शहाबुद्दीन के निधन के बाद प्रशासन से परिवार अकेला जूझता रहा, अब अंतिम संस्कार के बाद नेताओं में क्रेडिट लेने की मची होड़

शहाबुद्दीन के निधन के बाद प्रशासन से परिवार अकेला जूझता रहा, अब अंतिम संस्कार के बाद नेताओं में क्रेडिट लेने की मची होड़

NEW DELHI : सीवान के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के निधन के लगभग 55 घंटे के बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके अंतिम संस्कार से पहले परिजन और पुलिस प्रशासन के बीच कई घंटों तक नोकझोंक चला। परिजन चाहते थे कि उनका अंतिम संस्कार सिवान के उनके पैतृक गांव प्रतापपुर में हो। हालांकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिजन दिल्ली में ही अंतिम संस्कार कराने के लिए राजी हो गए।

दिल्ली में अंतिम संस्कार के लिए राजी होने के बाद फिर एक बार परिजन और पुलिस प्रशासन आमने-सामने आ गए। एक तरफ परिजन चाहते थे कि शहाबुद्दीन का अंतिम संस्कार दिल्ली स्थित शाहीन बाग या ITO के कब्रिस्तान में हो। वहीं पुलिस प्रशासन मंगोलपुरी स्थित एक कब्रिस्तान में शव को दफनाना चाहती थी। हालांकि तमाम कोशिशों के बाद पुलिस प्रशासन ITO के कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार कराने के लिए तैयार हो गई।

शहाबुद्दीन के निधन के बाद एक तरफ जहां परिवार प्रशासन से अकेला जूझता हुआ नजर आ रहा था। वहीं अब शहाबुद्दीन के अंतिम संस्कार के बाद अलग-अलग पार्टियों के नेताओं ने परिजन के साथ खड़ा होने का दिखावा शुरू कर दिया। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई पार्टियों के नेताओं में अंतिम संस्कार की क्रेडिट लेने की होड़ मची है।

एक तरफ बिहार में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव अपनी राजद पार्टी में चल रही हलचल को कम करने के  शहाबुद्दीन के परिवार के साथ खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अन्य पार्टियां अल्पसंख्यक वोटरों को लुभाने के लिए परिवार के साथ खड़ी दिख रही है।

तेजस्वी का दावा- 'ITO में अंतिम संस्कार की व्यवस्था हमने कराई'

शहाबुद्दीन के निधन बाद 50 घंटे तक गायब रहने वाले तेजस्वी यादव ने अपने एक फेसबुक पोस्ट में लिखा 'पोस्ट्मॉर्टम के बाद पुलिस प्रशासन शहाबुद्दीन के शव को कहीं और दफ़नाना चाह रहा था लेकिन काफ़ी कोशिशों के बाद कमिशनर से बात कर परिजनों द्वारा दिए गए दो वैकल्पिक स्थानों में से एक ITO क़ब्रिस्तान की अनुमति दिलाई गयी। ईश्वर मरहूम को जन्नत में आला मक़ाम दें और मग़फ़िरत फ़रमाये।' 

AAP विधायक ने कहा- 'हमने ऑफिस से ऑर्डर निकाला'

वहीं दिल्ली के ओखला से विधायक और आम आदमी पार्टी के फायर ब्रांड नेता आमानतुल्लाह खां ने तो कहा- 'तमाम कोशिशों के बाद भी दिल्ली पुलिस नें कोरोना नियमों का हवाला देकर पूर्व सांसद मरहूम शहाबुद्दीन साहब की मय्यत सिवान ले जाने नहीं दी। दीन दयाल अस्पताल में मरहूम के बेटे ओसामा से मुलाकत कर हौसला अफज़ाई की और साथ ही मैनें दिल्ली वक्फ बोर्ड से ऑफिस ऑर्डर निकाला, अहले इस्लाम कब्रिस्तान ITO में तदफीन की जाएगी। अल्लाह ताला मरहूम को जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता करें।' 

सोशल मीडिया पर एक्टिव दिखे ओवैसी, बाद में परिजनों का फोन तक नहीं उठाया

इन सबके अलावा खुद को मुस्लिम और अलपसंख्यकों का मसीहा कहने वाले वाले असदुद्दीन ओवैसी भी केवल ट्विटर पर ही एक्टिव नजर आएं। अंतिम संस्कार से पहले शहाबुद्दीन को लेकर एक्टिव दिखने वाले ओवैसी ने शहाबुद्दीन के परिजनों का फोन तक नहीं उठाया। शहाबुद्दीन के एक रिश्तेदार ने बताया कि 'हमने ओवैसी को भी फोन करने की कोशिश की, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।'

मांझी ने राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की अपील की थी

वहीं इससे पहले जीतन राम मांझी ने तो शहाबुद्दीन का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ कराने की अपील कर डाली थी। यह जानते हुए कि तिहाड़ जेल मेन सजा काट रहे शहाबुद्दीन को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना संभव नहीं है। इसके अलावा सीवान राजद के कई वरिष्ठ नेता भी अपने-अपने स्तर पर बयान देते रहे।

धीरज सिंह की रिपोर्ट...



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