नीतीश राज में फिसड्डी साबित हो रही बिहार की स्वास्थ्य सुविधाएं, नीति आयोग ने चौतरफा विकास के दावों की फिर खोली पोल

नीतीश राज में फिसड्डी साबित हो रही बिहार की स्वास्थ्य सुविधाएं, नीति आयोग ने चौतरफा विकास के दावों की फिर खोली पोल

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भले बिहार में बहार होने की बात करते हों लेकिन नीति आयोग बार बार उनके दावों की पोल खोल रहा है. ताजा मामला बिहार की स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ा है जिसमें नीति आयोग ने कहा है कि आबादी के लिहाज से भारत का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में देश में सबसे फिसड्डी है जबकि बिहार दूसरे पायदान और मध्य प्रदेश तीसरे नम्बर है. 

आयोग ने अपने हेल्थ इंडेक्स में केरल को अव्वल जबकि तमिलनाडु को दूसरे और तेलंगाना को तीसरे नंबर पर रखा है. संयोग से स्वास्थ्य सुविधाओं बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले तीनों राज्यों में गैर भाजपा-गैर राजग सरकार है जबकि तीनों फिसड्डी राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में राजग की सरकार है. बिहार को छोड़कर यूपी और एमपी में भाजपा के ही मुख्यमंत्री हैं. ताजा इंडेक्स में रेफरेंस इयर 2019-20 रखा गया है. छोटे राज्यों की बात करें तो मिजोरम ने इस इंडेक्स में सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली और जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है.

बिहार सरकार ने अपने वित्तीय बजट 2021-2022 में स्वास्थ्य के लिए 13,264 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, इसमें 6,900 करोड़ रुपए योजनाओं पर जबकि 6,300 करोड़ रुपए स्वास्थ्य सम्बन्धी निर्माण कार्यों में उपयोग करना था. इसी वर्ष जुलाई में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा था कि स्वास्थ्य ढांचे में सुधार पर अगले दो वर्षों में राज्य के 243 विधानसभा क्षेत्रों में 16.29 करोड़ रुपए प्रति निर्वाचन क्षेत्र की दर से 3959 करोड़ रुपए खर्च होंगे. 

राज्य में स्वास्थ्य के इतने भारी भरकम बजट के बाद भी नीति आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि बिहार में स्वास्थ्य सुविधाएँ फिसड्डी हैं. चाहे शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण इलाका हर जगह स्वास्थ्य सुविधाएँ आबादी के अनुपात में कमतर साबित हो रही हैं. 

नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स में हर राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं का मूल्यांकन उसके प्रमुख पहलुओं की हालत बताने वाले 24 इंडिकेटर्स के आधार जिसमें हेल्थ आउटकम, गवर्नेंस, स्वास्थ्य सूचनाओं और प्रक्रियाओं जैसे अहम पहलू शामिल हैं. आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि देश के तमाम राज्य अपने हेल्थ इंडेक्स का इस्तेमाल नीति निर्धारण और संसाधनों के आवंटन बेहतर बनाने के लिए कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह इंडेक्स एक ऐसी संघीय व्यवस्था की मिसाल हैं, जो एक साथ प्रतिस्पर्धात्मक और सहयोगात्मक दोनों हैं. 

राजीव कुमार ने बताया कि नीति आयोग ने यह रिपोर्ट केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर तैयार की है, जबकि विश्व बैंक ने इसके लिए तकनीकी सहयोग मुहैया कराया है. हेल्थ इंडेक्स के लिए 2019-20 को रिफरेंस ईयर लिया गया है. ये लगातार चौथा राउंड रहा जब केरल टॉप पर रहा. इससे पहले 2015-16, 2017-18 और 2018-19 में भी केरल शीर्ष पर रहा है. देश के 19 राज्यों को एक सूची में रखा गया जिसमें यूपी सबसे नीचे और बिहार 18वें नम्बर पर है. वहीं शेष छोटे राज्य और केंद्रित शासित प्रदेश अन्य राज्यों में श्रेणीबद्ध हैं जिसमें मिजोरम शीर्ष पर है.


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