छपरा में चाइनीज सामानों पर भारी पड़ा मेड इन इंडिया, व्यवसायियों ने करोड़ों के कारोबार का लगाया अनुमान

छपरा में चाइनीज सामानों पर भारी पड़ा मेड इन इंडिया, व्यवसायियों ने करोड़ों के कारोबार का लगाया अनुमान

SARAN : दीपों का त्यौहार दीपोत्सव यानी दिवाली में चंद दिन ही शेष हैं। घरों को सजाने और जगमग करने की सामग्रियों से बाजार भर गया है। खास बात यह है कि मेक इन इंडिया इस साल चाइनीज पर भारी पड रहा है। बाजार में कृत्रिम लाईटों  में भारतीय उत्पादों ने कुछ ऐसी जगह बनाई की चाइनीस इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चारों खाने चित हो गए हैं। भारतीय उत्पाद कई मायनों में गुणवत्ता वाले साबित हो रहे हैं, साथ ही सस्ता और टिकाऊ भी हैं। निर्माताओं ने उत्पादों की लागत कम की है। इससे लोगों को लाभ मिल रहा है।

रंग-बिरंगी लाइटों से सजे बाजार

सारण जिले के सभी 20 प्रखंडों के मुख्य बाजार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों से सज गए हैं। सबसे अधिक कृत्रिम लाइट से दुकान पटे हुए हैं। छपरा शहर की बात करें तो शहर के साहिबगंज से लेकर मोना चौक सलेमपुर गांधी चौक गुदरी बाजार भगवान बाजार दरोगा राय चौक समेत अन्य इलाकों में दुकाने कृत्रिम लाइट से सज चुकी हैं। बाजार में जहां तक नजर जाती है वहां इंडियन उत्पाद ही नजर आते हैं। इस साल चाइनीज उत्पाद बाजार से लगभग गायब है। कारण साफ है कि लोगों ने इस बार मेड इन इंडिया को तरजीह दी है ताकि देश का पैसा देश में ही रहे।

क्या कहते हैं इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडर्स संघ के सदस्य

इस संबंध में जब शहर के ही गुप्ता इलेक्ट्रॉनिक गुदरी बाजार के प्रोपराइटर हेमंत कुमार गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बार लोगों को इंडियन लाइट्स अधिक पसंद आ रहे हैं। सारण इलेक्ट्रिक ट्रेडर्स एसोसिएशन के सदस्य अनूप कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि इंडियन एलईडी चाइनीज के मुकाबले थोरी महंगी जरूर हैं, लेकिन ज्यादा टिकाऊ हैं और गारंटी भी है। इस बार कारोबारियों ने मेक इन इंडिया प्रोडक्ट ज्यादा मंगाए हैं। चाइनीज माल भी दिल्ली और कोलकाता से पटना पहुंच रहे हैं। शहर के गुजरी टक्कर मोर के दुकानदार राजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस बार नई डिजाइन में कम बिजली खपत के बाद भी ज्यादा रोशन करने वाली लाइटें हैं। ऐसे में लोगों को यह अधिक पसंद आ रहे हैं।


चाइनीज प्रतिमाएं पर्यावरण के लिए नुकसानदेह

इस बार चाइना मेड कई सामान बाजार में नहीं देखने को मिल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है चाइना और भारत के बीच में चल रहा टेंशन और भारत सरकार के कडे रूख। शहर के श्यामचक स्थित मिट्टी की प्रतिमा और दिये के कारोबारी अशोक कुमार पंडित का कहना है कि पिछले साल कोरोना संक्रमण के कारण कारोबार कम हुआ था। इस बार काफी दिये का आर्डर दिया गया है। चाइनीज लक्ष्मी गणेश की प्रतिमाओं के कारण पर्यावरण प्रदूषित होते हैं क्योंकि इसमें कई प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है।

सारण में इतने का होगा कारोबार

सारण में इस बार 10 लाख रुपये के लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा का कारोबार होगा। चाइनीज लक्ष्मी-गणेश की मांग घटी है। इसका प्रमुख कारण है कि ये ईको फ्रेंडली नहीं होते। पर्यावरण के लिए नुकसान पहुंचाने से ज्यादातर शहरी ग्राहक इससे अब दूरी बना रहे हैं। मिट्टी की प्रतिमा पानी में घुल जाती है। पिछले साल की तुलना में इस बार दोगुना कारोबार होने की संभावना है। वही इलेक्ट्रॉनिक लाइट की बात करें तो सारण में एक से डेढ़ करोड़ रुपये का एलईडी लाइट का कारोबार 02 से 03 करोड़ रुपये का कारोबार होगा। लगभग दो करोड रुपए का दिए व ढकनी का कारोबार होगा। मिट्टी के खिलौने का कारोबार एक करोड़ रुपए का होगा।

बाजार में यह लाइट है उपलब्ध

डीजे ग्लोब -1000, एलईडी डिस्प्ले-150, लाइटिंग फ्लावर पॉट 300, एलईडी झालर-50-100, स्ट्रीप लाइट-250, पिक्सल -350-800 रुपये , डिस्को लाइट- 150  , स्माल झूमर -80-130  रुपये , एलईडी स्टार- 350, फ्रूट लाइट -150-190 रुपये, डायमंड एलईडी- 150, गोल्डेन क्रिस्टल 220-290 रुपये, लाइट स्टार-100-300, ऊं व स्वास्तिक  220-280 रुपये, राइस -30 से 70 रुपये मल्टी - 60 से 130 रुपये राकेट - 70 रुपये आरजीबी -100 रुपये डायमंड - 100 रुपये पिक्सल-100 रुपये है।

छपरा से संजय भारद्वाज की रिपोर्ट 

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