भाजपा ने महागठबंधन की सरकार पर किया हमला, कहा 10 लाख नौकरियां नहीं दी तो लालू की तरह अप्रासंगिक हो जाएंगे नीतीश

भाजपा ने महागठबंधन की सरकार पर किया हमला, कहा 10 लाख नौकरियां नहीं दी तो लालू की तरह अप्रासंगिक हो जाएंगे नीतीश

PATNA : एनडीए को छोड़कर सीएम नीतीश के महागठबंधन का दामन थामने के बाद बीजेपी नेता लगातार तेजस्वी यादव पर हमलावर हैं। बीजेपी प्रवक्ता और पूर्व विधायक मनोज शर्मा ने कहा की जब 2020 के विधानसभा चुनाव में तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरी देने का वादा किया था। तब नीतीश कुमार ने 20 अक्टूबर 2020 के गोपालगंज के भोरे और सीवान के जीरादेई में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ''आजकल कई लोग कह रहे हैं कि सत्ता में आने पर ख़ूब नौकरियां देंगे। लेकिन इसके लिए पैसे कहाँ से लाएंगे? क्या ये पैसे जेल से लाएंगे या जाली नोट से सैलरी देंगे?'' तब आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद जेल में थे। उन्होंने कहा था कि 1990 से 2005 तक आरजेडी की सरकार बिहार में रही और इस दौरान कितनी सरकारी नौकरियां आईं? इनके राज में न सड़क थी, न बिजली. जंगल राज का वो दौर सबको याद है। दरअसल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार की बदहाल आर्थिक स्थिति नावाकिफ़ नहीं होंगे और इसी झुंझलाहट में उन्होंने कहा होगा कि दस लाख नौकरियों के लिए क्या जाली नोट छापेंगे? नीतीश कुमार अब झूठ बोल रहे है कि तब झूठ बोल रहे थे। राजनीति में कभी गम्भीर माने जाने वाले नीतीश कुमार अब अपना ही मजाक बना रहे है। 


मनोज शर्मा ने कहा की नीतीश कुमार ने अगर इस नौकरी वाले वायदे को पूरा नहीं किया तो वे भी लालू यादव की तरह अप्रासंगिक हो जाएंगे। लालू ने हाशिए के लोगों को स्वर दिया तो 15 साल तक राज किया। लेकिन इसके दम पर ही हमेशा राजनीति नहीं कर सकते थे। उसी तरह नीतीश कुमार भी केवल सड़क, बिजली और फ्लाईओवर के दम पर हमेशा शासन नहीं कर सकते हैं। नीतीश कुमार ने ख़ुद को नहीं बदला तो वो भी लालू की तरह अप्रासंगिक हो जाएंगे। 

उन्होंने कहा की बिहार में अभी 10 लाख रिक्त पद भी नहीं हैं, ऐसे में नई नौकरियां पैदा करना भी आसान नहीं है। बिहार में आमदनी का ज़रिया बहुत बचा नहीं है। शराब से एक बड़ा राजस्व बिहार को मिलता। लेकिन उसे भी बंद कर दिया गया है। अभी हर बात के लिए केंद्र की ओर देखना ही होगा। ऐसे में पैसे जुटाना बहुत मुश्किल है। बिहार का बजट 2021-22 में 2.17 लाख करोड़ था, जो कि 2022-23 में बढ़कर 2,37,691 करोड़ हो गया है। अब अगर ये 10 लाख सरकारी नौकरियां देते हैं तो कम से कम 35 हज़ार करोड़ के अतिरिक्त बजट की ज़रूरत पड़ेगी। ऐसे में यह चुनौती होगी कि यह पैसा कहां से लाएंगे?

मनोज शर्मा ने कहा की पिछले 2 वर्षों से बिहार सरकार का राजकोषीय घाटा का बजट चल रहा है। सरकार की खुद की आमदनी 35 हजार करोड़ के आसपास है। बाकी केंद्र के पैसे से सरकार चल रही हैं। अभी वर्तमान में जो योजना मद के खर्चे है उसको चलाने में पसीना छूट रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बताये की आगे कैसे लोगों को नौकरी देंगे? कैसे काम करेंगे? इसका विवरण दें। जुमला बाजी ना करें।

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