बेगूसराय में नीतीश कुमार ने कराई कराई फायरिंग ! गिरिराज का बयान - सत्ता में बैठे हैं धृतराष्ट्र

बेगूसराय में नीतीश कुमार ने कराई कराई फायरिंग ! गिरिराज का बयान - सत्ता में बैठे हैं धृतराष्ट्र

पटना. बेगूसराय गोलीकांड में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बयान पर बवाल छिड़ गया है. सीएम नीतीश ने कहा था कि हमलावर ने पिछड़े व मुस्लिम कम्युनिटी को टारगेट किया. उनकी इस टिप्पणी पर अब भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है. केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने गुरुवार को नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार जिस तरह बेगूसराय में सीरियल फायरिंग को जाति से जोड़कर उन्माद फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, उससे लगता है कि नीतीश कुमार ने ही फायरिंग करवाई है. 

गिरिराज सिंह ने गोलीकांड में मृतक और घायल व्यक्ति की जाति बताते हुए भी नीतीश कुमार के बयान को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने एक ट्विट कर कहा, Nitish Kumar has lost his sense of responsibility (नीतीश कुमार ने जिम्मेदारी की भावना खो दी है). उन्होंने कहा, घायल की जाति जाने सरकार- अपराधी हैं अब तक फरार- जय हो सुशाशन की सरकार. 

नीतीश के बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए गिरिराज ने बताया कि मृतक चंदन जाति से कुर्मी था. वहीं घायलों में बाढ़ का विशाल सोलंकी राजपूत, तेयाय का दीपक कुमार बरौनी का अमरजीत कुमार, मराची का मोहन राजा जाति से भूमिहार हैं. इसी तरह मोकामा का रंजीत यादव और कसहा का भरत यादव दोनों यादव है. अन्य घायलों में फुलवडिया का नितेश कुमार जाति से पंडित (कुम्हार), मंसूरचक गोविंदपुर का नीतीश कुमार बनिया और प्रशांत कुमार रजक जाति से आते हैं.

गिरिराज ने नीतीश की मृतकों और घायलों की जाति खोजकर टिप्पणी करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, जंगलराज में मुसलमानों को गोली मार दी जाए तो नीतीश बाबू को दर्द होता है... सत्ता में बैठे धृतराष्ट्र को आम बिहारियों की जान की चिंता नहीं है।

हालांकि मृतकों और घायलों पर गिरिराज के दावों से अलग कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार कापर जाति से, अमरजीत कुमार दास जुलाहा जाति, गौतम कुमार पाठक ब्राह्मण, विशाल सोलंकी राजपूत, दीपक कुमार चौधरी भूमिहार, रोहित कुमार पंडित जाति से कुम्हार, चंदन कुमार धानुक, भरत और रंजीत दोनों यादव, जीतो पासवान और प्रशांत कुमार रजक जाति से धोबी हैं. ऐसे में जातियों को लेकर कुछ मतभिन्नता आई है लेकिन नीतीश कुमार की टिप्पणी पर लोग सोशल मीडिया पर आपत्ति जता रहे हैं. उनके बयान को कानून व्यवस्था के मोर्चे पर चुनौती झेलते राज्य में बेहद असंवेदनशील कहा जा रहा है.


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