मांझी को संन्यास लेने की सलाह पर गुस्से में मांझी की पार्टी, कहा – हमारी वजह से मंत्री बने घूम रहे हो, अगर हमने समर्थन वापस लिया तो....

मांझी को संन्यास लेने की सलाह पर गुस्से में मांझी की पार्टी, कहा – हमारी वजह से मंत्री बने घूम रहे हो, अगर हमने समर्थन वापस लिया तो....

PATNA : पिछले कुछ दिनों से जीतन राम मांझी और उनकी हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा चर्चा में है। फिर चाहे वह ब्राह्मणों को गाली देने से जुड़ा हो या ब्राह्मणों को भोज कराने का हो। जिस तरह से मांझी का विरोध हो रहा है, उसके बाद हम पूरी तरह के गुस्से में है। अब पार्टी की तरफ से नीतीश सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी दी गई है।

यह धमकी भाजपा कोटे से मंत्री नीरज कुमार बबलू के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने मांझी को राजनीति से संन्यास लेने की नसीहत दी है। नीरज बबलू के इस बयान को लेकर हम ने पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्ता दानिश रिजवान ने मंत्री के बयान पर आपत्ति जाहिर करते हुए कहा है कि वह होते कौन हैं कि मांझी जी को सलाह देनेवाले?


हमारी बदौलत ही बने हैं मंत्री

दानिश रिजवान ने कहा कि जिस मंत्री पद के बल पर वह इतना बोल रहे हैं, वह मांझी जी की पार्टी की बदौलत मिली हुई है। अगर हमने अपनी पार्टी के चार विधायक हटा लिया तो उन्हें असली औकात समझ  में आ जाएगी। अगर हमने समर्थन वापस ले लिया तो वह खुद सड़क पर राम नाम जपते हुए नजर आएंगे।

प्रधानमंत्री और कैलाश विजयवर्गीय को भी बनाया निशाना

दानिश रिजवान यहीं पर रूके। उन्होंने मामले में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और बंगाल बीजेपी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय का नाम लेते हुए कहा कि वह कहते हैं कि सेक्यूलर लोग जानवरों से बद्त्तर होते हैं। देश के प्रधानमंत्री खुद को सेक्यूलर कहते रहे हैं तो क्या पीएम जानवर है। तो सबसे पहले उन्हें संन्यास लेने के लिए कहिए। 

उन्होंने कहा कि कई बार प्रधानमंत्री की जुबान भी फिसली है, तो क्या उन्हें भी राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दीजिएगा। 

बता दें कि बिहार सरकार में मंत्री नीरज कुमार बबलू ने सोमवार को मांझी के ब्राह्मणों के खिलाफ दिए गए बयान की निंदा करते हुए कहा कि मांझी वरिष्ठ नेता हैं, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठाया. इतने सम्मानित जगह तक वे पहुंचे. ऐसी स्थिति इस तरह का बयान देना कहीं से उचित नहीं है। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को राजनीति से संन्यास लेकर 'राम नाम' जपने की सलाह दी थी।


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