अपने शासन में पिता की छवि का दाग पड़ने नहीं देना चाहते तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद के खिलाफ जाकर ले रहे हैं कड़े फैसले

अपने शासन में पिता की छवि का दाग पड़ने नहीं देना चाहते तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद के खिलाफ जाकर ले रहे हैं कड़े फैसले

PATNA : बिहार में राजद की सरकार बनते ही सबसे लोगों को इस बात का डर था कि लालू राज के जंगलराज फिर से बिहार में लौटेगा। लगातार हो रही अपराधिक घटनाओं और कैबिनेट में दागियों को जब मंत्री बनाया गया तो यह डर साबित होने लगा। मुख्य विपक्षी भाजपा भी इस मुद्दे को लेकर लगातार राजद और नीतीश कुमार को घेरने में लगी हुई थी। खास तौर पर जिस तरह से राजद कोटे से विधि मंत्री एमएलसी कार्तिक कुमार जब से वारंटी होने के साथ फरार होने की बात सामने आई, उसके बाद तेजस्वी यादव असहज थे। यही कारण है कि पहले कार्तिक कुमार को पहले विधि मंत्री के पद से हटाया गया। वहीं इसके महज 12 घंटे बाद ही कार्तिक सिंह को कैबिनेट से ही अलग करने का फैसला ले लिया गया।


लालू की पसंद थे कार्तिक

तेजस्वी से जुड़े सूत्रों की मानें तो वे किसी दागी या दबंग छवि के विधायक-विधान पार्षद को मंत्री बनाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की पैरवी या वीटो के चलते इन्हें कैबिनेट में शामिल किया गया। कैबिनेट में शामिल हुए कार्तिक सिंह के अलावा खनन मंत्री रामानंद याद, सहकारिता मंत्री सुरेंद्र यादव के लिए भी कहा जा रहा है कि इन्हें लालू प्रसाद के कारण मौका मिला था। जबकि तेजस्वी इनके खिलाफ थे।

सरकार बनते ही पार्टी के विधायकों और मंत्रियों के लिए बनाए थे नियम

तेजस्वी को अंदेशा है कि राजद की पुरानी छवि के आधार पर भाजपा सरकार के विरुद्ध जनमत तैयार करेगी। इसी आशंका के चलते तेजस्वी ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद अपने मंत्रियों को शालीन व्यवहार करने की अपील की। इससे पहले कार्यकर्ताओं को सत्ता अति उत्साह से बचने की हिदायत दे दी गई थी। उस पर अमल भी हुआ। लेकिन, अब भी कैबिनेट में कुछ चेहरे ऐसे हैं, जिन पर कई केस चल रहे हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह के आरोप लग रहे हैं, उसके बाद जल्द ही कुछ और चेहरे बदल सकते हैं। तेजस्वी यादव नहीं चाहते हैं कि इस बार उनकी सरकार पर उसी तरह के आरोप लगे जो कि पूर्व में उनके पिता पर लग चुके हैं।

 

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