पाठ्यक्रम में गीता का ज्ञान पढ़ाने पर भड़का राजद, भाजपा से पूछा- इन नायकों को कौन देगा सम्मान

पाठ्यक्रम में गीता का ज्ञान पढ़ाने पर भड़का राजद, भाजपा से पूछा- इन नायकों को कौन देगा सम्मान

पटना. स्कूली पाठ्यक्रमों में चारों वेदों व भगवद्गीता को शामिल करने के सुझाव पर बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद ने भाजपा सरकार पर सवाल दागा है. राजद ने केंद्र की भाजपा सरकार के खिलाफ आक्रोश प्रकट करते हुए इस पर भाजपा को खूब भला बुरा कहा है. 

दरअसल स्कूली किताबों में सुधार के लिए बनी संसदीय समिति को देशभर से करीब 20 हजार सुझाव मिले है. रिपोर्ट की मानें तो इन्हीं सुझावों में चारों वेदों व भगवद्गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव है. अब इसी पर राजद ने आपत्ति जताई है. राजद ने अमर्यादित तरीके से ‘संघी’ सम्बोधन के साथ लिखा है, फूले, अम्बेडकर, बिरसा, पेरियार, मंडल, कर्पूरी ठाकुर ने तुम्हारी भैंस खोल ली?

संसद के सम्पन्न शीतकालीन सत्र में पेश की गई रिपोर्ट में समिति ने न सिर्फ चारों वेदों व भगवद्गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव है बल्कि इसमें इतिहास की प्रसिद्ध महिलाओं सहित सिखों, मराठा, गुर्जर, जाट तथा आदिवासियों और भारतीय महाकाव्यों को भी किताबों में जगह देने की मांग की गई है. 

भाजपा सांसद डॉ. विनय सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय स्थायी समिति ने यह रिपोर्ट पेश की है. इसमें यह भी कहा गया है कि दुनिया के कई देशों में धार्मिक अध्ययन के लिए समर्पित विश्वविद्यालय हैं जबकि भारत में ऐसा नहीं है, इस  दिशा में भी निर्णय लेने का सुझाव दिया गया है. इसी तरह इतिहास में प्रमुखता के साथ में विक्रमादित्य, चोल, चालुक्य, विजयनगर, गोंडवाना के शासकों, बौद्ध, त्रावणकोर व उत्तरपूर्व के अहोम के इतिहास को शामिल करने का सुझाव है. 


समिति ने अन्य विषयों के अतिरिक्त मुख्य रूप से इतिहास को लेकर कई महत्वपूर्व सुझाव दिए हैं. इसमें आधुनिक इतिहास और 1947 के बाद के इतिहास में आवश्यक तथ्यों को शामिल करने की बात कही गई है. साथ ही पारंपरिक भारतीय ज्ञान प्रणालियों का विज्ञान, गणित, दर्शनशास्त्र, चिकित्सा, आयुर्वेद, ज्ञानमीमांसा, प्राकृतिक विज्ञान, राजनीति, अर्थव्यवस्था, नैतिकता, भाषा विज्ञान व कला की पाठ्यपुस्तकों में समावेश पर ध्यान देने की बात कही गई है. नालंदा, विक्रमशिला व तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों के शैक्षिक पद्धतियों का अध्ययन करके समकालीन संदर्भ में मॉडल विकसित करने का सुझाव है. 

एक अन्य प्रमुख सुझाव में महाराष्ट्र की तर्ज पर पहली के बच्चों के लिए केवल एक किताब के फार्मूले को पूरे देश में लागू करने की बात कही गई है. पर्यावरण संवेदनशीलता, मानवीय मूल्य, इंटरनेट की लत के दुष्प्रभावों को भी परिवर्तित पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई है. अब केंद्र सरकार इस पर निर्णय लेगी. 

अब राजद ने समिति के कुछ सुझावों पर आपत्ति जताते हुए फूले, अम्बेडकर, बिरसा, पेरियार, मंडल, कर्पूरी ठाकुर का नाम लिखकर सवाल उठाया है. 


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