पटना नगर निगम में कागज पर 2200 पर ठेका कर्मी, हकीकत में आधे से भी कम से लिया जाता था काम, लेकिन भुगतान हर माह सभी का

पटना नगर निगम में कागज पर 2200 पर ठेका कर्मी, हकीकत में आधे से भी कम से लिया जाता था काम, लेकिन भुगतान हर माह सभी का

PATNA : पटना की साफ-सफाई का बुरा हाल क्यों है, अब इसकी असलियत सामने आ गई है। पटना में बेहतर सफाई के नाम पर कागज में 1151 कर्मियों की गिनती कई महीने से कराई जा रही थी, हर माह उनके नाम पर सैलरी भी दिया जाता रहा, लेकिन जमीन पर इन कर्मियों का कहीं कोई अता पता नहीं था। पटना नगर निगम में तीन एजेंसिंयों ने फर्जी कर्मियो के नाम पर पांच करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया है। नगर निगम में सफाई कर्मियों के नाम पर चल रहे इस घोटाले का राज खुलने के बाद हड़कंप मच गया है।

इससे पहले करीब 900 कर्मियों का पता चला था, जो कागजों में ही थे। जांच आगे बढ़ी तो 900 से बढ़कर अब फर्जी कर्मियों की संख्या 1151 हो गई है। निगम प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से एक्शन लेते हुए इन सभी फर्जी कर्मियों के रजिस्ट्रेशन को पूर्ण तौर से रद्द कर दिया है। तीनों एजेंसियों को पहले ही शोकॉज किया गया था। इस नोटिस के जवाब में कंपनियों ने गोलमोल जवाब दिया है, जिससे निगम प्रशासन पूरी तरह से असहमत हैं।

मैनपावर आपूर्ति करने वाली तीन एजेंसियां गुड ईयर, इंप्रेशन और एवरेस्ट पिछले पांच साल से नगर निगम से जुड़ी थीं। निगम प्रशासन इन एजेंसियों को प्रति व्यक्ति के हिसाब से कम से कम 10 हजार रुपए महीने का भुगतान करता था। ऐसे में पांच साल के दौरान 1151 फर्जी कर्मियों के बदले 5 करोड़ से अधिक का भुगतान हो चुका है। बिल भुगतान से जुड़े अफसरों और निगम कर्मियों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। उनपर भी कार्रवाई होगी।

2200 की जगह आधे कर्मियों से लिया काम

 रिकॉर्डों में तीनों एजेंसियों को मिलाकर नगर निगम में करीब 2200 कर्मियों से काम लेने का लेखा-जोखा है। लेकिन इसमें आधे से भी कम लोगों को एजेंसियों ने फिल्ड में उतारा। कागजों पर फर्जी नाम लिखकर उनसे काम कराने के बारे में नगर निगम को बता दिया गया। वार्डों में सफाई कर्मियों से लेकर सुपरवाइजर तक की कमी लगातार महसूस की जाती रही। इन तीन कंपनियों के कारण पटना पांच साल से गंदगी से परेशान रही, क्योंकि जमीन पर उतने कर्मी ही नहीं थे।

बैठकों में अनेक बार पार्षदों ने पर्याप्त कर्मियों के फिल्ड में नहीं दिखने और साफ-सफाई प्रभावित होने की शिकायत की। पहले तो इसपर किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में नए नगर आयुक्त के आने पर मामला उजागर हुआ। इसके बाद जांच शुरू हुई। जांच के दौरान तीनों एजेंसियों को दोषी पाया गया। 

इसके बाद तत्कालीन स्थायी समिति और बोर्ड ने नए सिरे से मानव बल आपूर्ति के लिए टेंडर जारी किया। लेकिन इस टेंडर के खिलाफ तीनों एजेंसियां कोर्ट चली गईं और इस प्रक्रिया पर रोक लग गई। अब जबतक हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, नगर निगम इन एजेंसियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर सकता।

वसूली जाएगी तीन साल की राशि

जो कर्मी गायब पाए गए हैं, उनके स्थान पर पुरानी एजेंसियां ही मानव बल मुहैया करा रही हैं। ऐसा इसलिए किया गया है, ताकि सफाई व्यवस्था प्रभावित ना हो। दोषी पाए जाने पर तीनों ही एजेंसियों को ब्लैक लिस्टेड किया जाएगा और इनसे तीन साल में किए गए राशि भुगतान की वसूली भी संभव है।

सबकी मिलीभगत की हो जांच

नगर निगम में हुए घोटाले के बाद अब इसकी जांच की मांग भी उठने लगी है। ताकि इन तीनों कंपनियों को किन लोगों का समर्थन हासिल था, इसका सच सामने आ सके। पूर्व उपमहापौर विनय कुमार पप्पू ने बताया कि पांच साल तक पूरा निगम का अमला और प्रशासन सोते रहा। इसका मतलब है कि भ्रष्टाचार में सब कोई लिप्त रहे और जानबूझकर तीनों की एजेंसियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसकी बड़े स्तर पर जांच करने की बात विनय पप्पू ने कही है, ताकि इस घपले की मिलीभगत में लिप्त लोगों की पहचान की जा सके।


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