़ा
पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या फिर से एनडीए का हिस्सा बनेंगे? सियासी कयासबाजियों के बीच अब जदयू ने वरिष्ठ नेता और सीएम नीतीश के खास केसी त्यागी ने मंगलवार को बड़ा संकेत दिया है. उन्होंने विपक्षी दलों के इंडिया गठबंधन की सुस्त रफ्तार पर चिंता जताई है. त्यागी ने कहा, नीतीश कुमार के प्रयास से ही इंडिया बना है. देवीलाल जयंती के दौरान उन्होंने ही खुले मंच से कहा था कि कांग्रेस को आगे आकर उनके इस प्रयास का नेतृत्व करना चाहिए. उसके करीब 4 महीने बाद पटना में जून 2023 में विपक्षी दलों की बैठक हुई. वहीं मुंबई की बैठक के बाद इंडिया की रफ्तार सुस्त हो गई. तब हम देश में 400 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने की ओर बढ़ रहे थे. लेकिन विपक्ष का वह तीखापन अब समाप्त हो गया है. इसी की चिंता नीतीश कुमार को है.
ममता के रवैये पर हैरानी : उन्होंने कहा कि ऐसे में नीतीश के कुछ बोलने या कहीं आने जाने का अलग अलग राजनीतिक अर्थ लगा लिया जाता है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रवैये पर हैरानी जताई. त्यागी ने कहा कि दिल्ली में इंडिया की हुई बैठक में ममता बनर्जी का कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे करना उचित नहीं था. सीट श्येरिंग को लेकर भी सबसे ज्यादा परेशानी पश्चिम बंगाल में है. जबकि वैसी कोई समस्या बिहार में नहीं है.
कांग्रेस नहीं इंडिया के बैनर में होती यात्रा : राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बिहार में प्रवेश पर नीतीश कुमार के शामिल होने पर त्यागी ने बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश को कांग्रेस की ओर से इसमें शामिल होने के लिए निमंत्रण मिला है. लेकिन हम लोग चाहते थे कि यह यात्रा इंडिया के बैनर तले हो. वहीं कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया. राहुल की इस यात्रा में नीतीश जाएंगे या नहीं इस पर वे खुद फैसला लेंगे. उन्होंने कहा कि सीएम नीतीश लम्बे समय तक एनडीए में रहे हैं. वे भाजपा की चुनावी रणनीतियों को जानते हैं. इसलिए भाजपा की कमजोरियों का आकलन कर उस अनुरूप इंडिया की योजना बनाने का नीतीश ने प्रयास किया. नीतीश की चिंताएं इंडिया गठबंधन को मजबूत करने के लिए रही हैं.
राम पर विवादित टिप्पणी का विरोध : अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद इंडिया के कई घटक दलों के नेताओं द्वारा की गई बयानबाजी पर त्यागी ने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जदयू हमेशा से प्राण प्रतिष्ठा को लेकर नतमस्तक है. उसे भाजपा का राम मंदिर नहीं कहा जा सकता बल्कि न्यायालय के आदेश पर मंदिर बना है. भाजपा जरुर उसका राजनीतिक लाभ लेने में लगी है. उन्होंने कहा कि समाजवादी आंदोलन के नेता डॉ राम मनोहर लोहिया भी भगवान राम की स्वीकार्यता और उनके आराध्य होने तथा उनकी जो समाज में स्वीकार्यता रही है उसे हमेशा उन्होंने माना है. समाजवादियों ने रामायण मेले योजित किए. इसलिए भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के विरोध करने का कोई प्रश्न ही नहीं उठाता है. लेकिन भाजपा ने इसे एक राजनीतिक आयोजन बनाने का प्रयास किया जो अनुचित है. राम मंदिर का निर्माण भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही हुआ है. उन्होंने कहा कि कुछ नकारात्मक टिप्पणियां इंडिया गठबंधन के मित्र साथियों की ओर से हुई है जदयू उससे सहमत नहीं है. नीतीश कुमार या हमारे दल के किसी नेता ने कुछ भी ऐसा नहीं किया. हम सब भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर नतमस्तक है.