केरल में मजदूरों की सबसे अधिक दिहाड़ी तो मध्य प्रदेश में सबसे कम, जानिए बिहार का हाल

केरल में मजदूरों की सबसे अधिक दिहाड़ी तो मध्य प्रदेश में सबसे कम, जानिए बिहार का हाल

Desk. दिहाड़ी मजदूरों को लेकर आरबीआई ने एक रिपोर्ट जारी की है। इसमें सबसे अधिक दिहाड़ी केरल में मिलती है, जबकि सबसे कम मध्य प्रदेश में मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार देश में खेतिहर मजदूरों की दिहाड़ी 323 रुपये है। मध्य प्रदेश और गुजरात में राष्ट्रीय औसत से भी कम है। वहीं बिहार में न्यूनतम मजदूरी 373 रुपये हैं, जो औसत से अधिक है।

बिहार में 373 रुपये मजदूरी

बिहार में न्यूनतम मजदूरी 373 रुपये है। बिहार में हाल ही में न्यूनतम मजदूरी में संशोधित किया गया था। इसके तहत अकुशल कोटि के मजदूरों को कम से कम 373 रुपये रोजाना, जबकि अर्ध कुशल कामगारों को 388 रुपये रोजाना और कुशल श्रमिकों को 463 रुपये रोजाना में मिलने का प्रावधान है।

सबसे ज्यादा मजदूरी केरल में

आरबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 2021-22 में दिहाड़ी मजदूरों को सबसे अधिक मजदूरी केरल में मिलती है, जबकि सबसे कम गुजरात और मध्य प्रदेश में मिलती है। रिपोर्ट के अनुसार देश में खेतीहर मजदूरों की दिहाड़ी का राष्ट्रीय औसत 323.2 रुपये था। मध्य प्रदेश में खेतीहर मजदूरों की दिहाड़ी 217.8 रुपये, जबकि गुजरात में 220.3 रुपये रही। वहीं केरल में ग्रामीण खेतीहर मजदूरों को 726.8 रुपये दिहाड़ी मिली, जो सबसे अधिक है।

मनरेगा में दिहाड़ी

महारात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी के तहत साल में 120 दिन मजदूरों को काम दिया जाता है। इन मजदूरों की दिहाड़ी हर साल बढ़ती है और हर राज्य में अलग-अलग है। मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों को सबसे ज्यादा दिहाड़ी हरियाणा में मिलती है। हरियाणा में मजदूरों को हर दिन 331 रुपये दिहाड़ी दी जाती है। उसके बाद गोवा है, जहां 315 रुपये दिहाड़ी मिलती है। केरल तीसरे नंबर पर है और यहां के मजदूरों की दिहाड़ी 311 रुपये है।

हर दिन 115 दिहाड़ी मजदूरों ने की खुदकुशी

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2021 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में आत्महत्या करने वालों में 42,004 दिहाड़ी मजदूर थे। इनमें 4,246 महिलाएं भी थीं। ऐसे में पिछले साल हर दिन औसतन 115 दिहाड़ी मजदूरों ने आत्महत्या की। आकड़े के अनुसार भारत में हर 12 मिनट में एक दिहाड़ी मजदूर आत्महत्या कर लेता है। हर साल आत्महत्या करने वालों में हर चौथा इंसान दिहाड़ी मजदूर ही होता है। 2021 में 1.64 लाख लोगों ने आत्महत्या की और इनमें से 25 प्रतिशत से ज्यादा दिहाड़ी मजदूर थे।


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