जानें क्या है षट्तिला एकादशी व्रत, कब है इसकी शुभ तारीख और मुहूर्त, क्या है इसकी पूजा विधि, इसकी कथा और पर्व का महत्व

जानें क्या है  षट्तिला एकादशी व्रत, कब है इसकी शुभ तारीख और  मुहूर्त,  क्या है इसकी पूजा विधि,  इसकी कथा और पर्व का महत्व

डेस्क... हिंदू धर्म में कई देवी –देवताओं को हम पूजते है ऐसे में एक पर्व है  एकादशी जिसका की हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है. एकादशी तिथि हरेक  माह में दो दिन और साल में 24 बार होती है. हर एकादशी का अलग-अलग महत्व  होता है. इन सभी एकादशी तिथि को हम अलग-अलग नाम से   जानते है. माघ माह के कृष्ण  पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि को षट्तिला एकादशी के नाम से जाता है. षट्तिला एकादशी के दिन मनुष्य को भगवान विष्णु का ध्यान करना चाहिए और उनके नाम पर व्रत रखना चाहिए. इस साल  षट्तिला एकादशी का व्रत 7 फरवरी 2021 दिन रविवार को रखा जाएगा.

षटतिला एकादशी की  शुभ मुहूर्त :-

एकादशी तिथि का प्रारंभ 7 फरवरी दिन रविवार 06 बजकर 26 मिनट पर होगा और यह  समाप्त 8 फरवरी दिन सोमवार को  04 बजकर 47 मिनट पर होगी 

षटतिला एकादशी व्रत विधि

1.षट्तिला एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें.

2 .स्नान के बाद साफ-सुथरा वस्त्र धारण करें.

3. उसके बाद श्री हरि विष्‍णु को स्‍मरण करें और व्रत करने का  संकल्‍प लें

4.घर  में हो सके तो पूजा स्थल पर श्री हरि विष्‍णु की मूर्ति या फोटो के सामने दीपक जलाएं.

5.फोटो या मूर्ति के पास प्रसाद व फलों का भोग लगाएं.

6. षटतिला एकादशी के दिन काले तिल के दान का बड़ा ही महत्त्व है.

 7. भोग लगाने के बाद पंचामृत में तिल मिलाकर भगवान को स्‍नान कराएं

 8.भगवान को धूप-दीप दिखाकर विधिवत् पूजा-अर्चना करें

 9.अन्न, तिल आदि दान करने से धन-धान्य में वृद्धि होती है.

  10.भगवान की कपूर और घी से आरती उतारें. 

 11.पूरे दिन निराहार रहें. शाम के समय कथा सुनने के बाद फलाहार करें. रात में जागरण करें.

 12 .इस दिन असहाय लोगों की विशेष रूप में मदद करने से भगवान विष्णु की कृपा बरसती है.

क्या है षटतिला एकादशी व्रत कथा :-

पौराणिक मान्यता के अनुसार वर्षों पहले पृथ्वी लोक पर एक ब्राह्मण परिवार में विधवा महिला रहती थी, जो की भगवान विष्णु की अनन्य भक्त थी. वह पूरी श्रद्धा से भगवान हरि की पूजन करती थी. एक बार महिला ने एक माह तक का व्रत रखकर भगवान विष्णु की उपासना की. व्रत के प्रभाव से उसका शरीर तो शुद्ध हो गया, लेकिन वह विधवा महिला कभी अन्न दान नहीं करती थी. तब एक बार भगवान विष्णु स्वयं उस विधवा महिला की परीक्षा लेने  उनसे भिक्षा मांगने पहुंचे. जब श्री हरि ने भिक्षा मांगी तो उस विधवा ने एक मिट्टी का पिण्ड उठाकर उन्हें दे दिया. जैसे ही महिला देह त्याग कर परलोक पहुंची तो उसे एक खाली कुटिया और आम का पेड़ मिला.

खाली कुटिया को देखकर महिला ने प्रश्न किया कि मैं तो  पूरे तन –मन से धर्म का पालन करती थी , फिर भी मुझे खाली कुटिया क्यों मिली? तब भगवान विष्णु ने कहा कि यह तुम्हारे  अन्नदान नहीं करने तथा मुझे मिट्टी का पिण्ड दान देने के कारण हुआ है. तब भगवान विष्णु ने उस महिला को बताया कि जब देव कन्याएं आपसे मिलने आएं और वो आपको षटतिला एकादशी के व्रत का विधान बताएं तो उसे ध्यान से सुने और समझे . कथा सुनने के बाद महिला ने पूरे विधि-विधान के साथ षटतिला एकादशी का व्रत किया, जिससे उसकी कुटिया धन धान्य से भर गई.

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