बिहार के गया से है श्री राम प्रभु का गहरा सम्बन्ध, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

बिहार के गया से है श्री राम प्रभु का गहरा सम्बन्ध, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

GAYA : बिहार के गया का रिश्ता श्री राम के जन्म भूमि अयोध्या से गहरा है. मान्यता है की श्री राम अपने पिता राजा दशरथ के मृत्यु उपरांत उनकी आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने के लिए गया जी आए थे. श्रीराम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ गया के अंतः सलीला फल्गु तट पर पिंडदान करने आये थे. विद्वान और पंडितों की माने तो श्री राम ने गया के रामशिला स्थित पर्वत पर पिंड दान करने से पूर्व विश्राम किया था. 

रामशिला पर्वत पर श्री राम के चरण चिन्ह आज भी मौजूद है. यहां से श्रीराम अंत सलिला फल्गु तट पर अपने पिता राजा दशरथ का पिंडदान करने गए. वे अपने भाई लक्ष्मण के साथ पिंड सामग्री लाने के लिए निकले थे. उसी वक्त राजा दशरथ की आकाशवाणी हुई. जिसमें उन्होंने श्री राम की पत्नी सीता से कहा कि पिंड की बेला समाप्त हो रही है. उन्होंने सीता से ही पिंड देने को कहा. जिस स्थान पर सीता ने राजा दशरथ को पिंड दिया. वह स्थल सीता कुंड के नाम से इतिहास में वर्णित है. इस तरह अयोध्या में बन रहे ऐतिहासिक श्री राम के भव्य मंदिर में गया से मिट्टी रेत और चांदी के ईट भी गया वासियों ने भेजे हैं. 

वहीँ श्री राम द्वारा अपने पिता के पिंड दान की एक कथा है, जिसमें गाय, तुलसी, ब्राह्मण, अक्षय वट और फल्गु का वर्णन है. ऐसी मान्यता है कि जब भगवान श्री राम पिंडदान के लिए सामग्री लाने गए थे. उस वक्त अचानक आकाश से भगवान राजा दशरथ की आकाशवाणी हुई. जिसमें उन्होंने कहा कि  राम को आने में देर होगा पिंड तुम हमें दे दो. सीता ने कहा कि सामग्री तो है नहीं पिंडदान कैसे करेंगे ? तब राजा दशरथ की आकाशवाणी हुई कि फल्गु नदी की रेत का ही पिंड बनाकर पिंड दान कर दो. इस घटना के उपरांत जैसे ही श्री राम पिंड सामग्री लेकर वापस आए. तब माता ने यह पूरी कहानी सुना दी. 

भगवान श्रीराम को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ. तब सीता ने गाय, ब्राह्मण, तुलसी, अक्षय वट फल्गु इन सभी को साक्षी मानकर सीता ने पिंड दान दिया था. इन सभी के पास सीता जब साक्षी के लिए गयी. तब इन सभी ने इंकार कर दिया. उसी वक्त सीता ने क्रुद्ध होकर ब्राह्मण को दरिद्रता की,  तुलसी को गंदे जगह पर पनपने की, फल्गु नदी को सदैव अंतर सलिला और गाय को विष्ठा खाने श्राप दे दिया. इस कथा को ब्राह्मण आज भी गया जी पिंड करने आने वाले लोगों को बताते हैं. इस तरह गया का संबंध भगवान श्री राम के जन्म भूमि अयोध्या से गहरा है. यही वजह है कि अयोध्या में भूमि पूजन के अवसर पर गया वासियों के द्वारा चांदी के ईट , अंतः सलिला फल्गु नदी के रेत मिट्टी और पानी भेजा गया है. 

गया से मनोज कुमार की रिपोर्ट 


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