कोमालिका बारी बनीं रिकर्व कैडेट विश्व चैम्पियन

कोमालिका बारी बनीं रिकर्व कैडेट विश्व चैम्पियन

तीरंदाजी  में  भारत को एक और खुशखबरी  मिली है। दरअसल भारतीय तीरंदाज़ कोमालिका बारी ने भी रविवार यानि कि 25 अगस्त को विश्व युवा तीरंदाज़ी चैंपियनशिप के रिकर्व कैडेट वर्ग के एक तरफा फाइनल में जापान की उच्च रैंकिंग वाली सोनोदा वाका को हराकर स्वर्ण पदक हासिल किया है।कोमालिका  ने कहा की मैं काफी खुश हूं. कोच के कारण ही  खिताब जीत पायी हूं.  मैं फाइनल में थोड़ी नर्वस थी, लेकिन हर तीर शूट करने से पहले मैं लंबी, लंबी सांसें लेकर  अपने आप को एकाग्र करने की कोशिश कर रही थी. 

 

आपको बता दें कि जमशेदपुर की टाटा तीरंदाज़ी अकादमी की 17 साल की खिलाड़ी कोमालिका अंडर-18 वर्ग में विश्व चैम्पियन बनने वाली भारत की दूसरी तीरंदाज़ बनीं। उनसे पहले दीपिका कुमारी ने 2009 में यह खिताब जीता था। इस साल की शुरुआत में ही भारत को विश्व तीरंदाज़ी से निलंबित करने की निर्णय लिया गया था, परंतु इस निर्णय को बदला गया और भारत को मौका दिया गया जिसमें कोमालिका ने स्वर्ण पदक जीतकर बोर्ड मेंमबर्स को करारा जवाब दिया है। 

उनसे पहले दीपिका कुमारी को 2009 में यह खिताब मिला था. कोमोलिका ने सेमीफाइनल मुकाबले में भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया था. विश्व तीरंदाजी से निलंबन लागू होने से पहले भारत ने अपनी आखिरी प्रतियोगिता में दो स्वर्ण और एक कांस्य पदक के साथ अभियान का समापन किया.  

 

इससे पहले भारतीय तीरंदाजों ने शनिवार को मिश्रित जूनियर युगल स्पर्धा में स्वर्ण और शुक्रवार को जूनियर पुरुष टीम स्पर्धा में कांस्य जीता था। इसके बाद कोमालिका बारीने स्वर्ण पदक को अपने नाम किया और बनीं रिकर्व कैडेट विश्व चैम्पियन। उनके पिता का कहना है, “हमने तो बिटिया को सिर्फ इसलिए तीरंदाजी सीखने के लिए भेजा था, ताकि वह फिट रहे, लेकिन हमें क्या पता था कि कोमालिका तीरंदाजी को अपना करियर बना लेगी।“


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