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'नीतीश' ने बाप-दादा की राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया...हाथ में है क्या जो हिस्सा देंगे ? छोटे भाई का बड़े भाई पर बड़ा प्रहार

'नीतीश' ने बाप-दादा की राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया...हाथ में है क्या जो हिस्सा देंगे ? छोटे भाई का बड़े भाई पर बड़ा प्रहार

PATNA: उपेंद्र कुशवाहा ने जेडीयू को छोड़ दिया. 2021 में नीतीश कुमार के हाथों पार्टी में शामिल हुए थे. 20 फरवरी 2023 को JDU के साथ-साथ विधान पार्षद का पद भी छोड़ने का ऐलान कर दिया. साथ ही नई राजनीतिक पार्टी राष्ट्रीय लोक जनता दल के गठन का ऐलान भी कर दिया. कुशवाहा इस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए गए हैं. पटना में जेडीयू कार्यकर्ताओं के साथ दो दिवसीय बैठक के बाद आज उपेंद्र कुशवाहा ने प्रेस कांफ्रेंस कर बड़ा ऐलान किया है.  कुशवाहा ने आज ऐलान कर दिया कि वे विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे रहे हैं. जमीर बेचकर अमीर नहीं बन सकते हैं.

बाप-दादा की राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया

उपेन्द्र कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि हमारे बड़े भाई ने अपना राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया. ऐसे में हम हिस्सा क्या मांगे. उनके हाथ में क्या है जो अपने भाई को हिस्सा देंगे। जब हमें पार्टी छोड़ने को कहा गया था तब हमने (उपेंद्र कुशवाहा) कहा था कि वैसे नहीं जाएंगे, हिस्सा लेकर जाएंगे. तब हम हिस्सा की बात करते थे. अब हम हिस्सा किस आधार पर मांगेंगे. मुख्यमंत्री के पास है क्या कि उनसे हिस्सा मांगे. मुख्यमंत्री ने सारी चीज तो गिरवी रख दिया है. बाप-दादा की राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया है. आज महसूस कर रहे हैं कि हम जो हिस्सा मांग रहे थे,अब तो नीतीश कुमार के हाथ में राजनीतिक जायदाद है ही नहीं. उन्होंने तो बंधक रह दिया. बंधक उन हाथों में रखा जिन्होंने बिहार को बर्बाद करने का काम किया. उनके हाथों में नीतीश जी ने अपनी जायदाद बंधक रख दी. नीतीश कुमार के हाथ में जीरो है. बड़ा भाई के हाथ में जीरो है तो छोटा भाई क्या हिस्सा मांगे.

उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आज से एक नई राजनीतिक पारी की शुरुआत हो रही है. बिहार भर के पार्टी के साथ ही जनता दल यूनाइटेड के तमाम साथी चाहे बड़े नेताओं हों पंचायत स्तर के कार्यकर्ता, 2- 4 लोगों को छोड़कर सभी लोगों ने अपनी चिंता व्यक्त की.  उसी के उपरांत यह तय हुआ कि वैसे साथियों को पटना बुलाया जाए. उनसे विमर्श किया जाए कि क्या करना है. 2 दिनों तक विमर्श हुआ. सब लोगों ने विमर्श में निर्णय लिया. जिस निर्णय से हम आपको अवगत करा रहे हैं. नया निर्णय लेने की परिस्थिति क्यों पैदा हुई...


लगभग 2 साल पहले हम जनता दल यूनाइटेड में आए. तब एक विशेष परिस्थिति राज्य के सामने थी. नीतीश कुमार के ऊपर जिस विरासत को संभालने की जिम्मेदारी बिहार की जनता ने दी थी .उसके पहले कर्पूरी ठाकुर के निधन के बाद जननायक कि वह विरासत की जिम्मेदारी लालू प्रसाद यादव को दी थी. लालू यादव को बड़ा समर्थन मिला. उस विरासत को संभालने की जिम्मेदारी उनके ऊपर आई. सत्ता में आए तो शुरुआती दौर में तो उन्होंने जनता की भावना का ख्याल रखा और जननायक की जो विरासत उनके हाथ में आई थी उस अनुरूप कदम उठाए बाद के दिनों में उनमें भटकाव आ गया. बाद के दिनों में लालू प्रसाद यादव ने अपने परिवार के लिए काम करना शुरू किया, जिसका खामियाजा उन्हें आज तक भुगतना पड़ रहा है.

 इसके बाद नीतीश कुमार के ऊपर वह विरासत संभालने की जिम्मेदारी दी. जॉर्ज फर्नांडिस साहब के आशीर्वाद से नीतीश कुमार आगे बढ़े. उस समय बिहार जल रहा था, झुलस रहा था. जनता परेशान थी. उसी स्थिति से बाहर लाने के लिए 10-12 वर्षों तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में संघर्ष चला . तब बिहार के लोगों ने नीतीश कुमार को आशीर्वाद दिया. हम सब लोग संघर्ष के दिनों में उनके साथ रहे. नीतीश जी ने कर्पूरी ठाकुर की उस विरासत को आगे बढ़ाने का काम बहुत अच्छे तरीके से किया. इस काम के लिए उन्हें हम हृदय से धन्यवाद देते हैं. उन्होंने बिहार को उस खौफनाक मंजर से बाहर निकालने का काम किया. हर तरह से अमन चैन शांति कायम हुई. बिहार विकास की ओर बढ़ चला. नीतीश कुमार जी ने बहुत अच्छा काम किया. लेकिन कहा जाता है न... अंत भला तो सब भला. अंत में भला नहीं तो कुछ नहीं भला. नीतीश कुमार जी ने बहुत अच्छा किया, लेकिन अंत में आकर अंत भला तो सब भला नहीं हुआ. अंत बुरा हो गया. आज नीतीश कुमार जी जिस ओर चल पड़े हैं वह बहुत ही बुरा है. न सिर्फ नीतीश कुमार के लिए बल्कि बिहार की जनता के लिए, जनता दल यूनाइटेड के लिए, पार्टी के साथियों के लिए, सबके लिए बुरा है. 

उपेन्द्र कुशवाहा ने आगे कहा कि 2022 में महागठबंधन बनने के थोड़े ही दिन बाद आरजेडी के तरफ से गठबंधन में डील की चर्चा होने लगी. उसका दावा होने लगा. स्वयं नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से कहना शुरू किया कि हम आगे बिहार का दायित्व राष्ट्रीय जनता दल के नेता (तेजस्वी) के ऊपर सौंपना चाहते हैं. उन्होंने घोषणा कर दी कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसके लिए  उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के व्यक्ति का नाम लिया. जब यही स्थिति आई उसी समय से मन में चिंता शुरू हो गई. हमारे सामने दो रास्ता था. पहला यह कि कर्पूरी ठाकुर की विरासत को चुपचाप उनके ही हाथों में जाते हुए देखते रहें. दूसरा यह कि हम सामने आएं. हम लोगों को लगा कि चाहे जिस तरीके की परिस्थिति का सामना करना पड़े, राजनीतिक धर्म और कर्तव्य समझते हैं तो फिर से हम लोगों को उठ खड़ा होना चाहिए. हमलोगों को किसी भी हालत में कर्पूरी ठाकुर की विरासत को उन हाथों में नहीं जाने देना चाहिए, जिन हाथों ने बिहार मरोड़ने का काम किया.

उन्होंने कहा कि प्रारंभ में मैंने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री से आग्रह किया. उनसे मिलकर कहा कि ऐसी स्थिति ठीक नहीं है. उदाहरण के रूप में हमने बताया कि महागठबंधन के बाद उपचुनाव हुए उसका परिणाम बताता है कि अपना आधार खत्म हो रहा. पार्टी बर्बादी की ओर जा रही है. हमने मुख्यमंत्री को कहा, व्यक्तिगत रूप से भी मिल कर कहा. नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि वे कहे कि मिलकर कहना चाहिए था, तो हमने मिलकर भी बता दिया था. कई बार बताया, पार्टी के मंच पर भी उठाया, विधायक दल की मीटिंग में उठाई. हर मंच पर बात कहने के बाद भी नहीं सुनी गई. पार्टी बर्बाद होते जा रही थी, लगातार जनाधार खिसकते जा रहा है. उस वक्त जब हमने सवाल उठाना शुरू किया तो मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उपेंद्र कुशवाहा को जहां जाना हो चला जाए. उपेंद्र कुशवाहा ने तब कहा था कि वैसे नहीं जाएंगे, हिस्सा लेकर जाएंगे. तब हम हिस्सा की बात करते थे. अब हम हिस्सा किस आधार पर मांगेंगे. मुख्यमंत्री के पास है क्या कि उनसे हिस्सा मांगे. मुख्यमंत्री ने सारी चीज तो गिरवी रख दिया है. बाप-दादा की राजनीतिक संपत्ति को गिरवी रख दिया है. आज महसूस कर रहे हैं कि हम जो हिस्सा मांग रहे थे,अब तो नीतीश कुमार के हाथ में राजनीतिक जायदाद है ही नहीं. उन्होंने तो बंधक रह दिया. बंधक उन हाथों में रखा जिन्होंने बिहार को बर्बाद करने का काम किया. उनके हाथों में नीतीश जी ने अपनी जायदाद बंधक रख दी. नीतीश कुमार के हाथ में जीरो है. बड़ा भाई के हाथ में जीरो है तो छोटा भाई क्या हिस्सा मांगे.