सिस्टम का भद्दा मजाकः बिहार में गाड़ियों का 'फिटनेस' टेस्ट बिना देखे और ड्राईवरों की 'आंख' जांच के लिए अभियान

सिस्टम का भद्दा मजाकः बिहार में गाड़ियों का 'फिटनेस' टेस्ट बिना देखे और ड्राईवरों की 'आंख' जांच के लिए अभियान

पटनाः बिहार में निबंधित करीब 10 लाख व्यवसायिक वाहनों के फिटनेस प्रमाण-पत्र का कोई इंतजाम नहीं है। बिना किसी जांच के ही सिर्फ MVI के सिग्नेचर करते ही किसी भी तरह की अनफिट गाडियां पूरी तरह से दुरूस्त हो जाती हैं।बिहार में हर दिन हजारो गाड़ियों का इसी तरह से फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी किये जा रहे हैं.  देश में शायद बिहार ही ऐसा पहला राज्य है जहां गाड़ियों के फिटनेस जांच की इस तरह की व्यवस्था है। परिवहन विभाग की जांच प्रणाली किसी मजाक से कम नहीं जहां एमवीआई बिना देखे ही प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों का प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं.

सिस्टम का मजाक- सिर्फ दिखावे की होती है कोशिश 

परिवहन विभाग का सिस्टम किसी मजाक से कम नहीं। अधिकारी सरकार की आंखों में धूल झोंकते हैं। विभाग की तरफ से दावे किये जाते हैं कि गाड़ियों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब सूबे में कहीं भी जांच केंद्र ही नहीं है तो फिर जांच कहां की जाती है। अब जरा परिवहन विभाग की नौटंकी देखिए, सड़क सुरक्षा माह का आयोजन किया गया है। एक माह में परिवहन विभाग 5 हजार ड्राइवरों की आंख जांच कर चश्मा देगी। सवाल यहीं पर है कि क्या सिर्फ आंख जांच करने से दुर्घटना कम होगी या फिर गाड़ियों का भी फिट होना जरूरी है ? इसका जवाब परिवहन विभाग के अधिकारियों को देना चाहिए? जानकार बताते हैं कि अगर सरकार सड़क दुर्घटना में वाकई में कमी लाना चाहती है तो फिर सिस्टम को दुरूस्त करना होगा। सिर्फ ड्राईवरों के आंख कराने से कुछ नहीं होगाा,यह तो सिर्फ आई वॉश है और सरकार की नजरों में बेहतर दिखने की कला है। 

परिवहन सचिव बोलेा-आंख जांच है जरूरी


परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बताया कि ऑटो, ट्रक एवं बस के चालकों का समय समय पर आंखों की जाँच जरूरी है। इसके लिए सड़क सुरक्षा माह के दौरान कम से कम 5000 वाहन चालकों के आंखों की जांच कर निः शुल्क चश्मा वितरण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी जिलों के जिला परिवहन पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है। सड़क दुर्घटनाओं में कमी आ सके इसके लिए सड़क सुरक्षा माह के दौरान ऑटो, बस एवं ट्रक के वाहन चालकों को रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। सड़क दुर्घटनाओ में ऑटो एक्सीडेंट भी बड़े पैमाने पर होते हैं। ऑटो चालकों को सड़क सुरक्षा के सामान्य नियमों से परिचित किया जाना आवश्यक है।लेकिन गाड़ियों का फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी करने को लेकर तकनीक का प्रयोग कब होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं। 

परिवहन विभाग सिर्फ फिटनेस प्रमाण-पत्र के लिए तकनीक से करता है तौबा 

जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग समय-समय पर कॉमर्शियल गाड़ियों का फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करता है।इस तकनीक वाले युग में भी परिवहन विभाग के अधिकारी बिना देखे ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करते हैं. वर्ष 2003-04 में सरकार की तरफ से ऑनलाइन फिटनेस जांच केंद्र की मंजूरी दी गई थी,इसकी संख्या 40 थी. लेकिन अब सूबे में निजी क्षेत्र में एक भी ऑनलाइन फिटनेस केंद्र संचालित नहीं हैं।सभी फिटनेस केंद्र का लाइसेंस खत्म हो गया इसके बाद परिवहन विभाग की तरफ से कोई नया लाइसेंस जारी नहीं की गई है।वहीं दूसरी तरफ बिहार में सरकार का अपना कोई भी फिटनेस केंद्र नहीं है। फिटनेस का काम विभाग ने एमवीआई को सुपूर्द कर दिया है। सरकार के पास एक भी डिजिटल फिटनेस केंद्र नहीं है। एक तरफ परिवहन विभाग का सारा काम ड्राईविंग लाइसेंस से लेकर अदना सा काम ऑनलाइन और डिजिटल मोड में हो रहा,लेकिन फिटनेस प्रमाण पत्र एमवीआई के द्वारा आंख से देखकर ही जारी किया जा रहा है। कई जगहों से ऐसी शिकायत भी लगातार मिलती है कि एमवीआई बिना जांच के ही फिटनेस प्रमाण पत्र जारी कर दिया.

बिहार में करीब 9.6 लाख कॉमर्शियल वाहन

बिहार मोटर व्हेकिल फिटनेस एसोसिएशन की तरफ से परिवहन विभाग से ऑनलाइन फिटनेस को लेकर लाइसेंस निर्गत करने की मांग की जाती रही है।लेकिन परिवहन विभाग को एमवीआई के आंख पर ज्यादा भरोसा है।बिहार विधान मंडल में इस मामले को कोई दफे उठाया गया लेकिन सरकार मामले को उलझाती रही. परिवहन विभाग ने जून 2020 में विधान परिषद में पूछे गए सवाल का जवाब दिया था। तत्कालीन मंत्री संतोष निराला की तरफ से दिए गए जवाब में कहा गया कि बिहार में 9 लाख 57 हजार निबंधित कॉमर्शियल वाहन हैं। 2015 से बिहार में संचालित निजी फिटनेस केंद्र के नवीकरण एवं नये फिटनेस केंद्र के लाइसेंस की स्वीकृति पर रोक है। मोटर यान निरीक्षक की तरफ से व्यवसायिक वाहनों की जांच कर फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है।हालांकि तब मंत्री जी यह नहीं बता पाये थे कि बिहार में ऑनलाइन गाड़ियों की जांच कर फिटनेस देने का काम कब शुरू होगा. जानकार बताते हैं कि परिवहन विभाग में आज भी गाड़ियों के फिटनेस जांच में उच्च तकनीक का इस्तेमाल नहीं होने के पीछे बड़ी वजह है।जिस कारण आज भी एमवीआई के आंखों पर ही विश्वास किया जा रहा है।

सीएम नीतीश ने दिया था आदेश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2021 के पहले दिन परिवहन विभाग की समीक्षा की थी। मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग को निर्देश दिया था कि वाहनों की फिटनेस पर विशेष ध्यान दें ताकि दुर्घटना पर लगाम लग सके और अनफिट गाड़ियां सड़क पर नहीं दौड़े. सीएम ने अफसरों से कहा कि फिटनेस जांच को लेकर सक्रिय हों और विशेष ध्यान दें.


 

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