मंहगाई और बेरोजगारी नहीं, राम मंदिर निर्माण के विरोध में काले कपड़े पहनकर आए थे कांग्रेसी, अमित शाह ने बता दी सच्चाई

मंहगाई और बेरोजगारी नहीं, राम मंदिर निर्माण के विरोध में काले कपड़े पहनकर आए थे कांग्रेसी, अमित शाह ने बता दी सच्चाई

NEW DELHI : बीते शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं द्वारा बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी सहित गांधी परिवार के खिलाफ काले कपड़े पहनकर अपना विरोध जताया था। उसके बाद अब गृह मंत्री अमित शाह ने बड़ा हमला किया है। अमित शाह ने कहा है कि कांग्रेस का यह विरोध महंगाई और बेरोजगारी के लिए नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के विरोध में किया था।

पूर्व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने विरोध-प्रदर्शन के लिए 5 अगस्त की तारीख चुनने को लेकर कांग्रेस की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने महंगाई के विरोध की आड़ में दरअसल मुस्लिम तुष्टीकरण की चाल चली है।

आज ही रखी गई थी राम मंदिर निर्माण की नींव

अमित शाह ने कहा कि दो साल पहले वर्ष 2020 में 5 अगस्त के दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था ऐसे में 'आज का दिन कांग्रेस ने इसलिए काले कपड़ों में विरोध के लिए चुना, क्योंकि वे इसके माध्यम से संदेश देना चाहते हैं कि हम राम जन्मभूमि के शिलान्यास का विरोध करते हैं और अपनी तुष्टिकरण की नीति को आगे बढ़ाना चाहते हैं।'शाह ने दावा किया कि कांग्रेस मंदिर निर्माण पर अपना विरोध जता रही है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई और महंगाई के मुद्दे तो महज बहाना हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस खुले तौर पर मंदिर का विरोध नहीं कर सकती थी, इसलिए उसने एक गुप्त संदेश देने की कोशिश की है।


कांग्रेस ने कहा – घृणित मानसिकता की सोच

शाह के आरोपों के बाद कांग्रेस की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। शाह के इस आरोप के जवाब में कांग्रेस ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने उसके (कांग्रेस के) शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने का घृणित प्रयास किया है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि सिर्फ बीमार मानसिकता के लोग ही ऐसे फर्जी तर्क दे सकते हैं। 

उन्होंने ट्वीट किया, 'आज महंगाई, बेरोजगारी और जीएसटी के खिलाफ कांग्रेस के लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करने एवं इससे ध्यान भटकाने का गृह मंत्री ने घृणित प्रयास किया।' उन्होंने दावा किया, 'सिर्फ बीमार मानसिकता के लोग ही ऐसे फर्जी तर्क दे सकते हैं। साफ है, आंदोलन से उठी आवाज सही जगह पहुंची है।'

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