नल जल योजना को लेकर राज्य सरकार का फैसला, अब खुद करेंगे बिजली बिल का भुगतान

नल जल योजना को लेकर राज्य सरकार का फैसला, अब खुद करेंगे बिजली बिल का भुगतान

पटना। बिहार सरकार की महात्वाकांक्षी योजना हर घर नल जल योजना को लेकर नया फैसला लिया गया है। सरकार ने योजना में आनेवाले बिजली बिल का खर्च खुद देने का फैसला किया है। जिस पर 150 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। पहले यह समस्या थी कि योजना पर होनेवाले बिजली बिल का भुगतान कैसे किया जाएगा। जिसे अब सुलझा लिया गया है।

फिलहाल एक वार्ड में मोटर पम्प चलने से हर महीने औसतन 2000 रुपये बिजली बिल पर खर्च आ रहा है। पानी की बर्बादी नहीं हो इसके लिये सभी वार्डों में मोटर पम्प संचालन के लिये जिम्मेवार वार्ड क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति (डब्ल्यूआईएमसी) को सुबह दो घंटे और शाम में दो घंटे मोटर चलाने का निर्देश है। पंचायती राज विभाग के अधीन आने वाले कुल 58107 वार्डों में पंचायत राज सरकार की मार्फत लगाये गये मोटर पम्पों के एक साल के बिजली बिल पर औसतन 150 करोड़ रुपये खर्च आएगा। विभाग का आकलन है कि एक वार्ड में 2000 महीना के हिसाब से 24000 सालाना बिजली बिल पर खर्च आएगा। ऐसे में पंचायतों को इस काम से मुक्त करते हुए सभी 58107 वार्डों के बिजली बिल का खर्च राज्य सरकार अपने संसाधन से वहन करेगी। इसके लिए पंचायती राज विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर उसकी अंतिम मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा है।

लगाए जाएंगे प्री-पेड मीटर
हर जिले के जिला पंचायत राज पदाधिकारी को बिजली बिल जमा करने की जिम्मेवारी रहेगी। हर घर नल जल योजना के तहत प्री-पेड मीटर लगेंगे। हर मोटर पम्प में सरकार आईओटी डिवाइस लगा रही है जिसकी मॉनिटरिंग पंचायती राज कार्यालय में बनी कंट्रोल यूनिट से होनी है। 

डीपीआरओ आसानी से बिजली के खर्च पर निगरानी और नियंत्रण रख सकते हैं। डिवाइस के माध्यम से पेयजल आपूर्ति के समय एवं मात्रा पर नजर रखी जाएगी। सिग्नल से पता चलेगा की किस वार्ड में पानी की सप्लाई की जा रही है और किस वार्ड में समय पर पानी की सप्लाई नहीं हो रही। सभी वार्डों में आइओटी डिवाईस लगने के बाद इसकी देखभाल अनुरक्षक करेंगे और डीपीआरओ जिला मुख्यालय से लगातार नजर रखेंगे।


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