आईबी के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा के निधन पर पूर्व डीजीपी अभयानंद ने लिखा एक मार्मिक पोस्ट, रिश्ते में थे उनके समधी

आईबी के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा के निधन पर पूर्व डीजीपी अभयानंद ने लिखा एक मार्मिक पोस्ट, रिश्ते में थे उनके समधी

PATNA:  बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद इन दिनों अपने फेसबुक पोस्ट पर कहां गए वो दिन के नाम से एक सीरीज लिख रहे हैं। इस पोस्ट के जरिए अभयानंद लगातार पुलिस विभाग से जुड़े संवेदनशील पहलू भी उजागर कर रहे हैं। अभयानंद हमेशा प्रशासनिक सुचिता पर जोर देते रहे हैं। अभयानंद उन अफसरों में से हैं जो अपनी बेबाकी और अपने कुशल प्रशासनिक प्रबंधन के लिए भी जाने जाते हैं। सेवानृविति के बाद से सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं।

शिक्षा समेत कई सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते रहे हैं। उनके इस पोस्ट से एक बात साफ झलकती है कि एक आईपीएस को कैसा होना चाहिए। आईपीएस ऐसा हो जो भ्रष्टाचार और आडंबर से दूर रहे, लोगों के कानून पर से विश्वास को टूटने न दे और अपने साथी और जूनियर अफसरों का सम्मान करे। अभयानंद का ये पोस्ट आज के अफसरों के लिए एक नसीहत भी है।

बिहार के गया जिले के निवासी और लक्षद्वीप के प्रशासक, साथ ही इंटेलीजेंस ब्यूरो के पूर्व निदेशक दिनेश्वर शर्मा का फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी के चलते शुक्रवार को चेन्नई के एक अस्पताल में निधन हो गया, वो 66 वर्ष के थे। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि दिनेश्वर शर्मा बिहार के पूर्व डीजीपी अभयानंद के समधी भी थे। अभयानंद की पुत्री की शादी दिनेश्वर शर्मा के बेटे से हुई है। अब अभयानंद ने दिनेश्वर शर्मा को याद करते हुए एक मार्मिक पोस्ट लिखी है।

अभयानंद ने अपने फेसबुक पेज पर दिनेश्वर शर्मा को श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने पोस्ट किया है कि 'मेरी बेटी की शादी की बात चल रही थी। लड़का आईआईटी दिल्ली तथा आईआईएम अहमदाबाद का ग्रेजुएट और बड़ी अंतर्रराष्ट्रीय कम्पनी में काम कर रहा था। पिताजी भी आईपीएस पदाधिकारी थे। इत्तिफाक से बिहार के गया जिले के ही रहने वाले थे। मुझे यह रिश्ता अच्छा लगा। मैंने बात करनी शुरू की। पिताजी से मुलाकात नहीं हुई थी। जानकारी प्राप्त हुई कि वह सरकारी काम से बिहार की राजधानी पटना आ रहे हैं। मौका देख, उनसे संपर्क साधा और जानकारी मिली कि वह ट्रेन से आ रहे हैं।'

इसके बाद अभयानंद लिखते हैं कि ' मैंने उन्हें बताया कि मैं उन्हें लेने पटना रेलवे स्टेशन पर आ जाऊँगा। उन्होंने मना किया यह कह कर कि उनकी सरकारी गाड़ी उन्हें लेने आएगी। फिर भी मैं बिना बताये ही उन्हें लेने चला गया। गाड़ी लगी प्लेटफार्म पर। मैं उन्हें ढूंढने लगा क्योंकि डिटेल्स पता नहीं था। वे दिखे, अपना बैग हाथ में लिए, 3 टियर स्लीपर के साधारण डब्बे से निकलते हुए। यह मेरी मुलाकात थी संयुक्त निदेशक IB श्री दिनेश्वर शर्मा IPS से। यही वह व्यक्ति हैं जिन्होंने 2017 में PM से डायरेक्टर IB के पद पर एक्सटेंशन को यह कहकर ठुकरा दिया कि यह उनसे कनीय पदाधिकारियों का मनोबल छोटा कर देगा जो उस पद के योग्य हैं। 

श्रद्धांजलि पुण्यात्मा मेरे समधी दिनेश्वर जी को- अभयानंद'

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