देश के प्रथम राष्ट्रपति के स्मारक की अनदेखी : हाईकोर्ट में हलफनामा नहीं दायर की बिहार सरकार व ASI, कोर्ट ने लगायी फटकार

देश के प्रथम राष्ट्रपति के स्मारक की अनदेखी : हाईकोर्ट में हलफनामा नहीं दायर की बिहार सरकार व ASI, कोर्ट ने लगायी फटकार

पटना. पटना हाईकोर्ट में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की जन्मस्थली जीरादेई और वहां उनके स्मारक की दुर्दशा के मामले पर सुनवाई करते हुए केंद्र (आर्केलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) और बिहार सरकार द्वारा हलफनामा नहीं दायर नहीं किये जाने पर मामले की सुनवाई 13 जनवरी 2022 तक टली। चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने विकास कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को इस सम्बन्ध में निश्चित रूप से हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था, लेकिन दोनों सरकारों ने आज हलफनामा दायर नहीं किया, जिस कारण इस जनहित याचिका पर सुनवाई टाल दी गई। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने अधिवक्ता निर्विकार की अध्यक्षता में वकीलों की तीन सदस्यीय कमिटी गठित की थी। कोर्ट ने इस समिति को इन स्मारकों के हालात का जायजा ले कर कोर्ट को रिपोर्ट करने का आदेश दिया था।

तीन सदस्यीय वकीलों की कमिटी ने जीरादेई के डॉ. राजेंद्र प्रसाद की पुश्तैनी घर का जर्जर हालत, वहां बुनियादी सुविधाओं की कमी और विकास में पीछे रह जाने की बात कहीं। साथ ही पटना के बांसघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर गन्दगी और रखरखाव की स्थिति भी असंतोषजनक पाया। वहां काफी गन्दगी पायी गई और सफाई व्यवस्था की खासी कमी थी। साथ ही पटना के सदाकत आश्रम की दुर्दशा को भी वकीलों की कमिटी ने गम्भीरता से लिया था।

जनहित याचिका में कोर्ट को बताया गया कि जीरादेई गांव व वहां डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद के पुश्तैनी घर और स्मारकों की हालत काफी खराब हो चुकी है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विकास कुमार ने बताया कि जीरादेई में बुनियादी सुविधाएं नहीं के बराबर है। न तो वहां पहुंचने के सड़क की हालत सही है। साथ ही गांव में स्थित उनके घर और स्मारकों स्थिति और भी खराब हैं, जिसकी लगातार उपेक्षा की जा रही है।

उन्होंने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार के इसी उपेक्षापूर्ण रवैये के कारण लगातार हालत खराब होती जा रही है। कोर्ट को बताया गया कि पटना के सदाकत आश्रम और बांसघाट स्थित उनसे सम्बंधित स्मारकों की दुर्दशा भी साफ दिखती हैं। वहां सफाई, रोशनी और लगातार देख रेख नहीं होने के कारण ये स्मारक और ऐतिहासिक धरोहर अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे है।

ऐसे महान नेता स्मृतियों व स्मारकों की केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाना उचित नहीं हैं। इनके स्मृतियों और स्मारकों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। इस जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 13 जनवरी, 2022 को होगी।

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