क्योर क्लबफुट इंडिया के सहयोग से 'क्लबफुट' जागरूकता अभियान, डॉक्टरों ने बताए बीमारी के लक्ष्ण और उपचार

क्योर क्लबफुट इंडिया के सहयोग से 'क्लबफुट' जागरूकता अभियान, डॉक्टरों ने बताए बीमारी के लक्ष्ण और उपचार

पटना. पटना मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग द्वारा क्योर क्लबफुट इंडिया के सहयोग से चलने वाले क्लबफुट क्लीनिक द्वारा 29 एवं 30 नवंबर को क्लबफुट जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया. ऑर्थोपेडिक्स विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कुमार शशिकांत ने बताया कि क्लबफुट एक जन्मजात होने वाली पैरों की विकृति है, जिसमे पैर अंदर की तरफ मुड़ा होता है. क्लबफुट का सय से एवं समुचित इलाज करने पर बिना बड़े ऑपरेशन के पूर्ण इलाज संभव है. हलांकि बड़े बच्चों एवं कुछ मुश्किल परिस्थियों में ऑपरेशन की भी आवश्यकता पड़ती है. उन्होंने बताया कि क्लबफुट का इलाज नहीं होने पर विकलांगता निश्चित है.

डॉ. शिशिकांत ने बताया कि क्लबफुट क्लीनिक द्वारा अब तक बिहार में करीब 3500 बच्चों का पूर्ण इलाज किया जा चुका है, जिसमें अकेले पीएमसीएच में 2011 बच्चों का इलाज किया गया है. विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एके मानव ने बताया कि सन 2014 से पीएमसीएच में अनवरत क्लबफुट क्लीनिक चल रहा है. इल क्लीनिक का आयोजन मंगलवार के दिया किया जाता है. क्लबफुट क्लीनिक में बच्चों का प्लास्टर, एक छोटा ऑपरेशन एवं विशेष प्रकार के जुते क्योर क्लबफुट इंडिया के सहयोग से निशुल्क दिया जात है.

राष्ट्री बाल सुरक्षा कार्यक्रम के कोऑर्डिनेटर रवि प्रकाश ने बताया कि उनकी टीम इस बीमारी के बच्चों की पहचना कर उनको क्लबफुट क्लीनिक में पहुंचने में मदद करते हैं. 29 व 30 नवंबर को आयोजित इस कार्यशाला में क्लबफुट बीमारी से ग्रस्त कुल 186 बच्चे एवं उनके अभिभावक शामिल हुए जो प्रदेश के दूर-दराज के इलाके से आये थे. इस कार्यशाला में बच्चों का इलाज किया गया. वहीं उनके अभिभावकों को बीमारी के बारे में काउंसीलिंग किया गया. उन्हें बच्चों को विशेष प्रकार के जुते पहनाने एवं समय-समय पर अस्पताल में आकर इलाज पूर्ण होने के बाद की जाने वाली जांच के महत्व को बताया गया.


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