बिहार में बहार है, पटना में अपराधियों की भरमार है, कहीं हुई हत्या तो कहीं गोलियां तड़तड़ाल है

बिहार में बहार है, पटना में अपराधियों की भरमार है, कहीं हुई हत्या तो कहीं गोलियां तड़तड़ाल है

पटना. बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक होती  जा रही है. खासकर राजधानी पटना में अपराधियों द्वारा जिस तरह से हर दिन हत्या और गोलियां चलाने की वारदातों को अंजाम दिया रहा है वह पुलिस के इक़बाल को नई चुनौती दे रहा है. 

पटना में शनिवार को एक ही रात में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई. मरने वालों में पुलिसकर्मी से लेकर निर्वाचित जनप्रतिनिधि तक शामिल हैं. क्या शहरी और क्या ग्रामीण इलाके जिले के हर हिस्से में इन दिनों गोलियां तड़तड़ा रही हैं. खासकर पंचायत चुनाव के परिणाम आने के बाद ग्रामीण इलाकों में चुनावी दमखम दिखाने वालों की ओर से अब चुनावी रंजिश में एक दूसरे पर गोलियां बरसाई जा रही हैं. वहीं कुछ जगहों पर जानलेवा हमले में घायल हुए लोग अस्पतालों में दाखिल हैं. 

शनिवार रात पटना जिले के नौबतपुर थाना क्षेत्र के लोदीपुर गांव में अपराधियों ने वार्ड पार्षद संजय वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी। स्थानीय लोगों के अनुसार  लोदीपुर निवासी शिवनाथ वर्मा के पुत्र वार्ड पार्षद संजय वर्मा (30 वर्ष) गांव के एक शादी समारोह से घर लौट रहे थे। जैसे ही संजय वर्मा अपने घर के पास पहुंचे कि पूर्व से घात लगाए अपराधियों ने घेरकर गोली मार दी। गोली संजय वर्मा के सिर में लगी और उनकी मौत घटनास्थल पर ही हो गयी।

वहीं पटना के बाढ़ अनुमंडल में के पंडारक पूर्वी पंचायत के नव निर्वाचित मुखिया गोरेलाल यादव और पुलिस एएसआई राजेश कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई जबकि अन्य घायल व्यक्ति का उपचार चल रहा है.  मुखिया गोरेलाल भी शनिवार रात एक शादी समारोह में शामिल होने बाढ़ के वाजितपुर स्थित हैप्पी मैरेज हॉल में गए थे. रात करीब 11 बजे जयमाल के समय मोटरसाइकिल से दो बदमाश आए और मुखिया पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी. फायरिंग में मुखिया, समारोह में शामिल पंडारक थाने के एएसआई राजेश कुमार और ग्रामीण लालबाबू को गालियां लगीं. बादमाशों ने 12 राउंड से अधिक फायरिंग की. घायलों को पटना के पत्रकार नगर थाना क्षेत्र स्थित राजेश्वरी अस्पताल ले जाया गया, जहां मुखिया और एएसआई की मौत हो गई. 


इसी तरह शनिवार को ही मोकामा प्रखंड के हाथीदह थाने में औंटा पंचायत के पूर्व मुखिया समर्थकों ने नव निर्वाचित मुखिया के समर्थकों पर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है. यहाँ चुनाव परिणाम के बाद आपसी मारपीट में कुछ लोग घायल हो थे. 

ऐसे में सवाल बड़ा है कि क्या बिहार में अपराधियों को पुलिस का डर नहीं है. एक दिन पूर्व ही बिहार में अपराध कम होने की बात कही गई थी. बिहार पुलिस मुख्यालय ने दावा किया है कि बिहार में आपराधिक घटनाओं में कमी आयी है. नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो द्वारा वर्ष 2020 में जारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय अपराध दर 487.9 है, उसकी तुलना में बिहार में अपराध का दर 211.3 रहा है. बिहार अपराध के मामले में देश में 25वें स्थान पर है.

मुख्यालय ने कहा कि सभी राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के अपराध की तुलना में बिहार का 25वां स्थान है. हत्या के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर बिहार का स्थान 8वां है. वर्ष 2019 में नवंबर तक हत्या के कुल 2910 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि इस वर्ष नवंबर तक मात्र 2607 मामले दर्ज किए गए हैं तथा अपराध दर क्रमश: 2.6, 2.6 एवं 2.3 है. लिहाजा हत्या के अपराधों में गिरावट आई है. 

पुलिस भले बिहार में अपराध कम होने का दावा कर अपनी पीठ थपथपा रही हो लेकिन जिस तरह से राजधानी पटना के शहरी और ग्रामीण इलाकों में  गोलियां चल रही है. हत्याएं हो रही हैं वह पुलिस के दावों से विपरीत है. 




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