मुश्किल में राजद नेता,तीन एमएलए ने छोड़ा साथ,अब चौथे पर कानूनी फंदा, पटना हाईकोर्ट ने लगाया जुर्माना
पटना- राजद की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. जनवरी 2024 में राजद ने पहले अपनाी सत्ता गवांई तो एनडीए के समर्थन से बनी नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट के दौरान तीन विधायकों ने राजद के खिलाफ जाकर नीतीस को समर्थन कर दिया. नीलम देवी,चेतन आनंद और प्रह्लाद यादव ने राजद का साथ छोड़ दिया और एनडीए के साथ हो गए. अभी ऱसकी तपीश कम भी नहीं हो पाई थी कि राजद के एक और विधायक पर शिकंजा कस गया और वे कानूनी पचड़े में फंस गए हैं. गोपालगंज जिले के बैकुंठपुर के राजद विधायक प्रेम शंकर राय के उपर पटना हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाया है. जुर्माने की राशि को प्रेमशंकर राय को पटना हाई कोर्ट में जमा करना होगा. इस मामले की हाई कोर्ट में 27 फरवरी को फिर सुनवाई होगी. पूरा मामला विधानसभा चुनाव 2020 से जुड़ा हुआ है. बैकुंठपुर के राजद विधायक प्रेम शंकर राय के खिलाफ बैकुंठपुर के पूर्व विधायक और वर्तमान में भाजपा के प्रदेश महासचिव मिथिलेश तिवारी ने पटना हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी.
मिथिलेश तिवारी ने दावा किया है कि प्रेम शंकर राय के द्वारा चुनावी हलफनामे में निर्वाचन आयोग को कुछ जरूरी कागजात नहीं जमा किए गए हैं. इन कागजातों में बैंक संबंधित किसी भी तरह की डिटेल्स में गड़बड़ी की आशंका थी. इसी को लेकर मिथिलेश तिवारी ने पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसी याचिका की सुनवाई करते हुए पटना हाई कोर्ट के जज अरुण कुमार झा ने सुनवाई करते हुए प्रेम शंकर राय पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है.
मिथिलेश तिवारी का आरोप था कि कुछ बैंक के डिटेल्स जिसमें पैसों की ट्रांजैक्शन में गड़बड़ी है. उसको प्रेम शंकर राय के द्वारा चुनाव 2020 में बैकुंठपुर विधानसभा से नामांकन के दौरान निर्वाचन आयोग को कुछ बैंक डिटेल्स का हलफनामा नहीं दिया गया है. उस बैंक से संबंधित डिटेल्स को छुपा लिया गया है. इसी को लेकर उन्होंने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. वहीं इस मामले में राजद विधायक प्रेमशंकर राय का कहना है कि इस केस को लेकर वे खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए हुए हैं. यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.
मिथिलेश तिवारी बैकुंठपुर से 2015 में विधायक रहे हैं लेकिन 2020 में उन्हें प्रेमशंकर यादव ने हरा दिया. मिथिलेश तिवारी ने प्रेमशंकर यादव पर चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले और संपत्ति की जानकारी छुपाने का आरोप लगाया. मामला हाई कोर्ट में गया. कोर्ट ने जुर्माना लगाने के साथ कहा कि प्रतिवादी को एक मौका दिया जाना चाहिए. हाई कोर्ट ने चुनाव याचिका का पूरा रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि जवाब देने में जानबूझ कर देरी की गई है.
जस्टिस अरुण कुमार झा की एकलपीठ ने मिथलेश कुमार तिवारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई. राजद विधायक प्रेमशंकर राय का कहना है कि याचिकाकर्ता को निर्वाचन आयोग से संबंधित कागजात की मांग करनी चाहिए.50 हजार रुपये जुर्माना के सवाल पर राजद विधायक प्रेमशंकर राय का कहना है कि वे जिला मुख्यालय से और संबंधित विभाग से मांगे गए कागजात को लेकर पत्राचार किया है लेकिन समय पर उन्हें का कागजात नहीं मिल पाया है. जिसकी वजह से वे पटना हाई कोर्ट में समय पर पेपर प्रोड्यूसर नहीं कर सके। प्रेम शंकर राय ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं और उनके द्वारा निर्वाचन आयोग में किसी तरह के कागजातों की हेरा फेरी नहीं की गई है.
बहरहाल तीन विधायकों के बगावत के बाद राजद के चौथे विधायक प्रेमशंकर राय भी विवादों में फंस गए हैं.