बिहार की सियासी हलचल के बीच पत्ते परखने में लगी राजद, लालू यादव के आखिरी दाव का इंतजार

बिहार की सियासी हलचल के बीच पत्ते परखने में लगी राजद, लालू य

पटना- शनिवार को नीतीश -तेजस्वी की  सरकार ने अपने कार्यकाल के 536 दिन पूरे किए तो बिहार में तीन दिनों से चल रहे सियासी गहमागहमी पर विराम लगने जा रहा है.  महागठबंधन सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है.  नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है तो सीएम नीतीश के लिए रास्ता आसान दिख रहा है लेकिन जिनती आसान राह नीतीश कुमार के लिए दिखाई दे रहा है, तेजस्वी के एक बयान ने इसे उतना ही चुनौतीपूर्ण भी बना दिया है. उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है. राजद में  भी खिचड़ी पक रही है.  इस खिचड़ी के सियासी मसाले तेजस्वी और लालू के पास मौजूद लग रहे हैं.जीतनराम मांझी से लालू की डील नहीं हो पाई है . लेकिन राजद भी खेल करने से पीछे नहीं हटने वाली है.

लालू को बिहार की राजनीति का धुरंधर खिलाड़ी माना जाता है. राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद ने अपने सभी विधायकों को पटना में रहने और फोन बंद नहीं रखने को कहा है.  वहीं, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने कहा कि अबतक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से बदलती राजनीतिक स्थिति को लेकर कुछ नहीं कहा गया है, ऐसे में राज्य में महागठबंधन सरकार कायम है. राजद की हर स्थिति पर पैनी नजर है.  सूत्रों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने अपने विधायकों से यह भी कहा कि हर चीज मुख्यमंत्री नीतीश के नियंत्रण में नहीं है, बिहार में अभी खेला होना बाकी है.

बहरहाल राजद ने अभी अपना पत्ता नहीं खोला है. राजनीतिक पंडितों के अनुसार लालू के अगले कदम का इंतजारहैं.    

राजद  सुप्रीमो लालू प्रसाद की रणनीति में  कांग्रेस रुकावट बन सकती है. कारण कांग्रेस  के 19 एमएलए हैं औरकयासहैं कि कांग्रेस के कई एमएलए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संपर्क में हैं. जदयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी पहले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं उनकी भी कांग्रेस के एमएलए से अच्छे रिलेशन  हैं.  ऐसे में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद की मुहिम को सबसे अधिक खतरा कांग्रेस के एमएलए से है.

बिहार विधानसभा में राजद के अवध बिहारी चौधरी अध्यक्ष हैं.  राजद के लिए विधानसभा में एक संभावना दिखती है. महाराष्ट्र, झारखंड सहित कई राज्यों में स्पीकर ने विधायकी को लेकर फैसले करने में काफी समय लेकर अपरोक्ष तौर पर सत्ताधारी दल को लाभ पहुंचाया है.

बिहार विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या 243 है. साल 2020 के चुनाव में राजद सबसे बड़ी दल बनकर उभरी थी. राजद को 75 सीटों पर जीत मिली थी.वहीं भाजपा 74 सीटों पर जीत मिली थी. भाजपा, जदयू, हम, और वीआईपी  के गठबंधन को 125 सीटों पर विजयश्री मिली थी. बसपा, लोजपा और निर्दलीय को एक-एक सीटों पर जीत मिली थी. वहीं राजद, कांग्रेस और वामदलों के गठजोड़ ने 110 सीटों पर जीत दर्ज किया था. एआईएमआईएम को 5 सीटों पर सफलता मिली थी.  बाद में वीआईपी के चार में से तीन विधायक भाजपा में शामिल हो गये तो  एक एमएलए  की मौत के बाद उस सीट पर राजद ने कब्जा कर लिया. वहीं  एआईएमआईएम के 5 में से 4 एमएलए ने राजद का दामन थाम लिया. तो लोजपा, बसपा और निर्दलीय एमएलए  जदयू में शामिल हो गए. बहरहाल बिहार का सियासी ड्रामा का आज यानी रविवार को पटाक्षेप हो सकता है.