बड़े-बड़े अस्पतालों को छोड़ जंगल की बस्ती में अपने घुटनों का इलाज करा रहें हैं महेंद्र सिंह धोनी, तस्वीरें हो रही वायरल

बड़े-बड़े अस्पतालों को छोड़ जंगल की बस्ती में अपने घुटनों का इलाज करा रहें हैं महेंद्र सिंह धोनी, तस्वीरें हो रही वायरल

RANCHI : क्रिकेट की दुनिया में महेंद्र सिंह धोनी क्या हैसियत रखते हैं, यह किसी को बताने की जरुरत नहीं है। धोनी बिहार- झारखंड के सबसे बड़े करदाता माने जाते हैं। उन्हें इलाज के लिए देश विदेश के किसी अस्पताल में पैसे की कमी नहीं है। लेकिन बात जब अपने घुटनों के इलाज की आई तो धोनी ने जंगलों में स्थित एक बस्ती का सहारा लिया।  यहां धोनी की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई है, जिनके बाद धोनी की सादगी के आप कायल हो जाएंगे। 

जंगल के वैद्य के पास जाते हैं धोनी

बताया जा रहा है आईपीएल के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों अपने घुटनों के दर्द से परेशान हैं।  रांची में छुट्टी मना रहे धोनी अपने घुटनों के दर्द का इलाज रांची में ही करा रहे हैं।  धोनी रांची से करीब 70 किलोमीटर दूर लापुंग के बाबा गलगली धाम के कातिंगकेला में बैठने वाले वंदन सिंह खेरवार से अपना इलाज करा रहे हैं। 

एक माह से हर चार दिन पर आते हैं धोनी

वंदन ने बताया कि धोनी पिछले 1 महीने से हर 4 दिनों पर उनके पास आते हैं और जड़ी - बूटी वाली दवा से इलाज करा रहे हैं। वैद्य वंदन ने बताया कि धोनी जब पहली बार आये तो उन्हें मैं पहचान ही नहीं सका उनके साथ के लोगों ने बताया कि ये क्रिकेट खेलने वाले धोनी हैं। धोनी जब पहुंचे तो अचानक भीड़ लग गई इसलिए धोनी को आश्रम में ले जाकर उनसे मिला। 

वैद्य वंदन के अनुसार धोनी से मिलकर लगा ही नहीं कि इतने बड़े आदमी से मिल रहा हूं। वंदन ने बताया कि धोनी अभी आखिरी बार 26 जून को इलाज के लिए आये थे।  ने बताया कि दोनों घुटनों में दर्द है, इसलिए उन्हें जड़ी बूटी वाली दवा हर 4 दिन पर एक ग्लास दी जाती है।

देते हैं 40 रुपए फीस

वैद्य वंदन सिंह खेरवार की मानें तो वह इलाज के लिए पहले मात्र 20 रुपये लेते हैं। उसके बाद अगर दवा जरुरत पड़े तो फिर 20 रुपये लगता है। धोनी जब भी आते हैं तो ईमानदारी से 40 रुपये दे देते हैं। 

धोनी के माता पिता आए इलाज कराने

वैद्य वंदन सिंह खेरवार के अनुसार धोनी की मां देवकी और पिता पान सिंह पिछले 3-4 महीनों से अपने घुटनों का इलाज करा रहे हैं। वे दोनों जब इलाज कराने आते तो बताते भी नहीं थे कि वे धोनी के मां और पिता जी हैं। गांव के ही एक व्यक्ति ने दोनों को पहचाना तब उन्होंने जब एक दिन उनसे पूछा कि क्या वे धोनी के मां-पिता जी हैं तब दोनों ने बताया।  

वंदन जी ने बताया कि मां - पिता जी को इलाज से फायदा हुआ तभी धोनी इलाज कराने आ रहे हैं। वैद्य के अनुसार पूरा परिवार बहुत जमीन से जुड़ा है किसी में कोई घमंड नहीं है। 

खुद गांववालों के साथ खिंचवाते हैं तस्वीर

वैद्य वंदन जी ने बताया कि धोनी जब आते हैं तो उनके साथ फोटो खिंचवाने वालों की भीड़ लग जाते हैं। आसपास के सभी लोग आ जाते हैं इसलिए अब जब धोनी आते हैं तो वह से गाड़ी नहीं उतरते हैं। उनकी गाड़ी तक ही दवा पहुंचा दी जाती है। धोनी दवा पीते हैं गांव वालों के साथ खुद से मोबाइल पकड़कर तस्वीर खिंचवाते हैं और चले जाते हैं। वैद्य वंदन ने बताया कि उनके पिता जी भी यही काम करते थे इसलिए वह भी इसी काम में लग गए। पिछले 28 साल से जंगल से जड़ी - बूटी चुनकर लाते हैं और दवा बनाकर लोगों को देते हैं। 

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