सत्ता के गलियारे में न्यूज4नेशन का बजा डंका ! महागठबंधन सरकार के 5वें दिन ही 'जंगलराज रिटर्न्स' की खबर किया ब्रेक, मजबूरन सरकार को लेना पड़ा एक्शन

सत्ता के गलियारे में न्यूज4नेशन का बजा डंका ! महागठबंधन सरकार के 5वें दिन ही 'जंगलराज रिटर्न्स' की खबर किया ब्रेक, मजबूरन सरकार को लेना पड़ा एक्शन

पटनाः बिहार में अब महागठबंधन की सरकार है। 10 अगस्त को नीतीश कुमार नई सरकार के मुख्यमंत्री और तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बने हैं। नीतीश कैबिनेट में मंत्रियों का शपथग्रहण 16 अगस्त को होने की संभावना है। इसके पहले ही बिहार में जंगल राज रिटर्न की आहट सुनाई पड़ने लगी है। महागठबंधन की सरकार बनने के 5 दिनों के अंदर न्यूज4नेशन के बड़े खुलासे से सत्ता के गलिय़ारे में हड़कंप मच गया। न्यूज4नेशन ने बिहार समेत देश की जनता को बताया कि किस तरह से नई सरकार बनते ही जेल में बंद बाहुबली कानून को ठेंगे पर लेने लगे हैं। खुलासे के बाद नीतीश सरकार को एक्शन लेने के लिए विवश होना पड़ा। 

न्यूज4नेशन की खबर ने सरकार को एक्शन लेने पर किया मजबूर 

न्यूज4नेशन ने 14 अगस्त को बड़ा खुलासा किया था। हमने बताया कि किस तरह से जेल में बंद बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं। वे न्यायिक हिरासत में होने के बाद भी पेशी के बहाने अपने पटना आवास पर पहुंच गये और परिवार के सदस्यों और कार्यकर्ताओं के साथ मीटिंग की। तस्वीर के साथ खबर ब्रेक करने के बाद सत्ता के गलियारे में खलबली मच गई। महागठबंधन की सरकार में जगंलराज रिटर्न की आहट की पहली खबर ब्रेक हुई थी। खबर के बाद न सिर्फ सत्ता के गलियारे में बल्कि पुलिस मुख्यालय में खलबली मच गई। पुलिस मुख्यालय के अपर महानिदेशक जेएस गंगवार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए . साथ ही सहरसा एसपी से इस मामले में रिपोर्ट मांगी. महागठबंधन सरकार की पोल खुलने और पुलिस मुख्यालय हरकत में आने के बाद सहरसा के पुलिस कप्तान लिपि सिंह ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक एएसआई, चार सहायक आरक्षी और एक सह चालक को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही एसपी लिपि सिंह ने सहरसा जेल प्रशासन की भूमिका पर भी संदेह जाहिर करते हुए जांच करने की बात कही है। वहीं सहरसा जिले के डीएम भी इस मामले को लेकर गंभीर हैं। 

12 अगस्त को पटना में सैर कर रहे थे आनंद मोहन 

गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया हत्याकांड मामले में बाहुबली पूर्व सांसद आनंद मोहन को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। बाद में उपरी अदालत ने सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया था। आनंद मोहन सहरसा जेल में बंद हैं. लेकिन बिहार में महागठबंधन की सरकार बनने के बाद वो पटना में सैर करते हुए दिखे थे। रक्षाबंधन के दिन 12 अगस्त को आनंद मोहन पुलिस अभिरक्षा में पटना में थे. इस दौरान वे जेल में रहने की बजाय पुलिसिया सुरक्षा में घर-परिवार में घूम रहे थे और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद कर रहे थे। आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद राजद से विधायक हैं. जबकि पत्नी पूर्व सांसद लवली आनंद राजद की वरिष्ठ नेत्री हैं।

पेशी के बहाने सैर का खेल  

जानकारी के अनुसार, पूर्व सांसद आनंद मोहन को पटना सिविल कोर्ट में एक केस में पेशी के लिए लाया गया था। 12 अगस्त को वे सीधे अपने पाटलीपुत्रा स्थित आवास पहुंच गये। इसके बाद वहां पर अपने समर्थकों के साथ बैठक की। इस दौरान उनकी पत्नी लवली आनंद और राजद विधायक बेटे चेतन आनंद भी मौजूद रहे। बजाप्ता बैठक की तस्वीर की खिंचाई गई.आनंद मोहन अपने पाटलिपुत्रा स्थित 166/B स्थित आवास पर काफी समय बिताया। सूत्र बताते हैं कि इसके बाद वे पटना के विधायक कॉलनी भी गये। रक्षाबंधन के दिन विधायक कॉलनी कौटिल्य नगर में कई लोगों ने उन्हें देखा. पूरे तामझाम के साथ फॉच्यूनर गाड़ी में शान से जा रहे थे। उनके साथ पुलिस की एक गाड़ी भी दिखी थी।

 आनंद मोहन को सुनाई गयी थी मौत की सजा

गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या मामले में पटना की निचली अदालत ने पूर्व सांसद आनंद मोहन को 2007 में फांसी की सजा सुनाई थी. आनंद मोहन के साथ पूर्व मंत्री अखलाक अहमद और अरुण कुमार को भी मौत की सजा सुनाई गई थी. बाद में पटना हाईकोर्ट ने सजा को उम्रकैद में बदल दिया. इसी केस में आनंद मोहन की पत्नी और पूर्व सांसद लवली आनंद, छोटन शुक्ला के भाई मुन्ना शुक्ला, शशि शेखर और छात्र नेता हरेंद्र कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने दिसंबर 2008 में सबूत के अभाव में इन्हें बरी कर दिया था. आनंद मोहन फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गये, लेकिन अदालत ने 2012 में हाईकोर्ट के फैसले को बहाल रखा. बाकी आरोपी बरी हो गये, लेकिन आनंद मोहन अभी भी जेल में हैं.


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