पटाखों पर प्रतिबंध पर बोली शीर्ष अदालत, हम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, उत्सव की आड़ में किसी की जान से खिलवाड़ की छूट नहीं दी जा सकती

पटाखों पर प्रतिबंध पर बोली शीर्ष अदालत, हम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, उत्सव की आड़ में किसी की जान से खिलवाड़ की छूट नहीं दी जा सकती

Desk. सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर दिये गये पूर्व के आदेश की चुनौती देने वाली याचिका पर सुनावई करते हुए कहा कि यह किसी विशेष समूह या समुदाय के खिलाफ नहीं है. शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उत्सव की आड़ में नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता है. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि उत्सव की आड़ में फटाका निर्माता कंपनी नागरिकों के जीवन के साथ खेल नहीं सकते. कोर्ट ने कहा कि हम किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं हैं, हम यहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं.

इससे पहले शीर्ष अदालत ने छह निर्माताओं को यह कारण बताने का आदेश दिया था कि उनके आदेशों की अवमानना के लिए उन्हें दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करते हुए रोजगार की आड़ में अन्य नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है और इसका मुख्य फोकस निर्दोष नागरिकों के जीवन का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों को कुछ जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए, जिससे कि इस आदेश को लागू किया जा सके. पीठ ने कहा कि आज भी पटाखे बाजार में खुलेआम उपलब्ध हैं. हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हम यहां लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं. हमने पटाखों पर शत प्रतिशत प्रतिबंध नहीं लगाया है. हर कोई जानता है कि दिल्ली के लोग किससे पीड़ित हैं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों पर पहले प्रतिबंध का आदेश विस्तृत कारण बताते हुए पारित किया गया था. सभी पटाखों पर प्रतिबंध नहीं था. यह व्यापक जनहित में था. एक खास छाप बन रही है. यह अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए कि इसे विशेष उद्देश्य के लिए प्रतिबंधित किया गया था. पिछली बार हमने कहा था कि हम भोग के रास्ते में नहीं आ रहे हैं, लेकिन हम लोगों के मौलिक अधिकारों के आड़े नहीं आ सकते.

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