मंत्री बनने से पहले कांग्रेस विधायक की बढ़ी मुश्किलें, 13 साल पुराने मामले में कोर्ट से गिरफ्तारी का वारंट जारी

मंत्री बनने से पहले कांग्रेस विधायक की बढ़ी मुश्किलें, 13 साल पुराने मामले में कोर्ट से गिरफ्तारी का वारंट जारी

BHAGALPUR : बिहार में नई बनी महागठबंधन की सरकार बनते ही विधायकों की परेशानी बढ़नी शुरू हो गई है। जिसमें सबसे पहले कांग्रेस की तरफ से मंत्री पद के प्रबल दावेदार भागलपुर विधायक अजीत शर्मा की बारी आई है। उनके खिलाफ  भागलपुर के एमपी-एमएलए काेर्ट के न्यायाधीश प्रबल दत्ता ने शुक्रवार काे गिरफ्तारी वारंट जारी किया।  कोर्ट ने विधायक के वकील की ओर से दाखिल बंधपत्र को रद्द कर उनके विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट जारी किया।

मामला सात मार्च 2009 को पीरपैंती थाने में दर्ज कराया गया था और आरोप पत्र 17 मई 2009 काे दाखिल किया गया था। जिसमें कि 2009 के चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे अजीत शर्मा पर पीरपैंती के टोपरा क्षेत्र में कपड़े का बैनर सरकारी पोल पर बना था जिस पर उम्मीदवार का फोटाे लगा हुआ था। इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना गया।तत्कालीन अंचल निरीक्षक उपेन्द्र रजक ने क्षेत्र भ्रमण में इसे देखा ताे बैनर काे जब्त कर लिया था। इसके बाद पीरपैंती थाने में आदर्श चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का केस दर्ज कराया गया था।

कोर्ट में नहीं हो रहे पेश

भागलपुर में 2009 के एमपी चुनाव में आदर्श अचार संहिता उल्लंघन के चल रहे मामले में काेर्ट में लगातार अनुपस्थित रहने काे लेकर विधायक सह कांग्रेस विधानमंडल के नेता अजीत शर्मा पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया। माना जा रहा है कि अब कभी भी उनकी गिरफ्तारी हो सकती है


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