औरंगाबाद के एनपीजीसीएल में 1980 मेगावाट बिजली का हो रहा है उत्पादन, गुजरात को दी जा रही है 50 मेगावाट बिजली

औरंगाबाद के एनपीजीसीएल में 1980 मेगावाट बिजली का हो रहा है उत्पादन, गुजरात को दी जा रही है 50 मेगावाट बिजली

AURANAGABAD : भारत की सबसे बड़ी ऊर्जा उत्पादक कंपनी एनटीपीसी की संपूर्ण स्वामित्व वाली नबीनगर पावर जेनरेटिग कंपनी लिमिटेड (एनपीजीसीएल) की तीसरी यूनिट से बिजली का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के साथ ही इस मेगा पावर प्रोजेक्ट की कुल बिजली उत्पादन क्षमता 1980 मेगावाट हो गई है। इस पावर प्रोजेक्ट में 660 मेगावाट की कुल 3 यूनिट का निर्माण किया जाना था और अब तीसरी यूनिट के निर्माण के साथ इस परियोजना का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। एनपीजीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजकुमार पांडेय ने बुधवार को बताया कि तीसरी यूनिट का ट्रायल रन 6 मार्च 2022 को सफलतापूर्वक कर लिया गया था। लेकिन सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी के आदेश के बाद अब तीसरी यूनिट से 660 मेगावाट बिजली का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया गया है। 


उन्होंने बताया कि इस परियोजना का निर्माण कार्य वास्तविक रूप से बॉयलर के इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही 31 जनवरी 2013 से शुरू हुआ था। इस प्रकार इस पूरी परियोजना के निर्माण में लगभग 9 वर्षों का समय लगा। परियोजना की प्रारंभिक लागत 13,624 करोड़ रुपए थी जो विभिन्न कारणों से बढ़कर निर्माण पूरा होने तक 19,412 करोड़ रुपए हो चुकी है। यह परियोजना 2971 एकड़ भूमि पर स्थापित की गई है। इसे सालाना 7.०3 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता है। इसकी पहली यूनिट से जुलाई 2019 में बिजली का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हुआ था जबकि दूसरी यूनिट ने मार्च 2०21 में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया था। उन्होंने बताया कि यहां से उत्पादित होने वाली कुल 1980 मेगावाट बिजली में बिहार को 1678 मेगावाट बिजली दी जा रही है। झारखंड का हिस्सा 21.60 मेगावाट, उत्तर प्रदेश का हिस्सा 225.94 मेगावाट एवं सिक्किम का हिस्सा 3.60 मेगावाट है। परियोजना की पहली और दूसरी यूनिट से बिजली उत्पादन का जितना हिस्सा झारखंड और सिक्किम द्बारा खरीदा जाना था वह नहीं खरीदा जा रहा है। ऐसी स्थिति में अब एनपीजीसी ने गुजरात सरकार से करार किया है और 5०.45 मेगावाट बिजली गुजरात भी इस परियोजना से खरीद रहा है। 

उन्होंने बताया कि सुपर क्रिटिकल तकनीक से स्थापित इस पावर प्लांट की दक्षता काफी उच्च स्तर की है। इसलिए कम कोयले से ज्यादा बिजली का उत्पादन हो रहा है। इस वजह से इस परियोजना से उत्पादित बिजली बेहद सस्ते दरों पर राज्य सरकारों को मिल रही है। फिलहाल इस परियोजना से बिजली उत्पादन की लागत 4.85 रुपये प्रति यूनिट आ रही है। उन्होंने बताया कि कोयला आपूर्ति के लिए परियोजना का कॉन्ट्रैक्ट सीसीएल और बीसीसीएल से है। इसके साथ ही कोयला के हालिया संकट से उबरने के लिए इसने 5 लाख मीट्रिक टन कोयला विदेशों से भी खरीदा है। फिलहाल यहां उत्पादित बिजली चार ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से गया और पटना स्थित इआरएलडीसी को आपूर्ति की जा रही है। जिनमें दो डबल सर्किट लाइन गया के लिए तथा दो डबल सर्किट लाइन पटना के लिए स्थापित की गई है। 

मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना के निर्माण में अंतरराष्ट्रीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और पहली यूनिट की टरबाइन जर्मनी से आयात की गई थी। जबकि दूसरी और तीसरी यूनिट की असेंबलिग भारत में ही हुई है। उन्होंने बताया कि यह परियोजना जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक पर आधारित है। इसलिए इसमें पानी की खपत भी बेहद कम है। फिलहाल जल आयोग से इस परियोजना का कॉन्ट्रैक्ट 125 क्यूसेक पानी के लिए था। लेकिन फिलहाल इस परियोजना की तीनों यूनिटें केवल 75 क्यूसेक पानी से ही भली भांति संचालित हो रही है। इस मौके पर कंपनी के महाप्रबंधक (प्रचालन एवं अनुरक्षण) नागेश्वर राव, महाप्रबंधक (मानव सांसाधन) समीरन राय सिन्हा, एप महाप्रबंधक (जन संपर्क) आभा त्रिपाठी पांडेय और एनके पासवान भी मौजूद थे।

औरंगाबाद से दीनानाथ मौआर की रिपोर्ट 

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