कुढ़नी उप चुनावः 27 तारीख के लिए भाजपा की अलग तैयारी, सभी बूथों पर होगा यह काम....

कुढ़नी उप चुनावः 27 तारीख के लिए भाजपा की अलग तैयारी, सभी बूथों पर होगा यह काम....

PATNA: बिहार विधानसभा की कुढ़नी सीट पर उप चुनाव हो रहे हैं। इस उप चुनाव में सत्ताधारी JDU और BJP की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। राजद ने इस बार अपनी सीटिंग सीट सहयोगी जेडीयू के हवाले कर दिया है। चुनावी मैदान में जेडीयू और बीजेपी तो है हीं, मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी और ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी है। वैसे तो लड़ाई आमने-सामने की है, लेकिन ये दोनों छोटे दल जेडीयू और बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं. हाल ही में संपन्न हुए गोपालगंज विस सीट के चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने अपनी क्षमता दिखाकर महागठबंधन को टेंशन में ला दिया है। वहीं बोचहां सीट पर हुए उप चुनाव में सहनी की पार्टी वीआईपी ने बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाया था। भारतीय जनता पार्टी 2020 के चुनाव में कुढ़नी सीट पर कम अंतर से चुनाव हारी थी. उप चुनाव में बीजेपी इस कोशिश में है कि कुढ़नी पर फिर से कब्जा हो।

27 तारीख को बीजेपी करेगी बड़े स्तर पर प्रचार  

कुढ़नी सीट पर उप चुनाव में बीजेपी पूरी ताकत से जनसंपर्क करने में जुट गई है। मंगलवार से चुनाव प्रचार में और तेजी आएगी। बीजेपी इस बार भी अपने विधायकों को पंचायतों में ड्यूटी लगाई है। वहीं 27 नवंबर को पूरे कुढ़नी क्षेत्र में बड़े स्तर पर जनसंपर्क किया जायेगा. 27 तारीख को रविवार है, उस दिन इस विस क्षेत्र के सभी 320 बूथों पर पीएम मोदी के मन की बात कार्यक्रम आयोजित की गई है। 'मन की बात' कार्यक्रम में सभी बूथों पर स्थानीय या फिर प्रदेश स्तर के एक नेता मौजूद होंगे। 11.00 बजे से 11.30 बजे तक मन की बात कार्यक्रम होगा। इसके बाद बूथ पर मौजूद नेता-कार्यकर्ता पूरे दिन उक्त बूथ के वोटरों से मिलेंगे और जनसंपर्क करेंगे। बीजेपी नेतृत्व ने अपने नेताओं को 27 तारीख को संंबधित मतदान केंद्र पर रहने का निर्देश दिया है। 

कुढ़नी के रण में ये हैं प्रमुख उम्मीदवार 

बता दें, कुढ़नी में जेडीयू ने जहां पूर्व मंत्री मनोज कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया है. वहीं बीजेपी ने पूर्व विधायक केदार प्रसाद गुप्ता पर एक बार फिर से दांव आजमा रही है। जबकि वीआईपी ने कुढ़नी से चार बार विधायक रहे शाधु शरण शाही के पोता निलाभ कुमार पर दांव खेला है। ओवैसी की पार्टी ने पूर्व जिला पार्षद गुलाम मुर्तजा अंसारी को मैदान में उतारा है. गुलाम मुर्तजा जेडीयू के साथ-साथ आरजेडी में भी रह चुके हैं.

2020 चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी केदार गुप्ता की हुई थी हार 

 विस चुनाव 2020 में राजद कैंडिडेट अनिल सहनी ने बीजेपी प्रत्याशी केदार गुप्ता को महज 712 मतों से पराजित किया था। राजद कैंडिडेट को 78549 मत मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर रहे बीजेपी को 77837 वोट । इस तरह से इस चुनाव में जेडीयू का सहयोग मिलने के बाद भी बीजेपी कैंडिडेट की हार हो गई थी। वहीं तीसरे नंबर पर रहे रालोसपा कैंडिडेट रामबाबू सिंह को 10 हजार 7 मत मिले थे।

2015 में जेडीयू-राजद साथ-साथ थे, फिर भी बीजेपी की हुई थी जीत 

2015 विधानसभा चुनाव की बात कर लेते हैं. 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू का लालू प्रसाद की पार्टी राजद से गठबंधन था। कुढ़नी सीट जेडीयू के खाते में गई थी. राजद का सहयोग मिलने के बाद भी जेडीयू वो सीट जीतने में कामयाब नहीं हो सकी थी। जैसे 2020 के चुनाव में जेडीयू का साथ मिलने के बाद बीजेपी कैंडिडेट जीतने में कामयाब नहीं हो सके थे। 2015 में बीजेपी के कैंडिडेट केदार गुप्ता को 73227 मत मिले थे. वहीं जेडीयू के मनोज कुमार सिंह(कुशवाहा) को 61657 मत मिले थे। इस तरह से 11570 मतों से जेडीयू कैंडिडेट मनोज सिंह की हार हो गई थी. 


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