बिहार में आईटी एक्ट में पहली बार हुई 3-3 साल की सजा, राजगीर गैंगरेप के सभी सात आरोपितों को उम्र कैद

बिहार में आईटी एक्ट में पहली बार हुई 3-3 साल की सजा, राजगीर गैंगरेप के सभी सात आरोपितों को उम्र कैद

नालंदा। बीते साल सितंबर माह में अंतर्राष्टीय पर्यटक स्थल राजगीर की पहाड़ी पर नाबालिग छात्रा से हुए  गैंगरेप मामले में बिहारशरीफ व्यवहार न्यायालय के  पॉक्सो के विशेष न्यायाधीश एडीजे मंजूर आलम ने  सभी 7 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनायी है। साथ ही दो को वीडियो वायरल करने के मामले में तीन तीन साल की सजा सुनाई है। सभी सजाए साथ साथ चलेगी। मामले की सुनवाई स्पीडी ट्रायल के तहत की गयी। इस मामले में आरोपियों की पहचान वायरल वीडियो के आधार पर पुलिस ने की थी। इसकी पहचान बाद में पीड़िता ने भी अनुसंधान के दौरान की थी। 

बिहार में आईटी एक्ट के तहत पहली बार हुई सजा

सबसे खास बात यह रही कि बिहार में पहली बार आईटी एक्ट में आरोपियों को सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने दो गुनाहगारों को अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने के मामले में तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। इस केस में पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ 67 ए आईटी एक्ट के तहत भी केस दर्ज किया गया था। आज अदालत ने पॉक्सो एक्ट में आजीवन कारावास और आईटी एक्ट में भी तीन साल की सजा सुनाई है। 

इन्हें सुनायी गयी सजा 

 आरोपी मिथुन राजवंशी, करण राजवंशी, रंजन राजवंशी, आशीष राजवंशी, राहुल राजवंशी, राम चौधरी व सोनू कुमार है। सभी आरोपित राजगीर के निवासी हैं। 

क्या था मामला 

मामले के विशेष लोक अभियोजक सुशील कुमार व पीड़िता के वकील संजीव कुमार ने बताया कि 16 सितंबर 2019 की सुबह नाबालिग पीड़िता घर से ट्यूशन पढ़ने निकली थी। रास्ते में उसे पुरुष दोस्त मिला। इसके बाद दोनों पहाड़ी की ओर घूमने चले गए। घूमने के दौरान दोनों पहाड़ी पर बैठे थे। इसी दौरान अभियुक्तों ने पीड़िता व उसके दोस्त को घेर लिया। इसके बाद पीड़िता के दोस्त को मारपीट करते हुए भाग जाने को कहा। लेकिन, जब वे भागने को तैयार नहीं हुआ। तो, आरोपियों ने उसे अपने कब्जे में लेकर धमकाते हुए बैठने को कहा। तब पीड़ित के साथ सभी अभियुक्तों ने बारी-बारी से रेप किया।

इतना ही नहीं रेप कांड का वीडियो भी बनाया। जिसे फेसबुक और व्हाट्सएप पर वायरल कर दिया। इसके बाद मामला उजागर होते ही स्थानीय पुलिस ने मामले में एफआईआर करते हुए वायरल वीडियो के आधार पर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया था। मामले की अनुसंधान महिला दरोगा पिंकी प्रसाद ने किया। घटना को सत्य पाते हुए सभी अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किया।

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