RTI एक्टिविस्ट मर्डर केसः ताकतवर नेता-माफियाओं तक पहुंचने में पुलिस चंद कदम दूर, वजह बनी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने वाले 'अफसरों पर भी 'पुलिस' करेगी रिपोर्ट

RTI एक्टिविस्ट मर्डर केसः ताकतवर नेता-माफियाओं तक पहुंचने में पुलिस चंद कदम दूर, वजह बनी जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने वाले 'अफसरों पर भी 'पुलिस' करेगी रिपोर्ट

PATNA: मोतिहारी के आरटीआई कार्यकर्ता की हत्या की साजिश में सफेदपोश शामिल हैं। पुलिस की जांच में यह बात साबित होती दिख रही है। पुलिस बस चंद कदम दूर है। सबूत हाथ लगते ही व्हाइट कॉलर वाले नेता-माफिया सलाखों के पीछे होंगे। पुलिस की उन अधिकारियों पर भी नजर है जिनकी वजह से करोड़ों की अतिक्रमित जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया गया।  वही जमीन आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या का कारण बना।

मलाई खाने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी पुलिस करेगी रिपोर्ट 

मोतिहारी पुलिस की जांच आगे बढ़ी है। जांच में यह बात सामने आई है कि अतिक्रमित भूमि को खाली कराने को लेकर ही हत्या की गई. इसमें उस इलाके के 4-5 प्रभावशाली लोग शामिल हैं। पुलिस की नजर उन सब पर है। सिर्फ सबूत मिलने का इंतजार किया जा रहा है। गिरफ्त में आये दो अपराधियों से पूछताछ में काफी कुछ हासिल हुआ है। दो अन्य की गिरफ्तारी के बाद सबकुछ साफ हो जाएगा। जिन दो अपराधियों की गिरफ्तारी हुई है उनमें एक ने बीजेपी नेता का नाम लिया था। इस आधार पर पुलिस ने भाजपा नेता को रातों-रात उठाकर पूछताछ भी की थी। बाद में पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया था। पुलिस सूत्रों से जो जानकारी मिली है उसके अनुसार हरसिद्धी में जमीन के एक प्लॉट को लेकर ही हत्या की गई है। उक्त प्लॉट को लोकायुक्त कोर्ट ने अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया था। लेकिन प्रशासन ने पेट्रोल सील कर जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया। पुलिस यह मानकर चल रही है कि स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से अतिक्रमण को हटाया नहीं जा सका। जबकि साफ आदेश था कि अतिक्रमण हटाई जाए। पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जरूरत पड़ी तो वैसे जिम्मेदार अधिकारियों को चिन्हित कर कार्रवाई को लेकर वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट किया जायेगा।  

न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी!

मोतिहारी के हरसिद्धी में एक आरटीआई कार्यकर्ता की दस दिन पहले दिनदहाड़े ब्लॉक गेट पर गोलियों से भून दिया गया था। पिछले शुक्रवार को इस मामले का खुलासा हुआ और दो अपराधियों को गिरफ्तार किया गया . गिरफ्तारी के बाद आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या के पीछे जो वजह सामने आई है वो चौंकाने वाली है। मोतिहारी पुलिस की पूछताछ में यह पता चला है कि जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर बिपिन अग्रवाल की हत्या कराई गई। इस काम के लिए पैसा जमा किया गया और शूटरों को हायर कर आरटीआई एक्टिविस्ट बिपिन अग्रवाल की हत्या कराई गई। इस केस में एक बड़े बीजेपी नेता का नाम आ रहा है। पुलिस ने बीजेपी नेता को घर से उठाकर रात भर थाने में पूछताछ भी की थी। फिर पीआर बॉंड पर नेताजी को छोड़ा गया था। हालांकि वे अभी भी पुलिस की रडार पर हैं। पुख्ता सबूत मिलने पर नेताजी जेल की हवा भी खा सकते हैं। 

करोड़ों की जमीन पर कब्जा रखना चाहते हैं नेताजी 

आखिर वो कौन सी वजह है जिसको लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट की हत्या की बात सामने आई है। मोतिहारी पुलिस ने एक तथाकथित पत्रकार को भी गिरफ्तार किया है। उससे भी पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। इसके बाद दो शूटरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में जमीन से अतिक्रमण हटाने को लेकर हत्या कराये जाने का खुलासा हुआ है। दरअसल बिपिन अग्रवाल ने हरसिद्धी में करोड़ों की जमीन की पोल खोली थी। वो जमीन परोक्ष- अपरोक्ष रूप से एक बड़े बीजेपी नेता के कब्जे में है. उसी जमीन पर एक पेट्रोल पंप भी है. मामला नीचे से होते हुए लोकायुक्त तक पहुंचा। लोकायुक्त ने उस जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। लेकिन प्रशासन ने उक्त जमीन पर लगे पेट्रोल पंप को तो सील किया लेकिन जमीन से अतिक्रमण आज तक नहीं हटाया।

15 महीने बाद भी जमीन नहीं हुआ खाली पर खुलासा करने वाले की जान चली गई 

 हरसिद्धी प्रखंड कार्यालय के समीप स्थित पेट्रॉल पंप को सील हुए 15 महीने बीतने को है। लेकिन आज तक इस भूमि को अतिक्रमणमुक्त नहीं किया गया। आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल की हत्या के बाद ग्रामीणों में इस बात की चर्चा तेज है। अग्रवाल ने ही लोकायुक्त, पटना के पास याचिका दायर की था। जिसके फैसले आधार पर पेट्रोल पंप को 29 जून, वर्ष 20 में सील कर दिया गया था। तब अरेराज के तत्कालीन एसडीओ धीरेन्द्र कुमार मिश्रा, डीएसपी ज्योति प्रकाश, सीओ सतीश कुमार, थानाध्यक्ष शैलेन्द्र कुमार सिंह व पुलिस टीम की मौजूदगी में पेट्रोल पंप सील करने की कार्रवाई की गई थी। लोकायुक्त, पटना का निर्णय आने से पूर्व में भी पेट्रॉल पंप की 10 कट्ठा 18 धुर गैरमजरूआ भूमि की जमाबंदी उप समाहर्ता, पूर्वी चंपारण ने रद्द कर दी थी। साथ ही 11 फरवरी, वर्ष 20 को अंचलाधिकारी के पास पत्र भेजकर कार्रवाई का आदेश भी दिया था। उक्त भूमि गैर मजरुआ मालिक, खाता संख्या 93 व खेसरा संख्या 299 की जमाबंदी तीन लोगों के नाम से थी। उक्त पेट्रोल पंप बीजेपी नेता का था। जिसे लीज पर लेकर चलाया जा रहा था। 

अपर समाहर्ता ने जमीन को बताया गैर मजरूआ,जमाबंदी किया था रद्द

बता दें,भूमि को अतिक्रमणमुक्त कराने को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता विपिन अग्रवाल ने प्रथम बार अरेराज अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के पास याचिका दायर की थी। केस में बताया था कि पेट्रोल पंप वाली जमीन गैरमजरूआ है। इसे फर्जीवाड़ा कर हड़पा गया है। यहां से जमीन की जमाबंदी रद्द करने का मामला अपर समाहर्ता मोतिहारी से होते हुए पटना में लोकायुक्त के पास पहुंचा। लोकायुक्त के फैसले के मुताबिक उक्त भूमि से पेट्रोल पंप से अतिक्रमणमुक्त कराते हुए लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करनी थी। लेकिन आज तक प्रशासन ने उस जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया। 

कटघरे में प्रशासन 

प्रशासन शायद इस आस में रहा कि दूसरा पक्ष हाईकोर्ट से स्टे-ऑर्डर ले आएगा। मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा है लेकिन अभी तक कोई स्टे का आदेश नहीं दिया. इसके बाद भी प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। इस संबंध में जब हमने अरेराज के एसडीओ संजीव कुमार से पूछा तो उन्होंने बताया कि लोकायुक्त के आदेश के विरुद्ध पंप संचालक हाई कोर्ट में रिट दायर किया है ।उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट को हमलोग जबाब दिए हैं। कोर्ट के आदेश का इंतजार है। जो आदेश आएगा उसे प्रभावी किया जाएगा । मतलब साफ है कि प्रशासन इस इंतजार में है कि पंप संचालक कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आयेगा। पूरे मामले में स्थानीय अंचलाधिकारी से लेकर प्रशासन के अन्य अधिकारी कटघरे में खड़े हैं. 

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