बिहार में मंडी व्यवस्था की फिर से शुरू करने की मांग को मिला टिकैत का साथ, CM नीतीश को दे दिया अल्टीमेटम

बिहार में मंडी व्यवस्था की फिर से शुरू करने की मांग को मिला टिकैत का साथ, CM नीतीश को दे दिया अल्टीमेटम

PATNA : बिहार में नीतीश कुमार की इच्छा के विरुद्ध मंडी व्यवस्था फिर से शुरू करने की मांग करने वाले सुधाकर सिंह  को भले ही बिहार की कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा हो, लेकिन उनकी इस मांग को अब एक बड़े किसान नेता का साथ मिल गया है। अब चर्चित किसान नेता चौधरी राकेश टिकैच ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर इसके लिए बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है। 

पत्र में टिकैत ने ये बातें लिखी हैं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखे पत्र में टिकैट ने कहा है 'बिहार में पिछले लगभग15 से16 वर्ष से मंडियां बंद हैं जिससे वहां के उन किसानों को ना तो फसल बेचने का कोई प्लेटफार्म मिल पाता है और ना फसल के भाव प्रभावी रूप से मिल पा रहे हैं। बिहार का किसान अपने द्वारा पैदा किए हुए खानदान को दलालों के माध्यम से लागत से भी कम दाम पर बेचने पर मजबूर है।

 किसानों की आर्थिक स्थिति बिहार में बदहाल हो चुकी है। ना तो उनके पास में खेत में फसल बोने के लिए बीज का पैसा है और ना परिवार का पालन पोषण करने के लिए उपयुक्त धनराशि है। मुख्यमंत्री जी मंडियां होने के कारण बिहार का किसान दूसरे प्रदेशों में आकर मजदूरी करने पर विवश हो गया है जो छात्र किसान परिवार से आते हैं परिवार में धन उपलब्ध ना होने के कारण उनकी शिक्षा पर इसका बहुत असर पड़ रहा है। 

हमारे आग्रह पर बिहार में दोबारा से मंडियां शुरू किए जाने का कार्य किया जाए, जिससे किसान को फसल बेचने का प्लेटफार्म और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए। अगर यह कार्य नहीं होता है तो बिहार में एक बड़ा आंदोलन करने पर हम मजबूर होंगे

सुधाकर सिंह भी यही करते थे मांग

बिहार के पूर्व कृषि मंत्री सुधाकर सिंह भी मंत्री पद पर रहने के दौरान लगातार किसानों के लिए मंडी व्यवस्था को फिर से शुरू करने की मांग करते रहे हैं। जबकि नीतीश कुमार को उनका यह फैसला मंजूर नहीं था। माना जाता है कि इसी मांग के कारण सुधाकर सिंह को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। लेकिन सुधाकर सिंह जिस काम को पूरा कर पाने में कामयाब नहीं हो पाए, अब उसे राकेश टिकैत पूरा करेंगे। अब टिकैत अपनी मांग को पूरा करवा पाते हैं नहीं यह आनेवाले कुछ दिनों में पता चल जाएगा। हालांकि सुधाकर सिंह और राकेश टिकैत का इन मांगों को लेकर कोई सीधा कनेक्शन नहीं है।


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