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बिहार में 'शिक्षा' से ज्यादा जरूरी है 'जाति' जानना ! सरकारी स्कूल के शिक्षकों की ट्रेनिंग स्थगित..सभी को विद्यालय में योगदान करने का आदेश

बिहार में 'शिक्षा' से ज्यादा जरूरी है 'जाति' जानना ! सरकारी स्कूल के शिक्षकों की ट्रेनिंग स्थगित..सभी को विद्यालय में योगदान करने का आदेश

PATNA: जातीय गणना को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद शिक्षा विभाग के सुधार अभियान पर ग्रहण लग गया है. विभाग के अपर मुख्य सचिव जहां सरकारी स्कूलों में शिक्षकों-बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने को लेकर काम कर रहे थे. वहीं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने को लेकर शिक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहे थे. फिर से जातीय गणना शुरू कराने के निर्णय के बाद केके पाठक के अभियान की हवा निकल गई. सरकारी स्कूल के शिक्षक अब न तो बच्चों को पढ़ायेंगे और न हीं उन्हें ट्रेनिंग दी जायेगी. शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है.



 विद्यालय में योगदान करने के आदेश 

बिहार के सरकारी शिक्षकों का प्रशिक्षण तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है. जातिगत गणना को लेकर सरकार के आदेश पर शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है. राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद के निदेशक सज्जन आर. ने बिपार्ड के एडीजी से लेकर अध्यापक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय के प्राचार्य को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है. निदेशक ने कहा है कि राज्य सरकार के आदेश के आलोक में एससीईआरटी समेत राज्य के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थान द्वारा संचालित सभी प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है. सभी प्रशिक्षुओं को अपने विद्यालय में योगदान करना है, और जातिगत आधारित आधारित गणना 2022 के द्वितीय चरण के शेष कार्यों को कम समय में पूर्ण करना है.



बिहार में शैक्षणिक व्यवस्था को सुधारने की दिशा में कई सख्त फरमान जारी करने वाले शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने अब शिक्षकों को जातीय गणना के लिए प्रतिनियुक्त करने की अनुमति दे दी है. दरअसल, पटना हाई कोर्ट ने मंगलवार को ही अपने आदेश में बिहार में सरकार को जातीय गणना कराने की अनुमति दी थी. उसके बाद से बड़ा सवाल उठ गया था कि क्या केके पाठक इस बार शिक्षकों को प्रतिनियुक्त करेंगे. शिक्षा विभाग सँभालने के बाद से पाठक ने कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिससे शिक्षा विभाग में चली आ रही वर्षों पुरानी परम्परा पर ब्रेक लग गया. 



ऐसे में तमाम अटकलों को विराम देते हुए बुधवार को केके पाठक ने इस सम्बंध में राज्य के सभी जिलाधिकारियों को एक चिट्ठी जारी की है. इसमें उन्होंने शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति को मंजूरी दी है लेकिन उसके साथ कुछ शर्तों का भी उल्लेख किया है. केके पाठक की ओर से सभी जिलाधिकारी को जारी चिट्टी में कहा गया है कि कल दिनांक 02.08.2023 से जातीय जनगणना फिर से प्रारम्भ हो रही है। आपसे अनुरोध है कि शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति करते समय इस बात का ध्यान रखें कि कोई भी विद्यालय पूरी तरह शिक्षक विहीन न हो जाए शिक्षकों को केवल जातीय जनगणना के कार्य में लगाया जाए। अन्य कोई प्रशासनिक कार्य न लिया जाए।



यानी इस बार जातीय गणना के लिए प्रतिनियुक्त करने के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी विद्यालय में पठन पाठन कार्य प्रभावित न हो. साथ ही जिन शिक्षकों को जनगणना काम में लगाया जा रहा है उनसे किसी अन्य प्रकार का प्रशासनिक कार्य न लिया जाए। शिक्षा विभाग की ओर से संभवतः पहली बार इस तरह की चिट्टी जारी की गई है जिसमें इन निर्देशों का पालन करने कहा गया है. 


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