एक शादी के मिलते थे 10 हजार, 8 महीने में बनी 6 दूल्हों की दुल्हन

एक शादी के मिलते थे 10 हजार, 8 महीने में बनी 6 दूल्हों की दुल्हन

Desk: 7 दिन पहले रतलाम जिले के सैलाना के पास युवक का शव मिलने के मामले में पुलिस ने लुटेरी दुल्हन के गिरोह का पर्दाफाश कर दिया है. आरोपी युवती पूर्व में राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में झूठी शादी कर चुकी है. सैलाना में 7 दिन पहले महेंद्र पिता मोतीलाल कलाल निवासी बांसवाड़ा की लाश मिली थी. प्रारम्भिक जांच में पाया गया कि युवक की हत्या उसकी पत्नी मीनाक्षी द्वारा की गई थी जिससे महेंद्र की शादी दो दिन पूर्व ही हुई थी. हत्या के बाद आरोपी मीनाक्षी अपने गिरोह के साथ फरार थी.

महेंद्र और मीनाक्षी की शादी मैरिज ब्यूरो के माध्यम से हुई थी. शादी के लिए मीनाक्षी के फर्जी बने भाई ने ढाई लाख रुपये लिए थे जिसके बाद कोर्ट और परिवार की रजामंदी से दोनों की शादी की गई थी. शादी के दो दिन बाद ही मीनाक्षी के रिश्तेदार बनकर आए चार लोगों ने महेंद्र को अपनी गाड़ी में बैठाया और अपने साथ ले गये. अगले दिन महेंद्र का शव सैलाना के पास एक पेड़ से लटका हुआ पाया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अपना खुफिया तंत्र और साइबर सेल सक्रिय कर जांच शुरू की. इस दौरान पुलिस को आरोपी मीनाक्षी के पिता से मिले मोबाइल नंबर की लोकेशन ग्राम बरोली, इंदौर में पाई गई.पुलिस ने लोकेशन पर पहुंचकर मीनाक्षी को गिरफ्तार कर लिया. मीनाक्षी ने पुलिस को बताया कि वह तीन साल पहले अपने पति को छोड़ने के बाद माता-पिता के साथ रह रही थी. इस दौरान मीनाक्षी का अपने परिजनों से भी झगड़ा हो गया और उनसे भी अलग रहने लगी थी.

इस बीच मीनाक्षी की मुलाकात उत्तर प्रदेश निवासी पुष्पेंद्र दुबे नामक युवक से हुई जो शादी कर ठगी करने के मामले में मीनाक्षी का भाई गजेंद्र पुरोहित बनकर मृतक के परिवार से मिला था.मीनाक्षी ने पुलिस को बताया कि उसे एक शादी के 10 हजार रुपये मिलते थे. मीनाक्षी अब तक राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में झूठी शादी का नाटक कर चुकी है. 8 महीने में वह 6 शादियां कर चुकी है. 28 जुलाई की रात सारिका उर्फ़ संगीता नामक महिला, उसका पति बन करकर आया युवक और गजेंद्र, महेंद्र के घर पहुंचे और परिवार में किसी सदस्य के बीमार होने का बोलकर मीनाक्षी को ले जाने लगे. इस दौरान महेंद्र को शंका हुई और उसने भी साथ आने की जिद की.

उसके बाद सभी लोग महेंद्र के साथ इंदौर के लिए निकल गए. रास्ते में महेंद्र को अपने साथ हुए धोखे का अंदाजा हो गया था. इस बात को लेकर सभी लोग महेंद्र से विवाद करने लगे और हाथापाई शुरू हो गई. इसके बाद गजेंद्र टोल नाका पार कर महेंद्र को गाड़ी से बाहर धक्का देकर अपने साथियों के साथ वैन लेकर भाग गया. अपने साथ हुए धोखे से हताश महेंद्र ने कुछ दूरी पर स्थित एक पेड़ पर अपनी शर्ट का फंदा बनाकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस को पहले शंका थी कि युवक की हत्या कर पेड़ पर लटकाया गया था लेकिन पोस्टमॉर्टम और घटना वाले स्थान पर फांसी पर लटकने के लिए लगाए पत्थरों के आधार पर आत्महत्या की पुष्टि की गई.

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