महान गीतकार ने शैलेंद्र की आज पुण्यतिथि, बेटे ने कहा- सरकारों ने कभी नहीं दिया सम्मान, बिहार से था खास कनेक्शन

महान गीतकार ने शैलेंद्र की आज पुण्यतिथि, बेटे ने कहा- सरकारों ने कभी नहीं दिया सम्मान, बिहार से था खास कनेक्शन

डेस्क ... आज महान गीतकार शैलेंद्र की पुण्यतिथि है। महान गीतकार शैलेंद्र ने वॉलीबुड समेत भाेजपुरी भाषाओं में कई चर्चित गाने लिखे, लेकिन उन्हें वो सम्मान कभी नहीं मिला, जिसके वो हकदार थे। गौरतलब है कि शैलेंद्र भले ही बिहार में नहीं रहे हों, लेकिन उनका बिहार से विशेश कनेंक्शन रहा है। इतना ही नहीं उनके कई गानों में भी गांव की महक साफ रहती है। सामाजिक सरोकारों को उठाने वाले संगीतकार को आज तक वो सम्मान नहीं मिला, जितना उन्हें मिलना चाहिए था। अब ये सवाल शैलेंद्र के बेटे ने भी उठाया है। 

शैलेंद्र की पुण्यतिथि पर उनके बेटे दिनेश शंकर शैलेंद्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने कभी मेरे पिता को सम्मान नहीं दिया। इतना ही नहीं बिहार से हमारा खास कनेक्शन होने के बावजूद यहां की सरकार ने भी कभी सुध नहीं ली। मेरे पिता के नाम पर कभी एक स्कूल या सड़क का नाम तक नहीं रखा गया। इन्होंने राज कपूर के साथ बहुत काम किया। शैलेन्द्र हिन्दी फिल्मों के साथ-साथ भोजपुरी फिल्मों के भी एक प्रमुख गीतकार थे। इनते बड़े संगीतकार होने के बावजूद अब तक सम्मान क्यों नहीं मिला?

बिहार के आरा में हैें महान गीतकार शैलेेंद्र का रूट


बिहार के भोजपुर जिले के अख्तियारपुर में शैलेंद्र का पुश्तैनी मकान था और उन्हें पुश्तैनी घर से बहुत ही लगाव था। हालाकि शैलेंद्र के दादा जी उनके जन्म से बहुत सालों पहले गांव को छोड़कर चले गए थे। शैलेंद्र का जन्म 1921 में पाकिस्तान के रावलपिंडी में हुआ था। इसके बावजूद उन्हें अपने गांव से खासा लगाव था। 

बहुत कम लोगों को यह बात पता है कि प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र का बिहार से खास रिश्ता है। बिहार के आरा जिले के धुसपुर गांव से ताल्लुक रखने वाले शैलेन्द्र का असली नाम शंकरदास केसरीलाल था। वहां उनके पिता केसरीलाल राव ब्रिटिश मिलिटरी हॉस्पिटल (जो मूरी केंटोनमेंट एरिया में था) में ठेकेदार थे। शैलेन्द्र का अपने गांव से कोई ख़ास जुडाव नहीं रहा क्योंकि वे बचपन से अपने पिता के साथ पहले रावलपिंडी और फिर मथुरा में रहे। उनके गांव में ज्यादातर लोग खेतिहर मजदूर थे। 



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