हाईकोर्ट ने कहा – शराबबंदी कानून लागू करने में अधिकारी नहीं करते दिमाग का इस्तेमाल, लगातार बढ़ रहे केसों पर सुनवाई पर भड़के जज

हाईकोर्ट ने कहा – शराबबंदी कानून लागू करने में अधिकारी नहीं करते दिमाग का इस्तेमाल, लगातार बढ़ रहे केसों पर सुनवाई पर भड़के जज

PATNA : बिहार सरकार शराबबंदी कानून को लेकर भले ही अपनी प्रशंसा करने से परहेज नहीं करती है। लेकिन कोर्ट की तरफ से लगातार इस कानून की कमियों को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। सोमवार को भी शराबबंदी के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। 

कोर्ट ने अधिकारियों के रवैए पर हैरानी जताते हुए कहा कि शराबबंदी कानून को लागू करने में वे अपने दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते हैं। इसके कारण इससे जुड़े मुकदमों की बाढ़ आ गई है। कोर्ट ने कहा कि जब्त गाड़ियों को छुड़ाने के लिए हर रोज दायर मामलों की संख्या में वृद्धि हो रही है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों पर सुनवाई के दौरान इस आशय की टिप्पणी की। 

वरीय अधिवक्ता पीके शाही ने बियर बनाने वाली एक कंपनी की ओर से अपनी दलील में कहा कि कानूनी प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। लेकिन किसी भी अधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है। इसीलिए बाध्य होकर लोगों को कोर्ट की शरण में आना पड़ता है। 

अजीब-अजीब केस

कोर्ट ने कहा कि अनेक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें अधिकारी मनमाने तरीके से एक ही तरह की कार्रवाई करते हैं, जो नियमानुकूल नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि कोई व्यक्ति राज्य से बाहर रहता है और उसके किराएदार के यहां शराब मिलती है, तब भी अधिकारी मकान मालिक को ही आरोपी बना देते हैं। इसी प्रकार ट्रक या अन्य वाहन के ड्राइवर के पास से शराब बरामद होने पर गाड़ी को तो जब्त किया ही जाता है, उसके मालिक को भी आरोपी बना दिया जाता है।

गाड़ी को छुड़ाने के लिए कलक्टर के यहां आवेदन देने पर उसे रुटीन तरीके से खारिज कर दिया जाता है। अपील और रिविजन में भी बगैर दिमाग का इस्तेमाल किए कलक्टर के आदेश को संपुष्ट कर दिया जाता है। अधिकारियों की गलती का खामियाजा लोगों को अकारण भुगतान पड़ता है।

128636 केस का ट्रायल शुरू हुआ
 सरकार के आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 128636 मामलों का ट्रायल शुरू हो चुका है, जिसमें 4873 ट्रायल पूरा हो चुका है। अभी तक 950 लोगों को दोषमुक्त और 3923 लोगों को सजा दी गई है। 1 मई 2022 से लेकर 17 सितंबर 2022 तक कुल 2398 ट्रायल पूरा हो चुका है। पिछले चार महीनों का कन्विक्शन रेट 93% है।

उत्पाद आयुक्त से पूछा- तीन महीने में कितने गिरफ्तार

कोर्ट ने राज्य के उत्पाद आयुक्त को दो हफ्ते में रिपोर्ट पेश कर बताने को कहा है कि पिछले तीन महीने में कितने लोगों को शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार किया गया है? प्रत्येक जिले में जब्त हुई गाड़ियों के राज्यसात के कितने मामले लंबित हैं? कोर्ट ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि केवल डेढ़ लीटर शराब पाए जाने पर भी गाड़ी को न केवल जब्त किया जाता है, बल्कि वर्षों उसे यूं ही थाने में खड़ा कर दिया जाता है, जिससे उसकी स्थिति जर्जर हो जाती है।


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