पासपोर्ट रैंकिंग में फिर फिसला भारत, मोदी सरकार के 10 साल में 10 पायदान की गिरावट, वर्ष 2024 भी निराशाजनक

DESK. पिछले 10 वर्ष के दौरान देश के कई मोर्चों पर मजबूत होने का दावा केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है. लेकिन दूसरी ओर भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में हर साल गिरावट दर्ज की जा रही है. यहां तक कि पिछले 10 वर्ष में यानी वर्ष 2014 से 2024 के बीच दुनिया के शक्तिशाली पासपोर्ट की रैंकिंग में भारतीय पासपोर्ट करीब 10 पायदान नीचे खिसक गया. दुनिया की सबसे शक्तिशाली पासपोर्ट की सूची जारी करने वाले "हेनले पासपोर्ट इंडेक्स" ने 2024 की लिस्ट जारी की है, जिसमें फ्रांस को पहला स्थान मिला है. वहीं, भारतीय पासपोर्ट को 85 वां स्थान मिला है जो पिछले साल के 84वें पायदान से एक रैंक नीचे है.
पिछले साल हेनले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत 84वें स्थान पर था, लेकिन इस साल यह गिरकर 85वें स्थान पर आ गया है. भारत की रैंकिंग में गिरावट थोड़ी चौंकाने वाली है, क्योंकि पिछले साल जहां भारतीय पासपोर्ट धारक 60 देशों में वीजा मुक्त यात्रा कर सकते थे, वहीं इस साल वीजा मुक्त देशों की संख्या बढ़कर 62 हो गई है. इसके बावजूद रैंकिंग में पीछे हो गया है. हेनले पासपोर्ट इंडेक्स की रैंकिंग बताती है कि वर्ष 2014 में भारतीय पासपोर्ट दुनिया में 76 वें पायदान पर था. लेकिन 10 साल के दौरान इसमें लगातार गिरावट दर्ज की गई है.
हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2024 की रैंकिंग लिस्ट में फ्रांस समेत जर्मनी, इटली, जापान, सिंगापुर और स्पेन टॉप पर हैं. इन देशों के पासपोर्ट से 194 देशों में बिना वीज़ा यात्रा किया जा सकता है. शक्तिशाली पासपोर्ट की यह वैश्विक रैंकिंग लंदन की कंपनी हेनले एंड पार्टनर्स जारी करती है. किसी भी देश के पासपोर्ट की ताकत से पता चलता है कि वह सॉफ्ट पावर के तौर पर दुनिया में कितना प्रभावशाली है.
पाकिस्तान की रैंकिंग की बात करें तो पिछले साल की तरह इस बार भी वह 106वें स्थान पर है. भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश भी पिछले साल से एक पायदान गिरकर 101वें से 102वें स्थान पर आ गया है.