बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने की सरकार से मांग, शिक्षकों / पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन की दूर हो विसंगति

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ ने की सरकार से मांग, शिक्षकों / पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन की दूर हो विसंगति

PATNA : बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष और बिहार विधान परिषद् के सदस्य केदारनाथ पाण्डेय एवं प्रभारी महासचिव विनय मोहन ने संयुक्त बयान में सरकार से मांग की है कि स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के अंतर्गत नियुक्त शिक्षकों / पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन में व्याप्त विसंगतियों का निराकरण किया जाय। 15 प्रतिशत वेतन की वृद्धि को लागू करने के पूर्व विसंगतियों का निराकरण करते हुए इसे लागू करने हेतु सॉफ्रटवेयर विकसित किया जाय। उक्त कोटि के शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के वेतन में निम्न प्रकार की विसंगतियां हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के शिक्षकों , पुस्तकालयाध्यक्षों को विभागीय संकल्प संख्या 1530 दिनांक 11-08-2015 द्वारा 5200-20200 के वेतनमान में क्रमशः ग्रेड-पे 2000 (प्राथमिक शिक्षकों के लिए) 2400 (माध्यमिक शिक्षकों के लिए) 2800 (उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए) लागू किया गया। इस प्रकार प्राथमिक, माध्यमिक , उच्च माध्यमिक शिक्षकों एवं पुस्तकालयाध्यक्षों का पे बैण्ड क्रमशः (6460-2000) , (7510-2400) (8560-2800) होना चाहिए था। लेकिन शिक्षा विभाग ने मूल प्रवेश वेतन क्रमशः (5200- 2000), (5200-2400), (5200-2800) ग्रेड-पे जोड़ते हुए वेतन संरचना को ध्वस्त कर दिया। 

सातवें वेतन पुनरीक्षण में वेतन आयोग की अनुंशसा के आलोक में मूल प्रवेश वेतन 5200-20200 के ग्रेड-पे 2000 पर 21700, ग्रेड-पे 2400 पर 25500 और ग्रेड-पे 2800 पर 29200 होता है। जबकि विभागीय संकल्प संख्या 1632 दिनांक 21-06-2017 की कंडिका 3 (पप) के आलोक में  निर्धारित पे- मैटिक्स के अनुरूप 2000 ग्रेड-पे पर 18160, 2400 ग्रेड-पे पर 19540 और 2800 ग्रेड-पे पर 20560 होता है। इस प्रकार यहां विसंगतियां और भी गहरी हो गयी जिसके फलस्वरूप प्राथमिक शिक्षकों का वेतन माध्यमिक शिक्षकों से अधिक हो रहा है। संकल्प संख्या 1530 दिनांक 11-08-2015 के द्वारा उक्त शिक्षकेां को नियत वेतन में प्राप्त वार्षिक वेतन वृद्धि से वंचित करते हुए वेतन निर्धारण के समय दिनांक 01-07-2015 को तीन वर्ष पर एक वार्षिक वेतन वृद्धि की गणना की गई। 

जबकि विभागीय संकल्प संख्या 610 दिनांक 05-06-2014 एवं शुद्धि पत्र के ज्ञापांक 1649 दिनांक 18-12-2014 के द्वारा नियुक्ति तिथि से वार्षिक वेतन वृद्धि दी गई है, फलस्वरूप प्रासंगिक लाभ शिक्षकों को प्राप्त भी हुआ है। इसके अंतर्गत तीन वर्ष के अन्दर के नियुक्त सभी शिक्षकों के वेतन समान हो गये जबकि इसी संकल्प में यह भी अंकित है कि शिक्षकों को राज्यकर्मियों के अनुरूप वार्षिक वेतन वृद्धि देय होगी। सभी शिक्षकों को नियुक्ति तिथि से दो वर्ष तक ग्रेड-पे से वंचित करने से वरीय एवं कनीय शिक्षकों के बीच ग्रेड-पे का लाभ देने के समय भारी विसंगति पैदा गयी है। वरीय शिक्षकेां का वेतन कनीय शिक्षकों से कम हो रहा है और इसके कारण सभी जिलों में वेतन निर्धारण में एकरूपता भी नहीं है। राजकीयकृत एवं प्रोजेक्ट माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत नियमित प्रधानाध्यापकों/शिक्षकों को 2010 योजना के अन्तर्गत देय तृतीय वित्तीय उन्नयन में ग्रेड-पे 6600 रुपया 10 वर्ष: 20 वर्ष: 30 वर्ष की सेवा पर देने का प्रावधान है, परंतु अभी तक यह मामला शिक्षा विभाग और वित्त विभाग की अकर्मण्यता के कारण सचिवालय का चक्कर लगा रहा है। जिससे सेवानिवृत्त अथवा कार्यरत प्रधानाध्यापकों/शिक्षकों में असंतोष है। 

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