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'पहला सनातन हिंदू'? रत्नेश्वर की नई किताब देगी जवाब कई सवालों का, गणेश चतुर्थी 19 सितम्बर से प्रीबुकिंग शुरू

'पहला सनातन हिंदू'? रत्नेश्वर की नई किताब देगी जवाब कई सवालों का, गणेश चतुर्थी 19 सितम्बर से प्रीबुकिंग शुरू

पटना. भारत में इन दिनों एक नया राजनीतिक विमर्श ‘सनातन’ को लेकर चल रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल है कि पहला सनातन हिंदू कौन था? इस अबूझ पहेली को सुलझाने के लिए वरिष्ठ लेखक रत्नेश्वर ने एक बड़ी पहल की है. उनकी नई किताब 'पहला सनातन हिंदू' की प्रीबुकिंग गणेश चतुर्थी से शुरू होगी. 19 सितम्बर से इस किताब की प्रीबुकिंग की जा सकती है. 

लेखक रत्नेश्वर के 'महायुग' उपन्यास त्रयी की कड़ी में यह तीसरी किताब है. इस त्रयी की दो किताबें पहले ही आ चुकी हैं. अब 'पहला सनातन हिंदू' के माध्यम से कई रहस्यों को सुलझाने की कोशिश की गई है. व्यापक शोध पर आधारित 'पहला सनातन हिंदू' में विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है जो मौजूदा दौर पर अक्सर सनातन को लेकर विमर्श के केंद्र में आता है. 

'पहला सनातन हिंदू' क्यों पढ़ा जाए. इसे लेकर रत्नेश्वर ने कि संसार की 35 से 32 हजार साल पुराने समय पर पहली उपन्यास त्रयी में वैज्ञानिक शोध पर आधारित  किताब 'पहला सनातन हिंदू' है.हिमयुग के समय पर जम्बूद्वीप संस्कृति और सभ्यता का पहला उपन्यास है. इक्कीसवीं सदी का हिन्दी में घोषित और एक ही साल में आनेवाला पहली उपन्यास त्रयी -'महायुग'. उपन्यास त्रयी के दो खंड '32000 साल पहले' और हिमयुग में प्रेम पहले ही प्रकाशित हो चुके हैं. अब 'पहला सनातन हिंदू' उसी श्रृंखला की किताब है. 

इसमें 44 हजार साल पुरानी चिड़ियों की हड्डी से बनी बांसुरी और तेल के दीपक के शोध सहित संसार में पहली बार किया गया प्रेम और पहली प्रार्थना की कथा है. भारतीय संस्कृति के चार युगों से अलग हिमयुग के समय का महायुग के रूप में स्थापना है. सूर्य और अग्नि की संसार की पहली प्रार्थना कथा है. साथ ही मनुष्य की दो प्रजाति होमो सेपियन्स और होमो इरेक्टस के अंतिम युद्ध की कथा भी है. स्वर्ग और देवताओं की खोज के साथ अन्य ग्रहों से पृथ्वी पर परग्रहियों की आवाजाही को भी विस्तार पूर्वक बताया गया है. किताब की प्रीबुकिंग की शुरुआत 19 सितम्बर से होगी.  


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