डिप्टी CM ने मारी पलटी ! आबादी रोकने के लिए पहले UP मॉडल लागू करने की उठायी मांग, फंसता देख मांग डिलीट कर दी नई सलाह....

डिप्टी CM ने मारी पलटी ! आबादी रोकने के लिए पहले UP मॉडल लागू करने की उठायी मांग, फंसता देख मांग डिलीट कर दी नई सलाह....

पटना: सूबे की उप मुख्यमंत्री सह आपदा प्रबंधन विभाग की मंत्री रेणु देवी ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए राज्य में कुपोषण दर में कमी, साक्षरता दर बढ़ाने और परिवार नियोजन के संबंध में व्यापक जागरूकता लाने की जरूरत है। हालांकि यह सभी कार्य हो रहे हैं, इन कार्यो के परिणाम भी अच्‍छे मिले हैं, मगर इसमें युद्ध स्तर पर प्रयास करने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि जनसंख्‍या नियंत्रण के लिए महिलाओं से ज्‍यादा पुरुषों को जागरूक करने की जरूरत है। क्‍योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है। 

ज्ञात हो कि इससे पहले रेणु देवी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस बयान के इतर जाकर अपना बयान दिया था, जिसमें नीतीश कुमार ने साफ कर दिया था कि कानून बनाने से जनसंख्या का नियंत्रण संभव नहीं। जनसंख्या नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी महिलाओं को शिक्षित होना है। कानून आबादी रोकने में सक्षम नहीं। इस बयान के बाद ही रेणु देवी ने कहा था कि अब वक्त आ गया है कि बिहार में भी यूपी की तरह जनसंख्या नीति बननी चाहिए। बिहार देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है। बिहार में अब भी प्रजनन दर 3.0 है। हालांकि बाद में अपनी मांग को उन्होंने डिलीट कर दिया था।

अपने बाद के बयान में रेणु देवी ने कहा कि बिहार के कई जिलों में तो नसबंदी की दर मात्र एक प्रतिशत है। महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ के लिए सरकारी अस्‍पतालों में कई सुविधाएं दी जाती हैं मगर इन सुविधाओं को लाभ महिलाओं तक तभी पहुंचेगा, जब घर के पुरूष जागरूक हों और महिलाओं को अस्‍पताल तक लेकर जाएं। अक्‍सर देखा गया है कि बेटे की चाहत में प‍तिा और ससुराल वाले महिला पर अधिक बच्‍चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं, जिससे परिवार का आकार बड़ा होता जाता है। जनसंख्‍या नियंत्रण के लिए जेंडर इक्‍वालिटी पर भी काम करने की जरूरत है। लोगों को समझना होगा कि बेटा-बेटी एक समान हैं। 

उन्होंने कहा है कि बिहार में जनसंख्या स्थिर करने में व्‍यापक जागरूकता के आधार पर एक हद तक कामयाबी मिली है। मगर यह आज भी एक चुनौती है। बिहार देश के सर्वाधिक आबादीवाले राज्यों में से एक है। बिहार में अब भी प्रजनन दर 3.0 है।  राज्य में खुशहाली के लिए जनसंख्या स्थिर होना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों की भी राय है कि बढ़ती या अनियंत्रित आबादी राज्य की चहुंमुखी विकास में बाधक होती है। रेणु देवी ने कहा कि बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के शिविरों में भी गर्भनिरोधक गोलियों के वितरण, परिवार नियोजन के उपायों की जानकारी और सुरक्षित प्रसव की व्यरवस्‍था के लिए आग्रह किया गया है। 

पटना से विवेकानंद की रिपोर्ट

Find Us on Facebook

Trending News