मगही के कबीर मथुरा प्रसाद नवीन की मनाई गयी 93 वी जयंती, विधान पार्षद संजय पासवान ने किया माल्यार्पण

मगही के कबीर मथुरा प्रसाद नवीन की मनाई गयी 93 वी जयंती, विधान पार्षद संजय पासवान ने किया माल्यार्पण

LAKHISARAI : बड़हिया के धरती पुत्र 'मगही के कबीर' कहे जाने वाले कवि मथुरा प्रसाद नवीन जी का 93वां  जयंती  मथुरा प्रसाद नवीन चेतना समिति के तत्वावधान में मनाया गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय  कवि रौशन अनुराग, सौरव कुमार, रूपक कुमार आदि ने अपनी कविता प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को सुनाया। इससे पूर्व उपस्थित लोगों ने नागवती स्थान स्थित स्व. नवीन के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। आज जब कहा जाता है कि देश में असहिष्णुता बढ गई है या मतभिन्न, भिन्न विचारधारा का जबाव हिंसा से दिया जा रहा है तो कुछ लोग इसे क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया बताते हैं। लेकिन सोचिए एक वह दौर भी रहा जब सत्तासीन विनम्र थे, वे विरोधी का भी सम्मान करते थे। आलोचना करने वाले के खिलाफ हिंसात्मक नहीं होते थे बल्कि आत्मवलोकन करते थे। मथुरा प्रसाद नवीन से भी जुड़ा है। 2 सितंबर 1977 को भ्रष्टाचार एवं दुराचार के खिलाफ बड़हिया प्रखंड के छात्र, नौजवान, किसान, मजदूर एवं व्यावसाइयों ने हजारों की संख्या में ऐतिहासिक जुलूस निकालकर जब बिहार के बड़हिया थाना पर प्रदर्शन किया तो अपराधी पुलिस गठजोड़ का नमूना प्रस्तुत करनेवाली बेलगाम पुलिस ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर स्वचालित हथियार से अंधाधुंध गोलीबारी की जिसमें आधा दर्जन से अधिक प्रदर्शनकारियों को मौत हो गई। कई प्रदर्शनकारियों ने अस्पताल में दम तोड़ दिया तो कई लोग विकलांग हो गये। हालांकि इस घटना पर लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने चुप्पी का चादर ओढ़ लिया था और मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर का कोई अता पता नहीं था। खैर, उस समय घटना के दस दिन बाद 12 सितंबर को बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर बड़हिया आये। इस पर 'मथुरा प्रसाद नवीन' ने प्रश्नात्मक लहजे में मुख्यमंत्री से सवाल किया कि- "मरले दिन से कैलियो खोज, एैला ठाकुर दशमा रोज, संते जब गिल गेलखुन गाय, तब कि करतै सीबीआई" (बिहार में नाई को ठाकुर कहा जाता है और किसी की मौत के बाद दसवें दिन लोग नाई से बाल मुरवाते हैं। कर्पूरी ठाकुर की जाति भी नाई थी, इसलिए गुस्साए जनकवि नवीन जी ने उन पर कटाक्ष किया था।

सोचिए आज के दौर में अगर कोई कवि अपने प्रदेश के मुख्यमंत्री या देश के प्रधानमंत्री के लिए ऐसा बोल दे तो उसकी वहीं हत्या भी हो सकती है। कर्पूरी ठाकुर जैसी सहिष्णुता अब के नेताओं में कहां रही और ऐसा नहीं था कि नवीन जी सिर्फ राजनेताओं पर मुखर थे, वे अपने समाज और गांव के अतातायियों के खिलाफ भी इसी भाषा में लिखते थे। उनके गांव में जब अपराधियों की संख्या बढ गई और कई लोग उन अपराधियों के पक्षधर भी थे।  तब उन्होंने अपने गांव वालों के खिलाफ लिखा। हमर गांव हो आला बबुआ, हमर गांव हो आला। बेटा हो बंदूक उठयले बाप जपो हो माला।

आज के दौर जब अपराधी सांसद और विधायक बन रहे हैं और अगर उनके पाप के खिलाफ ऐसा लिख दीजिए तो आपकी हत्या हो सकती है। नवीन जी का युग अलग था और उस दौर के लोग भी। उन्हें "मगही के कबीर" की उपाधि महान कवि नागार्जुन से प्राप्त हुई थी। नागार्जुन, गोपाल सिंह नेपाली, फनीश्वरनाथ रेणु, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, रामधारी सिंह दिनकर, महादेवी वर्मा सरीखे दर्जनों साहित्यकारों के चहेते कवि मथुरा प्रसाद नवीन जी ने यथार्थ के धरातल पर बेबाक टिप्पणी करने में माहिर होने के कारण जन कवि के रूप में ख्याति अर्जित की। साहित्य के माध्यम से समाज में परिवर्तन करने वाले समाज के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने को तैयार  कवि नवीन ने समाज में जागृति पैदा करने के लिए सभी क्षेत्रों के लिए कविताएँ लिखीं थीं। नवीन जी ने इस पूरे क्षेत्र की पहचान साहित्य जगत में स्थापित कराया था।

मौके पर पहुँचे बीजेपी एमएलसी संजय पासवान ने भी नवीन जी के जयंती पर उनको माल्यार्पण किया। इस दौरान नगर अध्यक्षा मंजू देवी, वार्ड पार्षद अमित कुमार, सौरभ कुमार,  रौशन कुमार, रूपक कुमार, संजीव कुमार, एसपी सिंह, शिवशंकर कुमार, अमित कुमार,शेखर शर्मा,कमलेश कुमार,दिग्विजय कुमार सहित कई सदस्य उपस्थित थे।

लखीसराय से कमलेश की रिपोर्ट

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