सुपौल में कर्मचारी पर मेहरबान विभाग, तबादले के बाद भी नहीं किया मुक्त

सुपौल में कर्मचारी पर मेहरबान विभाग, तबादले के बाद भी नहीं किया मुक्त

SUPAUL : जिले भर में विभिन्न विभागों में वर्षों से जमे कर्मचारी शासन की तबादला नीति पर भारी पड़ रहे हैं। शासन की तबादला नीति के अनुसार तीन वर्ष से अधिक समय तक कर्मचारी व अधिकारी को एक ही स्थान पर पदस्थ नहीं रहने दिया जाए। लेकिन अधिकारियों-कर्मचारियों के हौंसले इस कदर बुलंद है कि तबादला आदेश हो जाने के बाद भी किसी न किसी बहाने से मलाईदार कुर्सियों पर जमे रहते हैं। ताजा उदाहरण जिले की त्रिवेणीगंज अनुमंडल कार्यालय का है। जिन्होंने शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुये अभी तक दो कर्मी अपने हस्तांतरित जगहों पर ज्वाइन नहीं ली। 

जिला अधिकारी कौशल कुमार के आदेश अनुसार कार्यपालक सहायकों व आई0टी सहायकों की पत्रांक 366/16 जुन को हस्तांतरण किया गया। जिसमें अनुमंडल कार्यालय में दो कर्मी कार्यपालक सहायक पंकज वर्मा व आई0 टी सहायक भुपेष कुमार का हस्तांतरण हुआ। लेकिन जुगाड़ के दम  इन दो कर्मी अपने हस्तांतरण जगहों पर ज्वाईन नही किया। कार्यपालक सहायक पंकज वर्मा की हस्तांतरण त्रिवेणीगंज अंचल कार्यलय त्रिवेणीगंज एवं भुपेष कुमार का  प्रखंड कार्यकाल छातापुर .पंकज वर्मा की जगह पर मेघा कुमारी और भुपेष कुमार की जगह पर दिनेश कुमार झा को ज्वाइन लेना था। 

लेकिन नियमों को ताख पर रखकर कभी राजनैतिक रसूख तो कभी आला अधिकारियों के संरक्षण की वजह से कार्यमुक्त न होकर जमे हुए हैं। जबकि  नियमों के साथ साथ चुनावी वर्ष में 3 वर्ष से एक ही स्थान पर पदस्थ शासकीय कर्मचारी चाहे वह अधिकारी या अन्य पद पर पदस्थ हो उसका स्थानांतरण नियमानुसार होता है। लेकिन त्रिवेणीगंज में नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। गौर करने वाली बात है कि एक तरफ शासन ने सरकारी कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और कामकाज में पारदर्शिता लाने के मकसद से तबादला नीति बनाई है।

सबसे बड़ा सवाल यह की पंकज वर्मा की जगह पर मेघा कुमारी को ज्वाइन लेना था। आखिर किस कारण ज्वाइन नही लिया गया। क्या मेघा कुमारी को कार्य करने की अनुभव नही था.अगर मेघा कुमारी को कार्य करने की अनुभव नही था तो अन्य कर्मी भी हो सकते थे। ऐसे में शासन की दोहरी मानसिकता को ले लोगों में चर्चा तेज हो गई है। इन पर दबी जुबान में राजनीतिक सहित विभागीय अधिकारियों का संरक्षण की बातें भी सामने आती रही हैं। सूत्र बताते हैं वर्षो से जमे पंकज वर्मा कि ग्रामीण क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सेटिंग - गेटिंग है। 

सुपौल से पप्पू आलम की रिपोर्ट

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