हार के बाद सोशल मीडिया पर छलका पूर्व विधायक का दर्द, कहा अब असहायों का दर्द कौन सुनेगा

हार के बाद सोशल मीडिया पर छलका पूर्व विधायक का दर्द, कहा अब असहायों का दर्द कौन सुनेगा

KHAGARIA : बिहार विधानसभा चुनाव के बाद मतगणना का काम पूरा हो गया है. राज्य की जनता ने एनडीए को स्पष्ट बहुमत दिया है. वहीँ महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा है. इसके मद्देनजर कई हारे हुए प्रत्याशियों की कसक कम नहीं हो रही है. खगड़िया के जाने-माने चर्चित हस्ती और पूर्व विधायक रणवीर यादव का छलकता दर्द व पीड़ा एक संदेश के रूप में सोशल मीडिया पर सामने आया है. इस पर उन्होंने लिखा है की सुबह होते ही सब कुछ खगड़िया का बदल गया, पूनम देवी यादव आप सबके विधायक नहीं रही और मेरा परिवार आपका सेवक नहीं रहा. चुकी बिहार विधानसभा चुनाव 2020 का चुनाव प्रक्रिया संपन्न हो गया,  जिसमें आप लोगों ने पूनम देवी यादव एनडीए समर्थित (जदयू) प्रत्याशी को 43,369 मत दिए. जिसके कारण लगभग 2,998 मतों से पिछड़ गई. 

इससे पूर्व पूनम जी को चार बार और मुझे एक बार विधायक बना कर सेवा करने का आप सबों ने सुअवसर दिया. हम लोग दलीय राजनीतिक से ऊपर उठकर सेवा किये. साथ ही सामाजिक जीवन में हर समय आमजनों को ईश्वर के प्रतीक मानकर सबों का सम्मान सहित  सेवा किया. आगे उन्होंने कहा है कि मेरा परिवार दो प्रकार से सेवा किया. एक सरकारी स्तर पर और दूसरा नीजि स्तर पर. आमजनों के बीच सुविधा का लाभ आज तक ईमानदारी पूर्वक पहुंचाया. इसके लिए सड़क से विधानसभा के सदन तक आवाज उठाया. यह कभी नहीं समझा कि सत्ताधारी दल के विधायक हैं, प्रशासनिक कमियों को उजागर ना करूं. साथ ही सामाजिक सरोकार की समस्या जैसे कभी भी कोई पीड़ित, दुखिया समस्या से ग्रसित लोगों के आने पर स्वयं से भरसक सहयोग करने का काम किया है. चाहे आर्थिक क्यों ना हो. जिसके कारण कुछ अवांछित लोग ईर्ष्या, द्वेष के कारण भितरघात किये. 

परिणामस्वरूप कुछ सौ मतों से पराजित हुए. अगर पूनम और सरकार की विफलता के कारण पराजित होती तो मतों का अंतर भी बड़ा होता. इस बार के चुनाव में बहुत का चरित्र गिरते देखा गया. कोई शराब, कोई मांस और कोई रुपए के लोभ में चरित्र गिराया है. वोट को सौदागर के हाथों बिकते देखा गया. जिसे इतिहास कभी माफ नहीं करेगा. अब परिणाम के बाद कोई शराब नहीं देगा ना मांस देगा. यहां तक कि पहचानने से भी इनकार करेंगे. कोई सड़क की मरम्मति के लिए सीमेंट, बालू और हर एक परिवार को नौकरी देने  की बात नहीं कहेंगे. यह सब कुछ वोट के सौदागर का चुनावी जुमला था. सिर्फ आपलोगों को झांसा देने के लिए. यादव ने आगे लिखा है कि पूनम जी विधायक नहीं रही, इसका मलाल नहीं है. मलाल तो सिर्फ इस बात की है कि अब गरीब कमजोर और असहाय की बात कौन सुनेगा? अब बीमार, लाचार, ठंड से कांपते बूढ़े- बच्चे, महिलाएं को वस्त्र कौन देगा. अब कौन करेगा गरीब के इलाज का अनुशंसा. ऊपर से आने-जाने का खर्च दवाई का पैसा. ऐसे लोगों को अब ईश्वर ही देखेंगे. अब ना ही अधिकारी सुनेगा ना ही जनप्रतिनिधि मिलेगा. एक बार फिर से खगड़िया जाती- पार्टी के पेंच में फंस गया. अंत में उन सभी साथी, राजनीतिक सहयोगी खासकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के घटक दल के स्थानीय नेताओं का हृदय से आभारी हूँ, जिन्होंने ईमानदारी से सहयोग और साथ दिया. साथ ही रणवीर फैंस एसोसिएशन, राष्ट्रीय युवा संग्राम मोर्चा एंव वीर बंधु के समर्पित सभी साथीगण बधाई के पात्र हैं; जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस और धैर्य से चुनाव लड़ा. 

खगड़िया से अनिश कुमार की रिपोर्ट 

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