संसदीय क्षेत्र में ही 'चिराग' की अग्निपरीक्षा, तारापुर विस सीट पर 2020 वाली स्थिति बरकरार रखना भी होगी बड़ी चुनौती ?

संसदीय क्षेत्र में ही 'चिराग' की अग्निपरीक्षा, तारापुर विस सीट पर 2020 वाली स्थिति बरकरार रखना भी होगी बड़ी चुनौती ?

PATNA: बिहार विधानसभा की दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं। दोनों सीटें जेडीयू विधायक के निधन से खाली हुई है। एक कुशेश्वरस्थान तो दूसरी सीट है तारापुर। एक तरफ जहां सत्ताधारी जेडीयू अपनी दोनों सीटों को बचाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। वहीं मुख्य विपक्षी दल RJD की कोशिश है कि उप चुनाव में जेडीयू कैंडिडेट को हरा कर उस पर कब्जा किया जाए। हालांकि राजद की राह में कांग्रेस रोड़ा बन गई है। उप चुनाव में राजद-कांग्रेस अलग होकर चुनाव लड़ रहे। दोनों जगह से दोनों पार्टी के कैंडिडेट चुनावी मैदान में है। इन सब के बीच चिराग पासवान की चुनौती भी कम नहीं है। तारापुर विधानसभा सीट चिराग पासवान के संसदीय क्षेत्र में है। लिहाजा यह सीट चिराग के लिए प्रतिष्ठा की है। बड़ा सवाल यही है कि क्या उप चुनाव में चिराग अपनी प्रतिष्ठा बचा पायेंगे या अपने संसदीय क्षेत्र में ही औंधे मुंह गिरेंगे।

2020 में तारापुर सीट पर तीसरे नंबर पर थी लोजपा

लोकसभा चुनाव 2019 में चिराग पासवान अपने संसदीय क्षेत्र जमुई से एनडीए गठबंधन के तहत लोजपा के टिकट से चुनाव जीते थे। वे जमुई लोकसभा क्षेत्र के तारापुर समेत सभी 6 विस सीटों पर बड़े मार्जिन से आगे थे। लेकिन 2020 आते-आते उनकी अपने संसदीय क्षेत्र में ही मिट्टी पलीद हो गई। 2020 विस चुनाव में चिराग पासवान अपने दम पर चुनाव लड़े। तारापुर विधानसभा क्षेत्र से लोजपा के टिकट से मीना देवी चुनावी मैदान में उतरी और तीसरे नंबर पर रहीं। लोजपा को 11264 मत मिले। यानी कुल मत का 6.4 फीसदी. यानी चिराग पासवान अपने क्षेत्र की सीट पर तीसरे नंबर पर रहे। पहले नंबर पर जेडीयू कैंडिडेट मेवालाल चौधरी 7225 मतों से राजद कैंडिडेट दिव्या प्रकाश को हराकर चुनाव जीते थे। 

उप चुनाव में चिराग ने बदला कैंडिडेट

इस बार के उप चुनाव में चिराग पासवान ने कैंडिडेट बदल दिया है। लोजपा(पासवान) गुट ने इस बार  कुमार चंदन को तारापुर से चुनावी रण में उतारा है। वहीं सत्ताधारी जेडीयू की तरफ से राजीव कुमार सिंह, राजद से अरूण कुमार साह और कांग्रेस से राजेश कुमार मिश्रा कैंडिडेट हैं। 2020 और 2021 में काफी अंतर आया है। इस बार लोजपा टूट गई है। रामविलास पासवान के निधन के साल भऱ के अंदर ही पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व में पार्टी के 6 में 5 सांसद अलग हो गये हैं। अब चिराग पूरी तरह से अकेले पड़ गये हैं। ऐसे में चिराग के लिए मुश्किलें और भी बढ़ गई है। सहानुभूति बटोरने को लेकर चिराग पासवान ने पूरे बिहार में आशीर्वाद यात्रा निकाली। वे यह बताना नहीं भूले के चाचा पारस ने सीएम नीतीश के साथ मिलकर हमारे साथ छल किया। इस उप चुनाव में आशीर्वाद यात्रा की भी अग्नि परीक्षा होगी। हालांकि चाचा पारस लगातार चिराग पासवान को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। चाचा पारस खुलकर सीएम नीतीश के साथ हैं। वे तारापुर में भी जेडीयू कैंडिडेट के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। ऐसे में अब देखना होगा कि चिराग पासवान को अपने संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं का भी आशीर्वाद मिल पाता है या नहीं। अगर लोजपा (रामविलास) गुट के कैंडिडेट की स्थिति 2020 से भी खराब हुई तो 2024 लोकसभा चुनाव के लिए चिराग की मुश्किलें और भी बढ़ेंगी। 

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