नवादा के बाहुबली अपनी पत्नी के बल पर सियासत में रखना चाहते हैं धमक, पढ़िए पूरी स्टोरी

नवादा के बाहुबली अपनी पत्नी के बल पर सियासत में रखना चाहते हैं धमक, पढ़िए पूरी स्टोरी

नवादा :जिले की राजनीति में पिछले कुछ दशकों से बाहुबलियों का काफी दबदबा रहा है. परिस्थितियां बदली तो अपनी सक्रियता व दबदबा बनाए रखने के लिए अपनी पत्नियों को आगे कर दिया. 2015 से 2020 के बीच काफी कुछ बदला है.

दो बड़े बाहुबली और दबंग नेता सजायाफ्ता हो चुके हैं. ऐसे में इस चुनाव में वे लोग अपनी पत्नियों को राजनीतिक वारिश बना मैदान में उतार दिया है. साल 2018 के दिसंबर में सजायाफ्ता हुए पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद ने अपनी पत्नी विभा देवी को पहले 2019 के चुनाव में राजद से लोकसभा का चुनाव लड़वाया. कामयाबी नहीं मिली, इस बार विधानसभा चुनाव में भी नवादा सीट से राजद के टिकट पर मैदान में हैं. 2005 से 2015 के बीच 10 वर्षों तक वारिसलीगंज से विधायक व जदयू के जिलाध्यक्ष रहे प्रदीप कुमार पिछला चुनाव हार गए थे। अब सजायाफ्ता हो चुके हैं। ऐसे में पत्नी आरती देवी को किसान सलाहकार के पद से इस्तीफा दिलाकर चुनावी मैदान में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर उतार दिया है। सजायाफ्ता होने के कारण मुखिया के पद गंवाने वाले रंजीत यादव गत चुनाव में पत्नी फुला देवी को गोविदपुर से भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में उतारा था। इस बार खुद लोजपा से प्रत्याशी हैं।


 हिसुआ से कांग्रेस प्रत्याशी बनी नीतू सिंह के पति शेखर उर्फ पप्पु सिंह सजायाफ्ता हैं। वारिसलीगंज से भाजपा विधायक व प्रत्याशी अरूणा देवी के पति अखिलेश सिंह भी बाहुबली की श्रेणी में शुमार रहे हैं। उन्होंने 2000 के चुनाव में पत्नी अरूणा देवी को निर्दलीय मैदान में उतार विधानसभा तक पहुंचा दिया था. बाहुबल और धनी नवादा विधायक कौशल यादव ने अपनी ताकत के बूते ही पत्नी पूर्णिमा यादव को 2005 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजेता बना दिया था. रजौली सुरक्षित सीट को अगर छोड़ दिया जाए तो शेष चार विधानसभा क्षेत्रों में दबंग और बाहुबलियों की दखल पिछले दो दशक से देखी जा रही है.

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